सारण में बाढ़ संकट: गंगा खतरे के निशान से 1.60 मीटर ऊपर; सरयू 96 घंटे में 197 सेंटीमीटर बढ़ी

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बाढ़ के पानी में डूबा रघुनाथ सिंह मध्य विद्यालय, दौलतगंज

सारण जिले में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है. गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.60 मीटर ऊपर है, जबकि सरयू नदी में 96 घंटे में 197 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है. 4 प्रखंडों में सबसे अधिक असर है, जहां सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है. जिला प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है.

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Saran flood: सारण जिले में नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ बाढ़ ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया है. गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 1.60 मीटर ऊपर पहुंच गया है, जबकि छपरा में सरयू नदी का जलस्तर पिछले 96 घंटे में 197 सेंटीमीटर बढ़ा है. गंडक और घाघरा के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है.

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बाढ़ से जिले के रिविलगंज, सदर, सोनपुर और दिघवारा प्रखंड के कई पंचायत और गांव प्रभावित हुए हैं. कई निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर गया है, जबकि 200 से अधिक घरों में पानी घुसने की जानकारी सामने आयी है. लोगों को बिछावन, अनाज और घरेलू सामान तक निकालने का मौका नहीं मिल सका. जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है.

गंगा खतरे के निशान से 1.60 मीटर ऊपर

बाढ़ प्रमंडल के अधिकारियों के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश, नेपाल से पानी आने और मैदानी इलाकों में हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. गांधी घाट पर गंगा का खतरे का निशान 48.60 मीटर है, जबकि 3 सितंबर को जलस्तर 50.20 मीटर दर्ज किया गया. यहां 47 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है.

गंडक का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है. हाजीपुर में गंडक का जलस्तर 50.16 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 50.32 मीटर है. रेवा में गंडक का जलस्तर 53.79 मीटर और सिसवन में सरयू/घाघरा का जलस्तर 56.45 मीटर दर्ज किया गया.

छपरा में घाघरा का जलस्तर 53.14 मीटर रहा, जिसमें 81 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गयी.

चार प्रखंडों में बाढ़ का सबसे अधिक असर

जिले के रिविलगंज, सदर, सोनपुर और दिघवारा प्रखंड में बाढ़ का असर सबसे अधिक है. रिविलगंज के दिलिया रहीमपुर पंचायत में बड़ी संख्या में घरों में पानी घुसने की जानकारी दी गयी है.

पंचायत के मुखिया विष्णु शाह के अनुसार, पंचायत के करीब 3 हजार घर बाढ़ से प्रभावित हैं और 10 हजार से अधिक लोग परेशानी में हैं. भोजन और पेयजल की समस्या भी सामने आने लगी है. ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के लिए नवीगंज, साधु लाल पृथ्वी चंद हाई स्कूल, उमानाथ मंदिर और कटिया बाबा मंदिर में व्यवस्था कराने की मांग की गयी है.

सोनपुर के सबलपुर पंचायत के भी कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गये हैं. दिघवारा में गंगा से सटे कई गांवों में पानी पहुंच चुका है.

नोट: फोटो नंबर 3 सीएचपी  2  है कैप्सन होगा-बाढ़ के पानी में डूबा बाबा धर्मनाथ मंदिर मध्य विद्यालय | Prabhat Khabar Network
बाढ़ के पानी में डूबा बाबा धर्मनाथ मंदिर मध्य विद्यालय

नगर निगम क्षेत्र की सड़कें भी डूबीं

गंगा का पानी अब नगर निगम क्षेत्र के निचले इलाकों की ओर भी बढ़ रहा है. दिलिया रहीमपुर पंचायत से सटे अड्डा नंबर दो स्थित नेवाजी टोला धर्मशाला के पास करीब 300 मीटर सड़क पानी में डूब गयी है.

रावल टोला में साधु लाल पृथ्वी चंद हाई स्कूल के पास करीब एक किलोमीटर सड़क पर पानी जमा हो गया है. नदी का पानी विभिन्न नालों के माध्यम से शहर की ओर बढ़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ने की आशंका है.

नगर निगम के महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने एक दिन पहले स्लूश गेट बंद कराया था. इससे शहर की ओर पानी के प्रवेश को रोकने में मदद मिली.

बिछावन और अनाज तक निकालने का नहीं मिला मौका

बाढ़ का पानी तेजी से घरों में प्रवेश करने के कारण कई परिवारों को अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने का मौका नहीं मिला. बिछावन, अनाज और अन्य घरेलू सामान पानी में डूब गये हैं.

ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षित आश्रय स्थल, भोजन, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है.

पॉलीथिन शीट और राहत सामग्री का वितरण शुरू

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आपदा विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पॉलीथिन शीट, सूखा राशन और अन्य जरूरी सामग्री के वितरण के साथ नावों के परिचालन को लेकर भी कार्रवाई शुरू की गयी है.

प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

डीएम ने प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा

नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को बिना विलंब राहत और बचाव कार्य शुरू करने का निर्देश दिया.

एसडीएम सदर नीतीश कुमार, एसडीएम सोनपुर और संबंधित अंचल अधिकारियों ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया. अधिकारियों को लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत के अनुसार नावों की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है.

नोट: फोटो नंबर 3 सीएचपी 4 है कैप्सन होगा-बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करते एसडीओ  | Prabhat Khabar Network
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करते एसडीओ

वाल्मीकि नगर बैराज से 1.52 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया

अधिकारियों के अनुसार नेपाल और आसपास के क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण नदियों में पानी की आवक बढ़ी है. गुरुवार को वाल्मीकि नगर बैराज में करीब 1.63 लाख क्यूसेक पानी पहुंचा, जिसमें से करीब 1.52 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया.

इससे गंडक के जलस्तर में वृद्धि जारी है. वहीं, पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश और उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र में सरयू में बढ़े पानी का असर सारण में भी दिखाई दे रहा है.

फिलहाल और बढ़ सकता है जलस्तर

बाढ़ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने बताया कि नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है. नेपाल से पानी की आवक और बारिश का प्रभाव कम होने के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है. फिलहाल प्रशासन और विभागीय टीम स्थिति पर नजर रख रही है.

उन्होंने बताया कि गंडक में जलस्तर बढ़ने का प्रमुख कारण वाल्मीकि नगर बैराज से लगातार पानी का डिस्चार्ज होना है, जबकि सरयू के जलस्तर में वृद्धि का कारण पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी का आना है.

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