छपरा में स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब के उपयोग का शिक्षकों को प्रशिक्षण, 216 शिक्षक होंगे शामिल
प्रशिक्षण प्राप्त करते शिक्षक
छपरा में कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब के प्रभावी उपयोग के लिए शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण शुरू हुआ है. 2 से 8 सितंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 216 शिक्षक भाग लेंगे, जिन्हें लैब उपकरणों और गतिविधियों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा.
Saran teacher training: जिला पदाधिकारी के मार्गदर्शन एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी के नेतृत्व में कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, छपरा में स्थापित स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब के प्रभावी संचालन और शैक्षणिक उपयोग को लेकर शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ. प्रशिक्षण कार्यक्रम 2 से 8 सितंबर तक संचालित किया जायेगा. इसके तहत सारण जिले के विभिन्न विद्यालयों के रसायन विज्ञान और भूगोल विषय के कुल 216 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाना है. प्रत्येक दिन निर्धारित संख्या में शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया जा रहा है. प्रतिदिन करीब 45 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
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लैब के उपकरणों की दी जा रही व्यावहारिक जानकारी
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, तकनीकी संसाधनों और गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी देना है. साथ ही शिक्षकों को विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों के बीच अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए सक्षम बनाया जा रहा है.
प्रशिक्षण सत्र के दौरान शिक्षकों को लैब में उपलब्ध उपकरणों के संचालन, उनके शैक्षणिक उपयोग और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को विद्यालय स्तर पर संचालित करने की जानकारी दी गयी. शिक्षकों ने सक्रिय रूप से प्रशिक्षण में भाग लिया और उपकरणों तथा गतिविधियों से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया.
वैज्ञानिक जिज्ञासा और तार्किक सोच विकसित करने पर जोर
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में गंगा सिंह कॉलेज, छपरा के प्राचार्य डॉ. प्रमेंद्र रंजन सिंह को आमंत्रित किया गया. उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की.
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक सोच, अनुसंधान की प्रवृत्ति और खोज की भावना विकसित की जा सकती है. उन्होंने स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब को विद्यार्थियों के लिए प्रयोगात्मक एवं अनुभवात्मक अधिगम का महत्वपूर्ण माध्यम बताया.
कक्षा शिक्षण से लैब आधारित गतिविधियों को जोड़ने पर जोर
प्रशिक्षकों ने शिक्षकों को अंतरिक्ष विज्ञान की अवधारणाओं को सरल और रोचक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाने की जानकारी दी. साथ ही लैब आधारित गतिविधियों को कक्षा शिक्षण से जोड़ने और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम शैक्षणिक उपयोग सुनिश्चित करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी.
प्रशिक्षण के दौरान यह संदेश दिया गया कि स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब केवल उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशाला नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में आकाश को समझने, प्रश्न पूछने, प्रयोग करने और नयी खोज की दिशा में सोच विकसित करने का सशक्त माध्यम है.
डॉ. अजय कुमार की भूमिका रही महत्वपूर्ण
शिक्षा विभाग की ओर से डॉ. अजय कुमार की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही. उनके समन्वय और सक्रिय सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने में महत्वपूर्ण योगदान मिला.
प्रशिक्षक के रूप में डॉ. नसीम अख्तर, अनुप कुमार शर्मा, उदयभान शर्मा, गौरव सिन्हा, बेनीदत्त पांडे, धीरज आनंद, विष्णु कुमार, अमृता गुप्ता, राहुल कुमार और राजेश कुमार ने शिक्षकों को विभिन्न विषयों एवं गतिविधियों से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया.
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