सारण के लाल रौनित ने 16,830 फीट ऊंची माउंट माछोई पर फहराया तिरंगा, रात 2 बजे शुरू हुई चढ़ाई, सुबह 6:07 पर किया फतह
माइनस तापमान में 16,830 फीट पर लहराया तिरंगा
गड़खा के रौनित कुमार सिंह ने भारतीय वायुसेना में रहते हुए 16,830 फीट ऊंची माउंट माछोई पर तिरंगा फहराया है. यह उपलब्धि कड़ाके की ठंड और खतरनाक रास्तों के बीच हासिल की गई है.
saran mountaineering News: आंखों में बड़ा सपना हो और दिल में उसे पूरा करने का जुनून, तो मुश्किल से मुश्किल पहाड़ भी रास्ता दे देता है. सारण के लाल और भारतीय वायुसेना के कॉरपोरल रौनित कुमार सिंह उर्फ मोहित ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. गड़खा प्रखंड के नरांव टोला निवासी स्वर्गीय राकेश सिंह एवं बेबी सिंह के पुत्र रौनित कुमार सिंह उर्फ मोहित ने जम्मू-कश्मीर की दुर्गम माउंट माछोई की 16,830 फीट ऊंची चोटी फतह कर वहां तिरंगा लहराया.
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माइनस तापमान, बर्फीली हवाओं, गहरी दरारों और खतरनाक चट्टानों के बीच मिली यह सफलता पूरे सारण के लिए गर्व का क्षण है. समुद्र तल से करीब 5,130 मीटर यानी 16,830 फीट की ऊंचाई पर स्थित माउंट माछोई की चोटी तक पहुंचना रौनित के लिए सिर्फ पर्वतारोहण अभियान नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और बड़े सपने की परीक्षा थी.
पूरे बिहार से महज तीन पर्वतारोही हुए शामिल
रौनित की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है कि जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (JIM&WS), पहलगाम के एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स-54 में देशभर से चुनिंदा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था. इस कठिन प्रशिक्षण में पूरे बिहार से महज तीन पर्वतारोही शामिल थे.

2019 में वायुसेना में भर्ती, पर्वतारोहण में भी बनायी पहचान
गड़खा प्रखंड के नरांव टोला निवासी रौनित दिसंबर 2019 में भारतीय वायुसेना में भर्ती हुए थे. वर्तमान में वह कॉरपोरल के पद पर कार्यरत हैं. वायुसेना की ओर से उन्हें विशेष पर्वतारोहण प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था.
पर्वतारोहण के क्षेत्र में रौनित ने पहले ही अपनी मजबूत नींव तैयार कर ली थी. वर्ष 2024 में उन्होंने NIMAS से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स ‘A’ ग्रेड के साथ पूरा किया. इसके अलावा अभिमास, मनाली से बेसिक स्किल्स कोर्स भी किया. इसके बाद उन्होंने JIM&WS से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स पूरा किया.
रात दो बजे शुरू हुई चोटी की जंग
29 अगस्त को बेस कैंप पहुंचने के बाद टीम ने अंतिम चढ़ाई की तैयारी शुरू की. 30 अगस्त की तड़के करीब दो बजे समिट पुश शुरू हुआ. चारों ओर अंधेरा था. तापमान माइनस में था और सामने बर्फ से ढकी खड़ी चट्टानों के साथ गहरी क्रेवास चुनौती बनी हुई थीं.
इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद रौनित और उनकी टीम कदम-दर-कदम आगे बढ़ती रही. करीब चार घंटे तक चली कठिन चढ़ाई के बाद सुबह 6:07 बजे वह ऐतिहासिक पल आया, जब रौनित माउंट माछोई की चोटी पर पहुंच गये. चोटी पर तिरंगा फहराते ही उनकी मेहनत और संघर्ष को एक नई पहचान मिली.
पहली चोटी फतह, अब 7,000 मीटर से ऊपर का लक्ष्य
माउंट माछोई रौनित की पहली बड़ी पर्वतारोहण सफलता है, लेकिन उनका लक्ष्य यहीं रुकना नहीं है. वह भविष्य में 7,000 मीटर से अधिक ऊंची अंतरराष्ट्रीय पर्वत चोटियों पर तिरंगा फहराना चाहते हैं.
रौनित की यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किलों के सामने अपने सपनों को छोटा कर लेते हैं. उन्होंने साबित किया है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, मजबूत इरादों के साथ बर्फीली चोटियों पर भी सफलता की कहानी लिखी जा सकती है.
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