सहरसा के इस गांव में 154 साल से जिंदा है अनूठी परंपरा: रात 1:45 बजे कान्हा का जन्म, ढोल-मंजीरे पर गूंजता है दुर्लभ नारदी भजन

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फोटो - बनायी गयी भव्य प्रतिमा | Prabhat Khabar Network

सहरसा के सहरसा जिले के मुरादपुर गांव में 154 वर्षों से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कोसी-मिथिला की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. इस अनूठी परंपरा में डेढ़ सदी पुरानी नारदी भजन की प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण है, जो आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती है.

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बिहार के सहरसा जिले का एक छोटा सा गांव आज भी अपनी डेढ़ सदी से अधिक पुरानी सांस्कृतिक विरासत को सीने से लगाए हुए है. नवहट्टा प्रखंड के ग्राम पंचायत मुरादपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कोसी-मिथिला के लोक रंगों, सामाजिक समरसता और सामूहिक अपनत्व का जीवंत महाकुंभ है. 154 वर्षों से निरंतर चली आ रही इस परंपरा का उल्लास ऐसा है कि रोजी-रोटी, पढ़ाई या कारोबार के सिलसिले में देश-दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे प्रवासी ग्रामीण इस पावन मौके पर अपनी माटी की ओर खिंचे चले आते हैं.

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डेढ़ सदी पहले स्वर्गीय भिखो ठाकुर ने बोया था आस्था का बीज

मुरादपुर में जन्माष्टमी की यह पावन रीत करीब 154 वर्ष पूर्व स्वर्गीय भिखो ठाकुर ने शुरू की थी. पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हुए इस आयोजन को पंडित बलदेव झा के समय में एक विशिष्ट लोक-सांस्कृतिक स्वरूप मिला. इसके बाद स्वर्गीय नंदकिशोर ठाकुर उर्फ लाल ठाकुर और गांव के लेखक डॉ. मनोरंजन झा के प्रयासों ने इसे एक विशाल सांस्कृतिक मंच में तब्दील कर दिया. आज भी पूरा गांव उसी निष्ठा और समर्पण के साथ इस 154 साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए आगे बढ़ा रहा है.

नारदी भजन: कोसी-मिथिला की दुर्लभ लोक कला का बेजोड़ संगम

इस आयोजन की सबसे बड़ी यूएसपी पारंपरिक नारदी भजन है, जो आधुनिकता की चकाचौंध में लगभग लुप्तप्राय हो चुकी है. ढोल, मंजीरा और करताल की थाप पर जब स्थानीय कलाकार श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और चरित्र का संगीतमय गायन व भाव-नृत्य प्रस्तुत करते हैं, तो पूरा इलाका भक्ति रस में सराबोर हो जाता है.

  • Night 1:45 AM Auspicious Birth: 3 सितंबर की मध्यरात्रि करीब 1:45 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे विधि-विधान से मनाया जा रहा है, जिससे पहले रात 8 बजे से नारदी भजन का भव्य दौर शुरू हुआ.
  • Veteran Folk Artists: महेश्वर ठाकुर उर्फ मोर ठाकुर, गुलाब ठाकुर, दिवाकर ठाकुर, ललित झा, संजो झा, फूलचंद शर्मा, कारी दास और नंदन चौधरी जैसे मझे हुए कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ लोकगीतों की छटा बिखेर रहे हैं.
  • Cultural Extravaganza: 4 सितंबर को दोपहर 2 बजे डॉ. मनोरंजन झा रचित ग्रामगीत से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज होगा, जिसमें गांव के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.
  • Star Performers: रात के सत्र में किशन चंद्रवंशी के भजनों के साथ मशहूर उद्घोषिका संगीता सिंह, 'सा रे गा मा पा' और 'सुर संग्राम' से जुड़े ख्यातिप्राप्त कलाकार मंच संभालेंगे.
  • Grand Immersion Ritual: 5 सितंबर को तीन दिवसीय महामहोत्सव का समापन पारंपरिक विधि-विधान के साथ प्रतिमा विसर्जन के रूप में होगा.

25 हजार ग्रामीणों का जुटान, युवा और पंचायत प्रतिनिधियों ने संभाली कमान

मूर्तिकार श्री राम लखन पंडित, सोहन पंडित, मोहन पंडित और राधेश्याम के हाथों गढ़ी गई भव्य प्रतिमा के दर्शन के लिए करीब 25 हजार श्रद्धालु जुट रहे हैं. पूजा समिति के अध्यक्ष कन्हैया ठाकुर, सचिव सहजानंद भारद्वाज, कोषाध्यक्ष पिंकू ठाकुर और प्रोफेसर संजय ठाकुर के नेतृत्व में ग्रामीण युवा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने में जुटे हैं. मुखिया राहुल झा, पंचायत समिति अध्यक्ष सुशील झा और प्रतिनिधि त्रिलोकनाथ पासवान ने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी में जब लोककलाएं दम तोड़ रही हैं, तब मुरादपुर का यह नारदी भजन और सामूहिक लोकसंस्कृति आने वाली पीढ़ियों के लिए अनमोल धरोहर है. इसे संजोकर अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाना ही इस पूरे ऐतिहासिक आयोजन का मुख्य ध्येय है.

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