मौत के मामले में मनरेगा कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी

Updated at : 20 Nov 2019 4:30 AM (IST)
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मौत के मामले में मनरेगा कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी

मढ़ौरा : मनरेगा कार्यालय परिसर में आत्मदाह की कोशिश में पिछले दिनों झुलसे बीडीसी सदस्य की मौत मामले में मनरेगा कर्मियों के खिलाफ मृतक के पुत्र ने प्राथमिकी दर्ज करायी है. वहीं सोमवार को छपरा में इलाजरत बीडीसी सदस्य की मौत के बाद परिजनों ने शव को शिल्हौरी चौक के समीप रख कर मुख्य मार्ग […]

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मढ़ौरा : मनरेगा कार्यालय परिसर में आत्मदाह की कोशिश में पिछले दिनों झुलसे बीडीसी सदस्य की मौत मामले में मनरेगा कर्मियों के खिलाफ मृतक के पुत्र ने प्राथमिकी दर्ज करायी है. वहीं सोमवार को छपरा में इलाजरत बीडीसी सदस्य की मौत के बाद परिजनों ने शव को शिल्हौरी चौक के समीप रख कर मुख्य मार्ग को देर शाम से मध्य रात्रि तक जाम रखा.

जहां पर शिवगंज की तरफ से पुलिस गश्ती गाड़ी के पहुंचने पर लोग और आक्रोशित हो गये और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताने लगे, जिससे पुलिस गश्ती टीम उल्टे पांव फिर वापस लौट गयी. रोड जाम की सूचना पर मढ़ौरा एसडीओ विनोद कुमार तिवारी, मढ़ौरा थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर राम बालेश्वर राय और मढ़ौरा बीडीओ दल बल के साथ पहुंचे.
काफी देर तक समझाने बुझाने के बाद आक्रोशित लोग आपदा राशि दिलवाने और मौत के गुनाहगार पर कार्रवाई के आश्वासन मिलने के बाद शांत हुए . इसके बाद पुलिस प्रशासन ने शव को पोस्टमार्टम में छपरा भेज दी. मंगलवार की सुबह परिजनों को शव को पोस्टमार्टम के बाद सौंप दिया.
इस दौरान टायर जला और शव को रोड पर रख जाम कर रहे लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की. लेकिन प्रशासन ने सूझबूझ से मामले को शांत करा दिया. जिसके बाद मृतक बीडीसी सुदीश मांझी के पुत्र अरविंद मांझी के आवेदन पर मनरेगा कर्मियों के खिलाफ स्थानीय थाना में मामला दर्ज किया गया.
जिसमें तीन मनरेगाकर्मियों प्रदीप कुमार, अब्दुल और शकील को नामजद कर कार्रवाई की गुहार लगायी गयी है. दिये आवेदन में मनरेगा द्वारा कराये गये काम का मजदूरों और ट्रैक्टर वाहन आदि का बकाया राशि साढ़े सात लाख भुगतान को लेकर बीडीसी सदस्य कुछ दिनों से काफी परेशान चल रहा था.
लेकिन कार्यक्रम पदाधिकारी और मनरेगा कर्मीयो द्वारा अनावश्यक टाल मटोल से परेशान होकर सात नवंबर को कार्यक्रम पदाधिकारी समेत अन्य कार्यालयों को डाक से इसकी सूचना दी और पूर्व से निर्धारित 11 नवंबर को मनरेगा कार्यालय परिसर में आत्मदाह की कोशिश में झुलस गये थे.
मढ़ौरा रेफरल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद एक सप्ताह तक सदर अस्पताल में इनका इलाज चला. जख्म ठीक नहीं होने पर परिजनों ने छपरा के एक निजी क्लिनिक में इन्हें इलाज के लिए 17 नवंबर को लाया. जहा पर इलाज के दौरान 18 नवंबर को मौत हो गयी.
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