बालू माफियाओं के आगे पस्त हुआ पुलिस प्रशासन

Published at :05 Apr 2017 3:18 AM (IST)
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बालू माफियाओं के आगे पस्त हुआ पुलिस प्रशासन

माफियाओं द्वारा पुलिस पर किये गये जानलेवा हमले में एक की भी नहीं हुई गिरफ्तारी सोनपुर : पुलिस प्रशासन की लाख मशक्कत के बावजूद क्षेत्र में बालू का अवैध रूप से उत्खनन,भंडारण एवं बिक्री बंद नहीं हो पा रही है. स्थानीय पुलिस प्रशासन लगातार लाल बालू के अवैध कारोबार करने वालों के विरुद्ध अभियान चलाकर […]

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माफियाओं द्वारा पुलिस पर किये गये जानलेवा हमले में एक की भी नहीं हुई गिरफ्तारी

सोनपुर : पुलिस प्रशासन की लाख मशक्कत के बावजूद क्षेत्र में बालू का अवैध रूप से उत्खनन,भंडारण एवं बिक्री बंद नहीं हो पा रही है. स्थानीय पुलिस प्रशासन लगातार लाल बालू के अवैध कारोबार करने वालों के विरुद्ध अभियान चलाकर इस पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है. वहीं दूसरी ओर बालू माफिया रोज नयी-नयी तरकीब का अपना कर धंधा बेरोक-टोक चला रहे हैं. इसकी वजह से बालू माफियाओं एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन के बीच तू डाल-डाल, मैं पात-पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है.

पुलिस को चकमा देने के लिए माइनिंग की फरजी रसीद भी दी जा रही है. सोनपुर के सबलपुर दियारा से लेकर पहलेजा तक बालू का उत्खनन, भंडारण एवं बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है. सोनपुर पुलिस ने एक महीने पूर्व आधा दर्जन ट्रकों को अवैध बालू के साथ पकड़ा था. ट्रकों को थाने लाने की कोशिश की गयी कि बालू माफियाओं ने साजिश के तहत पुलिस पर हमला कर इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष समेत पुलिसकर्मियों की बेरहमी के साथ पिटाई कर दी थी. घायल थानाध्यक्ष एवं पुलिस के जवानों का इलाज स्थानीय अस्पताल में कराया गया. साथ ही बालू माफियाओं के विरुद्ध दो प्राथमिकियां स्थानीय थाने में दर्ज की गयी थीं. लेकिन घटना को एक महीने हो गये, आज तक किसी भी नामजद अभियुक्त की गिरफ्तारी की बात कौन कहे, पुलिस छापेमारी करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है.आश्चर्य की बात यह है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन यह भी जानकारी नहीं है कि सोनपुर अंचल में कितने वैध बालू घाट हैं. पूछे जाने पर थानाध्यक्ष से

लेकर अंचलाधिकारी हों या बीडीओ से लेकर एसडीओ तक इस संबंध में बताने में असमर्थता व्यक्त करते हैं. माइनिंग की रसीद सही है या नहीं, इसकी भी

जांच करना स्थानीय प्रशासन जरूरी नहीं समझ रहा है. शाम होते ही हरिहर नाथ मंदिर से गज ग्राह चौक के रास्ते सैकड़ों की संख्या में ओवरलोडेड बालू लदे ट्रकों का काफिला गुजरता है. यही हाल कमोबेश गंगाजल एवं पहलेजाघाट का है.

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