"JCB से रोड नहीं बनाने देंगे, मजदूर से कराइए काम...", समस्तीपुर में सड़क निर्माण का जमकर विरोध
योजना में जेसीबी के प्रयोग से गुस्से में ग्रामीण | Prabhat Khabar Network
मोरवा के विक्रमपुर वार्ड 8 में सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया. मजदूरों की जगह JCB के इस्तेमाल, सूचना पट्ट नहीं लगाने और योजना की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गयी.
मोरवा सड़क निर्माण: सारंगपुर पश्चिमी पंचायत के विक्रमपुर वार्ड संख्या 8 स्थित चौर में बीबी जी राम जी योजना के तहत सड़क निर्माण में मजदूरों की जगह जेसीबी के इस्तेमाल को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है. सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर पहुंचे और काम के तरीके के साथ योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाये. ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मामले की जांच कराने की मांग की है.
मजदूरों की जगह JCB चलाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य में स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने के बजाय जेसीबी का इस्तेमाल किया जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार, बीती रात सड़क पर जेसीबी की मदद से मिट्टी डाली जा रही थी. कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद कथित तौर पर बीच सड़क को ही काट दिया गया. इससे चौर में खेती के लिए जाने वाले किसानों का आवागमन बाधित हो गया.
सूचना पट्ट नहीं लगाने पर भी सवाल
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित सूचना पट्ट नहीं लगाए जाने पर भी सवाल उठाया. उनका कहना है कि मौके पर योजना की प्राक्कलित राशि, सड़क की लंबाई-चौड़ाई और अन्य तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गयी है. ऐसे में लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि सड़क का निर्माण किस प्राक्कलन और मानक के आधार पर कराया जा रहा है.
निर्माण की गुणवत्ता की जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में काम की गुणवत्ता के साथ पारदर्शिता भी जरूरी है. योजना स्थल पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ निर्माण कार्य की नियमित निगरानी होनी चाहिए. लोगों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से स्थल का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और इस्तेमाल की जा रही प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है.
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठाये सवाल
मौके पर मौजूद अजय झा, पप्पू कुमार, धर्मेंद्र कुमार राय, दीपक कुमार, मच्छु राय, अशोक राय और सन्नी सादा समेत अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजनाओं के काम में जनप्रतिनिधियों के बजाय दूसरे लोगों से काम कराया जाता है. ग्रामीणों का कहना था कि इसी वजह से कई बार विवाद की स्थिति बनती है. उन्होंने मांग की कि योजना का संचालन मुखिया और संबंधित जनप्रतिनिधियों की देखरेख में होना चाहिए.
अधिकारियों के निरीक्षण से साफ होगी स्थिति
ग्रामीणों ने कहा कि सड़क निर्माण में जेसीबी के इस्तेमाल, मजदूरों को रोजगार देने, योजना की जानकारी सार्वजनिक करने और निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े सवालों की जांच जरूरी है. उनका कहना है कि विभागीय अधिकारी स्थल का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करें कि निर्माण कार्य स्वीकृत योजना और निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है या नहीं.
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