JPU में घटा स्नातक का क्रेज, 50% से अधिक सीटें कई विषयों में खाली, कई विषयों में आधी सीटें भी नहीं भरीं
जेपीयू का प्रशासनिक भवन
JPU UG Admission 2026-30 : जयप्रकाश विश्वविद्यालय (JPU) में सत्र 2026-30 के लिए स्नातक नामांकन प्रक्रिया के चार चरणों के बाद भी लगभग 40% सीटें खाली रह गई हैं. प्रमुख विषयों में छात्रों की घटती रुचि चिंता का विषय बनी हुई है.
JPU UG Admission 2026-30 : जयप्रकाश विश्वविद्यालय में स्नातक सत्र 2026-30 के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गयी है. इस बार कला और विज्ञान के कई प्रमुख विषयों में छात्रों की रुचि कम दिखी. विश्वविद्यालय के करीब 50 हजार सीटों के मुकाबले लगभग 34 हजार आवेदन मिले. चार चरणों में नामांकन के बाद भी करीब 40 फीसदी सीटें खाली रह गयीं.
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कई प्रमुख विषयों में आधी सीटें भी नहीं भरीं
स्नातक नामांकन में गणित, बॉटनी, भौतिकी, केमिस्ट्री, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, भोजपुरी, ग्रामीण अर्थशास्त्र और संस्कृत जैसे विषयों में अपेक्षाकृत कम दाखिला हुआ. कई कॉलेजों में इन विषयों की आधी से अधिक सीटें खाली रह गयीं.
राजेंद्र कॉलेज में कई विषयों में 60 फीसदी के आसपास दाखिला
छपरा के राजेंद्र महाविद्यालय में कला और विज्ञान संकाय के 10 से अधिक विषयों में इस बार करीब 60 फीसदी सीटों पर ही नामांकन हो सका. कॉलेज में कुछ वर्ष पहले इन विषयों में दाखिले को लेकर छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा रहती थी.
पीसी विज्ञान कॉलेज में भी विज्ञान विषयों की सीटें खाली
पीसी विज्ञान कॉलेज में केमिस्ट्री, भौतिकी और जूलॉजी समेत कुछ विषयों में करीब 50 फीसदी के आसपास नामांकन हुआ. उपलब्ध जानकारी के अनुसार कॉलेज में करीब 40 फीसदी सीटें खाली रह गयीं.
जयप्रकाश महिला कॉलेज में 1200 में करीब 800 दाखिले
जयप्रकाश महिला कॉलेज में करीब 1200 सीटें उपलब्ध थीं. इनमें लगभग 800 सीटों पर ही छात्राओं ने दाखिला लिया. हालांकि, कॉलेज स्तर की जानकारी के अनुसार इतिहास विषय में अन्य विषयों की तुलना में बेहतर नामांकन हुआ.
इतिहास में छात्रों की सबसे ज्यादा रुचि
इस बार प्रमुख कॉलेजों में इतिहास विषय में करीब 70 से 80 फीसदी सीटों पर नामांकन हुआ. हिंदी और जूलॉजी में भी दूसरे विषयों की तुलना में छात्रों की रुचि अधिक रही.
सत्र की अनियमितता से छात्रों में बढ़ी निराशा
जयप्रकाश विश्वविद्यालय में पिछले कुछ वर्षों से नामांकन को लेकर छात्रों की रुचि कम होने के पीछे सत्रों की अनियमितता और परीक्षा परिणाम में सामने आने वाली समस्याओं को प्रमुख वजह माना जा रहा है. हालांकि, इन कारणों के प्रभाव का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है.
चार साल का स्नातक, फिर भी समय पर नहीं हो रही परीक्षाएं
सत्र 2023 से स्नातक पाठ्यक्रम चार वर्षीय हो चुका है. इसके बावजूद परीक्षाओं के समय पर आयोजन को लेकर छात्रों को परेशानी होती रही है. सत्र नियमित करने के लिए कम अंतराल पर परीक्षाएं आयोजित होने से छात्रों के पठन-पाठन पर भी असर पड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं.
अंकपत्र में त्रुटियों से भी छात्रों को परेशानी
छात्रों की ओर से परीक्षा परिणाम और अंकपत्र में त्रुटियों को लेकर भी शिकायतें की जाती रही हैं. ऐसी स्थिति में सुधार के लिए छात्रों को विश्वविद्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है. यही वजह है कि कई स्थानीय छात्र दूसरे विश्वविद्यालयों या डिस्टेंस मोड से स्नातक करने का विकल्प चुन रहे हैं.
IGNOU और नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी की ओर बढ़ रहा रुझान
स्थानीय स्तर पर इंटर पास करने के बाद छात्र-छात्राओं के दूसरे विश्वविद्यालयों की ओर जाने का रुझान बढ़ने की बात सामने आ रही है. खासकर इग्नू और नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से स्नातक करने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने का दावा किया जा रहा है.
चार चरणों में पूरी हुई नामांकन प्रक्रिया
JPU में सत्र 2026-30 के लिए नामांकन चार चरणों में पूरा हुआ. छात्रों ने छपरा, सीवान और गोपालगंज के अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों के अलावा इस वर्ष शुरू हुए 28 नये राजकीय डिग्री कॉलेजों में दाखिले के लिए समर्थ पोर्टल से आवेदन किया.
50 हजार सीटों के लिए मिले करीब 34 हजार आवेदन
विश्वविद्यालय में करीब 50 हजार सीटों पर दाखिले के लिए लगभग 34 हजार आवेदन प्राप्त हुए. पहली मेधा सूची में करीब 17 हजार, दूसरी सूची में लगभग पांच हजार और तीसरी सूची में करीब तीन हजार छात्र-छात्राओं ने दाखिला लिया.
स्पॉट एडमिशन के बाद भी बड़ी संख्या में सीटें खाली
अंतिम चरण में स्पॉट एडमिशन कराया गया, जिसमें करीब पांच हजार विद्यार्थियों का दाखिला हुआ. चार चरणों की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद करीब 40 फीसदी सीटें खाली रह गयीं.
पिछले साल भी नामांकन रहा था सीमित
गत वर्ष भी विश्वविद्यालय में करीब 32 हजार नामांकन हुआ था. इस वर्ष विश्वविद्यालय की ओर से 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों के दाखिले का दावा किया गया है. अब खाली सीटों और विषयवार नामांकन के आंकड़ों के आधार पर विश्वविद्यालय के सामने छात्रों की घटती रुचि को लेकर चुनौती बनी हुई है.
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