सतपोखरा में जनजातीय परियोजना: कृषि वैज्ञानिकों ने बांटे 1000 औषधीय पौधे, किसानों को मिला प्रशिक्षण

जनजाति किसानों के साथ वैज्ञानिक। | Prabhat Khabar Network
समस्तीपुर के सतपोखरा गांव में जनजातीय किसानों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए 1000 से अधिक औषधीय पौधे वितरित किए गए. कृषि वैज्ञानिकों ने नर्सरी तैयार करने और पौधे लगाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया.
Medicinal Plant Training: भारत सरकार द्वारा पोषित जनजातीय परियोजना के तहत डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिनेश राय एवं डॉ. शंकर झा ने सतपोखरा गांव का दौरा किया. 80 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले इस जनजातीय गांव के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए 1000 से ज्यादा औषधीय पौधे बांटे गए.
खाद, कृषि यंत्र व तिरपाल का वितरण और प्रशिक्षण
वैज्ञानिकों ने किसानों को नर्सरी तैयार करने और पौधे लगाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया.
- सामग्री वितरण: किसानों को पौधे के साथ-साथ खाद, कुदाल, खुरपी और तिरपाल आदि आवश्यक कृषि उपकरण वितरित किए गए.
- औषधीय महत्व: कृषि विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों और उनके महत्व के बारे में विस्तार से समझाया.
आजीविका संवर्धन और औषधीय खेती के लाभ
परियोजना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय किसानों की आय बढ़ाना और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण करना है.
- आरोग्य और अतिरिक्त आय: तुलसी, कालमेघ, अश्वगंधा और शतावरी जैसी फसलों से किसानों की आमदनी बढ़ेगी. साथ ही, स्थानीय 'होडोपैथी' चिकित्सा पद्धति को बल मिलेगा.
- महिला सशक्तिकरण व पर्यावरण संरक्षण: स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. खेतों में औषधियां उगाने से प्राकृतिक वनों पर दबाव घटेगा और जैव विविधता संरक्षित होगी.
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