23 बच्चों की गयी थी हादसे में जान

Published at :15 Jul 2015 11:53 PM (IST)
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23 बच्चों की गयी थी हादसे में जान

धर्मासती गांव में बच्चों की याद में होगी प्रार्थना सभा स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक के नहीं रहने से होती है परेशानी मढ़ौरा एसडीओ ने लिया तैयारियों का जायजा मशरक : गुरुवार 16 जुलाई को गंडामन मिड डे मील हादसे की दूसरी बरसी है. लोग जुटेंगे. मृत बच्चों को श्रद्धांजलि देंगे. गांव को आदर्श बनाने, विकास […]

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धर्मासती गांव में बच्चों की याद में होगी प्रार्थना सभा
स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक के नहीं रहने से होती है परेशानी
मढ़ौरा एसडीओ ने लिया तैयारियों का जायजा
मशरक : गुरुवार 16 जुलाई को गंडामन मिड डे मील हादसे की दूसरी बरसी है. लोग जुटेंगे. मृत बच्चों को श्रद्धांजलि देंगे. गांव को आदर्श बनाने, विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की बात भी होगी. घटना के बाद बहुत कुछ बदला है इस गांव में. पगडंडियों पर सड़कें बन गयीं. तालाब का सौंदर्यीकरण हो गया. बच्चों की याद में स्मारक भी बन गया. किंतु आज भी एक सवाल कौंधता है मृत बच्चों के परिजनों के जेहन में कि इस हादसे का कसूरवार कौन है.
पुलिस की जांच, मीना-अजरुन को जेल के बाद भी कई सवाल अनुत्तरित है, जिसे खोजा नहीं जा सका है. गांव के विकास में भी अभी कई आयाम बाकी हैं, जिन्हें पूरा होते देखना चाहते हैं यहां के ग्रामीण. घोषणा के एक वर्ष से ज्यादा होने के बाद भी अभी तक गांव में पानी टंकी का निर्माण नहीं हो सका है. हां आंगनबाड़ी केंद्र मॉडल जरूर बन गये हैं.
किंतु वहां के अस्पताल में चिकित्सक का नहीं रहना गांववालों के लिए परेशानी का सबब बनता है. जब बीमार होता है, तो फिर उसी मशरक पीएचसी में जाना पड़ता है, जहां दो वर्ष पहले छटपटाते हुए काल के गाल में समा गये थे कई छोटे-छोटे बच्चे. बुधवार को बरसी के एक दिन पूर्व श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम की तैयारी का जायजा लेने मढ़ौरा एसडीओ संजय कुमार राय, सीओ हेमंत कुमार सहित कई अधिकारी गंडामन गांव पहुंचे.
किंतु ग्रामीणों का दर्द कुछ और ही था. ग्रामीणों का कहना है कि घटना के दो वर्ष बाद भी गंडामन गांव को विकसित करने के किये गये घोषणा के बाद भी इस गांव में हो रहे विकास कार्य आधे-अधूरे हैं. इनमें पानी टंकी, कौशल विकास केंद्र एवं कई ग्रामीण सड़कों का कार्य अधूरा है. मिड डे मील हादसे में मरे बच्चों के अभिभावकों की आज भी आंखें भर आती हैं.
वहीं, गांव के अभिभावक ने बताया कि अधिकारी गांव में केवल आते-जाते हैं, लेकिन दो वर्ष बाद भी कई कार्य आधा-अधूरा है. स्वास्थ्य केंद्र में किसी चिकित्सक का नहीं होना, जैसी कमियां बताते हुए कई सवाल उठाये. प्रार्थना सभा में डीएम सहित कई पदाधिकारियों के शामिल होने की चर्चा है.
कैसे हुआ था गंडामन हादसा : गंडामन हादसे का कारण जहरीला खाद्य तेल था. जांच के दौरान इस खाद्य तेल में मोनोकोटोफॉस नामक ऑर्गेनो फॉस्फोरस पदार्थ पाया गया था.
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों में डब्बा बंद मसाला, नमक व आइएसआइ मार्क का खाद्य तेल खरीदने को कहा था. वहीं प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया कि वे सबसे पहले खुद मिड डे मील का सेवन करें, फिर बच्चों के बीच बांटे.
रसोइयों को दी गयी ट्रेनिंग : घटना के बाद सूबे के विद्यालयों के रसोइयों को भी ट्रेनिंग देकर सफाई के साथ-साथ पौष्टिक भोजन बनाने के गुर सिखाये गये. अब सरकार साफ-सफाई के लिए रसोइयों को एप्रन (खाना बनाने समय पहनने वाला ड्रेस) और ग्लब्स दे रही है. इसके अलावा बच्चों को बैठ कर खाना खाने के लिए मैट भी दिये जाने हैं. इसके अलावा जिन स्कूलों में किचन सेड नहीं था, वहां किचन सेड भी बनाये गये.
वहीं जिन स्कूलों के पास अपना भवन नहीं था, उन्हें नजदीक के सामुदायिक भवन व दूसरे स्कूलों से भी जोड़ा गया. इसके साथ-साथ किचन शेड की हर दो से तीन महीने में रंगाई-पुताई करने का भी निर्देश दिया गया. इसके अलावा स्कूलों को मसाले व अनाज रखने के लिए बक्सा खरीदने के लिए भी राशि दी गयी.
मंगल के दिन अमंगल साबित भइल
हमरा खातिर घटना के दिन के मंगल के दिन अमंगल साबित भइल. हम त मंगलवरत कइले रहनी, एह कारण ना खइनी परंतु, जहर वाला खाना खइला से हमार बेटा रोहित तथा बेटी सुमन के जान चल गइल. एह घटना के बाद हमार रसोइया के नौकरी भी चल गइल. पति(लाल बहादुर) खेती के काम करेनी. अइसन स्थिति में परिवार के चलावल भी मुश्किल बा.
पन्ना देवी, पूर्व रसोइया
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