रक्तकाली मंदिर से शिवलिंग की चोरी

Published at :27 Oct 2016 5:27 AM (IST)
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रक्तकाली मंदिर से शिवलिंग की चोरी

दुस्साहस. स्फटिक के शिवलिंग की बाजार में लाखों में है कीमत, 2001 में हुई थी स्थापना मंगलवार देर शाम रक्तकाली मंदिर से स्फटिक के शिवलिंग की चोरी हो गयी. इसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है. इसकी स्थापना 2001 में की गयी थी. व्यवस्थापक ने मंदिर से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी उंगली […]

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दुस्साहस. स्फटिक के शिवलिंग की बाजार में लाखों में है कीमत, 2001 में हुई थी स्थापना

मंगलवार देर शाम रक्तकाली मंदिर से स्फटिक के शिवलिंग की चोरी हो गयी. इसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है. इसकी स्थापना 2001 में की गयी थी. व्यवस्थापक ने मंदिर से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी उंगली उठायी है.
सहरसा : सदर थाना क्षेत्र में मंगलवार की देर शाम मत्स्यगंधा स्थित रक्तकाली चौंसठ योगिनी मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर से चोरों ने स्फटिक का कीमती शिवलिंग चोरी कर लिया. मंदिर के व्यवस्थापक कुमार हीरा प्रभाकर ने बताया कि सात बजे शाम से मंदिर में प्रत्येक दिन आरती होती है. मंदिर के पुजारी शशिनाथ झा जब आरती लेकर शिव मंदिर गये तो देखा कि शिवलिंग गायब था. जबकि आरती से पहले शिवलिंग मौजूद था. मामले की सूचना आग की तरह फैल गयी.
मंदिर से जुड़े सदस्यों व अन्य ने अपने स्तर से खोजबीन शुरू की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. मामले की सूचना सदर थाना को दी गयी. सूचना मिलते ही सदर थानाध्यक्ष भाई भरत सदल बल मंदिर पहुंचे व छानबीन शुरू कर दी. इधर मंदिर के व्यवस्थापक ने मंदिर से जुड़े लोगों की भूमिका पर उंगली उठाते कहा कि चोरी में कोई बाहरी व्यक्ति का हाथ नहीं है बल्कि मंदिर से जुड़े लोग ही संलिप्त हैं.
पुलिस पिकेट से थोड़ी ही दूरी पर है मंदिर : मत्स्यगंधा मंदिर से शिवलिंग की चोरी होने के बाद कई तरह की चर्चा शुरू हो गयी है. लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया कि चोरी पुलिस पिकेट से चंद कदम की दूरी पर हुई है. वहीं लोगों ने दबी जुबान से कहा कि पुलिस भी चोरी की घटना को आम व खास में बांट कर अनुसंधान करती है. लोगों ने कहा कि खास चोरी में एसएफएल की टीम व वरीय अधिकारी आते हैं तो आम में स्थानीय अधिकारी अनुसंधान व चोरों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तक करती है. लोगों ने सार्वजनिक मामले पर पुलिस से तेजी दिखाने की मांग की है.
आरती के समय ही चोरी की आशंका
2001 में स्थापित हुआ था शिवलिंग
रक्तकाली चौंसठ योगिनी मंदिर के स्थापना के बाद वर्ष 2001 में शिवलिंग की स्थापना की गयी थी. जानकारी के अनुसार बनारस से शिवलिंग लाया गया था और वैदिक रीति रिवाज से इसकी स्थापना की गयी थी. जिसके बाद लोगों द्वारा विधिवत पूजा शुरू की गयी थी. लोगों ने कहा कि मंदिर की महत्व बढ़ता गया और सुरक्षा कम होती गयी. मत्स्यगंधा स्थित संग्रहालय में चोरी के बाद सुरक्षा के लिए पुलिस बल की भी तैनाती की गयी है. लेकिन नाम का ही मत्स्यगंधा गार्ड है. उससे बैंक व वाहन चेकिंग में ही काम लिया जाता है. व्यवस्थापक हीरा प्रभाकर ने बताया कि शादी विवाह या अन्य किसी अवसर पर ही पुलिस बल मंदिर परिसर में नजर आते हैं.
मामला दर्ज कर बरामदगी के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है. कैंप की पुलिस को नजर रखने व पंडा को सभी गेट खुला नहीं रखने का निर्देश दिया गया है. प्रथमदृष्टया बच्चों की हरकत लग रही है. दो से ढ़ाई सौ की तीन से चार इंच का शिवलिंग है.
भाई भरत कुमार, सदर थानाध्यक्ष
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