तूफानों से नहीं घबराते क्योंकि हम हिमालय के प्रहरी हैं...

छपरा . कंधों से कंधे मिलाकर हर तूफान से लड़ना जानते हैं, हम हिमालय के वीर अपनी सरहद पहचानते हैं. बर्फ की चादर हमारा सुकून है, देश की रक्षा ही हमारा जुनून है. सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि भावनाओं में भी संगठित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने कैंप मुख्यालय के उद्घाटन के समारोह में […]
छपरा . कंधों से कंधे मिलाकर हर तूफान से लड़ना जानते हैं, हम हिमालय के वीर अपनी सरहद पहचानते हैं. बर्फ की चादर हमारा सुकून है, देश की रक्षा ही हमारा जुनून है.
सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि भावनाओं में भी संगठित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने कैंप मुख्यालय के उद्घाटन के समारोह में अनुशासन के साथ जिस शौर्य का परिचय उसने कार्यक्रम के आकर्षण को उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़कर परिभाषित किया. लगभग 11:50 में आईटीबीपी के जवानों ने अपने शौर्य व अदम्य साहस का प्रदर्शन शुरू किया. पांच मिनट तक चले इस प्रदर्शन में जवानों के क्रियाकलापों को देख कार्यक्रम में उपस्थित लोग अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाये और किसी ने जमकर तालियां बजायी तो कहीं ‘भारत माता की जय’ के नारे सुनाई देने लगे. जवानों ने महज 53.55 सेकेंड में चार हथियारों को खोल कर फिर से जोड़ दिया. आमतौर पर ऐसा करने में पांच मिनट से ज्यादा समय लगता है. विषम परिस्थिति में वाहन के स्पेयर पार्ट्स को बदलने में पांच मिनट लग जाते हैं.
आईटीबीपी के जवानों ने मात्र 50 सेकेंड में ही यह कारनामा कर दिखाया. कमांडो एक्शन 43.02 सेकेंड में पूरा कर लिया गया. सबसे अद्भुत क्षण तब आया जब मॉकड्रिल करते हुए हिमवीरों ने आतंकवादियों के चंगुल में फंसी यात्रियों से भरी बस को मात्र 3 मिनट में ही पूरा कर लिया.
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