नहीं रहे सादगी के प्रतीक सर्वोदयी नेता बिंदेश्वरी बाबू

Updated at :08 May 2016 3:39 AM
विज्ञापन
नहीं रहे सादगी के प्रतीक सर्वोदयी नेता बिंदेश्वरी बाबू

रीगा : सर्वोदयी नेता बिंदेश्वरी प्रसाद सिंह अब नहीं रहे. उन्होंने रीगा खादी भंडार परिसर स्थित आवासीय मकान में शुक्रवार की रात अंतिम सांस ली. वे शिवहर जिले के विशुनपुर-किशुनदेव गांव के रहने वाले थे. उनका जन्म वर्ष 1940 में हुआ था. आपातकाल का किया था विरोध मात्र 20 वर्ष की आयु में बिंदेश्वरी बाबू […]

विज्ञापन

रीगा : सर्वोदयी नेता बिंदेश्वरी प्रसाद सिंह अब नहीं रहे. उन्होंने रीगा खादी भंडार परिसर स्थित आवासीय मकान में शुक्रवार की रात अंतिम सांस ली. वे शिवहर जिले के विशुनपुर-किशुनदेव गांव के रहने वाले थे. उनका जन्म वर्ष 1940 में हुआ था.

आपातकाल का किया था विरोध
मात्र 20 वर्ष की आयु में बिंदेश्वरी बाबू ठाकुर युगलकिशोर सिंह के साथ सहकारिता आंदोलन से जुड़ गये थे. उन्होंने सहकारिता को मजबूत करने में काफी समय दिया. शहर स्थित रिंग बांध के अंदर एक छोटी सी झोपड़ी में रह कर इंदिरा गांधी के आपातकाल का विरोध किये थे. इसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा था. यह बात वर्ष 1975 की है. जेल से लौटने पर ललित आश्रम के एक कोने में एक झोपड़ी बना कर उसमें रहने लगे और सादगीपूर्ण जीवन जीने लगे.
भूदान आंदोलन में रहे सक्रिय
विनोबा भावे के भू-दान आंदोलन में भी बिंदेश्वरी बाबू सक्रिय रूप से योगदान दिये थे. गांव-गांव घुम कर भूमिहीनों के बीच जमीन दिलाने का काम किये थे. गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित बिंदेश्वरी बाबू गांव-गांव घुम कर चरखा से सूत काटने एवं स्वावलंबी बनने की शिक्षा व सीख दिया करते थे.
एक बार लड़े थे विस चुनाव
वर्ष 1972 में बिंदेश्वरी बाबू पहली बार शिवहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे. वे चुनाव हार गये थे. जिले के किसी भी सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम में बिंदेश्वरी बाबू बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे. वे अपने पीछे एक पुत्र श्री भगवान सिंह व एक पुत्री सरस्वती देवी के साथ ही भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं.
किसी ने नहीं ली सुध: विगत एक सप्ताह से बिंदेश्वरी बाबू रीगा खादी भंडार में हीं रह रहे थे. दुखद बात यह है कि सादगी के प्रति बिंदेश्वरी बाबू से सप्ताह भर के अंदर जिले के एक भी नेता व सामाजिक कार्यकर्ता ने उनकी सुध नहीं ली. पुत्र की इच्छा थी कि अंतिम संस्कार रीगा स्थित बागमती पुरानी धार के किनारे किया जाये, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों की सहमति के बाद बिंदेश्वरी बाबू के शव का अंतिम संस्कार लखनदेई नदी के किनारे किया गया.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन