चचरी पुल के सहारे कट रही हजारों ग्रामीणों की जिंदगी

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बरसात के दिनों में महीनों तक ग्रामीणों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क रहता है भंग रास्ते के अभाव में नहीं जाते पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के वाहन मेजरगंज : प्रखंड मुख्यालय से कई गांवों समेत नेपाल को जोड़ने वाली बहेरा गांव स्थित मनुष्मारा नदी पर आजादी के दशकों बाद भी पुल निर्माण नहीं कराये जाने […]

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बरसात के दिनों में महीनों तक ग्रामीणों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क रहता है भंग

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रास्ते के अभाव में नहीं जाते पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के वाहन
मेजरगंज : प्रखंड मुख्यालय से कई गांवों समेत नेपाल को जोड़ने वाली बहेरा गांव स्थित मनुष्मारा नदी पर आजादी के दशकों बाद भी पुल निर्माण नहीं कराये जाने से स्थानीय लोगों के लिए सुलभ आवागमन चुनौती बनी हुई है. नेपाल से निकली इस नदी के बरसात के दिनों में उफनाने से लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर देता है. आवागमन पूरी तरह से बंद हो जाता है और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क भंग हो जाता है.रोजमर्रा की सामग्रियों के लिए लोगों को रिश्क लेकर नाव से सफर करना पड़ता है.
सरकारें बदलती गयीं. हर बार ग्रामीण उम्मीद पाले रहे, लेकिन ग्रामीणों को चचरी के सहारे आवागमन करने से छूटकारा नहीं मिल सका. आवागमन करना मजबूरी है, इसलिए ग्रामीण अपने स्तर से हर साल चचरी पुल का निर्माण कर यातायात करते हैं, लेकिन बारिश आने के बाद चचरी पुल भी बह जाता है, जिसके बाद लोगों का एकमात्र सहारा नाव ही रह जाता है.
गांव से वाहन लेकर निकलना है तो काफी दूरी तय कर लोगों को प्रखंड व जिला मुख्यालय के लिए निकलना पड़ता है. अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई यदि अचानक बीमार हो जाये तो क्या हाल होता होगा. बहेरा गांव से गुजरने वाली नदी पर सड़क के बीच पुल नहीं होने के कारण छोटे तस्करों को नेपाल से तस्करी करने में भी आसानी होती है.
वहीं, पुल नहीं होने से न तो पुलिस गस्ती के लिए आती है और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव में जा पाते हैं. यही कारण है कि इस क्षेत्र में नेपाल व जिले के आपराधी आसानी पनाह ले पाते हैं. जब भी चुनाव आता है तो मनुषमारा नदी पर पुल बनाने का आश्वासन जरूर मिलता रहा है, लेकिन ग्रामीणों का अरमान अब तक पूरा नहीं हो सका है. बता दें कि उक्त रास्ता बहेरा, कैलाशपुर, सिजुआ, बेलवा पड़री व पचहरवा समेत आधा दर्जन गांवों समेत नेपाल को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ती है.
स्थानीय पूर्व मुखिया रामबाबू सिंह, लालबाबू सिंह, राम नारायण यादव, बिंदेश्वर यादव, ग्रामीण शंकर यादव, रामा शंकर शाह, विजय कुमार, रामलोचन राय व किशोरी राय ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा अनगिनत बार जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से उक्त स्थान पर पुल निर्माण का अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी है.
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