आरण में मोरों पर बनेगी डॉक्यूमेंटरी फिल्म

Published at :25 Oct 2016 12:49 AM (IST)
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आरण में मोरों पर बनेगी डॉक्यूमेंटरी फिल्म

सत्तरकटैया : आरण गांव में नाचते मोरों की कहानी अब पूरे देश का लोग घर बैठे ही देख पायेंगे. इसके लिए राज्य सरकार के निर्देश पर सोमवार को भागलपुर से मंदार नेचर क्लब की टीम पूर्णिया वन प्रमंडल के अधिकारी के साथ आरण गांव पहुंची. इस टीम के सदस्य आरण गांव में लगातार तीन दिनों […]

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सत्तरकटैया : आरण गांव में नाचते मोरों की कहानी अब पूरे देश का लोग घर बैठे ही देख पायेंगे. इसके लिए राज्य सरकार के निर्देश पर सोमवार को भागलपुर से मंदार नेचर क्लब की टीम पूर्णिया वन प्रमंडल के अधिकारी के साथ आरण गांव पहुंची. इस टीम के सदस्य आरण गांव में लगातार तीन दिनों तक रह कर मोरों की सच्ची कहानी का वीडियोग्राफी करेंगे और मोरों की कहानी पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म तैयार करेंगे.

कारी झा से सुनी मोरों की कहानी
वर्ष 1990-91 में पंजाब से एक जोड़ी मोर लाकर अपने घर में पालने वाला अभिनंदन यादव उर्फ कारी झा से टीम के सदस्यों ने आधे घंटे तक बातचीत कर मोर के आरण आने की कहानी सुनी. उन्होंने बताया कि एक संत हमारे घर पर आये और मयूर को घर में पालने की सलाह दी और कहा कि मयूर की सेवा से ही तुम्हारा कल्याण होगा.
कारी झा ने बताया कि संत की बात पर पंजाब से एक मोर और एक मोरनी का बच्चा ला कर अपने घर में पिंजरा बना कर रखा. बाद में उससे चार अंडे हुए. चारों बच्चे स्वतंत्र रूप से गांव में घूमने लगे. मोरों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गयी और आज पूरे गांव में फैल गया है. कारी झा ने गांव के लोगों को धन्यवाद देते हुए बताया कि मोरों के उपद्रव के बावजूद भी किसी ने प्रतिकार नहीं किया. जिसके चलते मोरों को यह गांव रास आ गया है. इस गांव में नाचते मोरों को देख कर लोगों को गौरव प्राप्त होता है. इस मौके पर डीएफओ सुनील कुमार सिंह, रेंजर वीपी सिन्हा, आरबी सिंह, पंसस संतोष साह, कृष्ण कुमार कुंदन सहित अन्य मौजूद थे.
छठ के बाद तैयार हो जायेगी फिल्म
पूर्णिया वन प्रमंडल वन संरक्षक अभय कुमार ने बताया कि आरण गांव की मोरों की कहानी प्रचलित हो चुकी है. इस गांव में मोरों की गतिविधि का जायजा लिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि टीम के सदस्य वीडियोग्राफी के साथ मोरों के गिनती का सही आकलन करेगा. वहीं वन विभाग द्वारा मोरों की सुरक्षा के लिएजगह-जगह पेड़ पौधे भी लगाये जायेंगे. जिस पेड़ पर मोर अधिक बैठना व रहना पसंद करते हैं. वन विभाग वैसे पेड़ों को लगायेगा. उन्होंने बताया कि दीपावली व छठ के बाद मोरों की कहानी पर 15 मिनट का फिल्म बन कर तैयार हो जायेगी.
वन विभाग पौधों का वितरण, अंडा का संरक्षण, मोरों की संख्या को बढ़ाने आदि कार्यों को बखूवी से करने की तैयारी कर लिया है. उन्होंने बताया कि बिहार के मोतिहारी में 250 मोर रहते हैं. जिसे मोर गांव कहा जाता है. लेकिन सहरसा के आरण गांव में पांच सौ से अधिक मोरों की रहने की जानकारी मिली है. टीम के सदस्यों ने सुबह जंगलों की तरफ निकले तो 15 से 20 की संख्या में मोरों के झुंड का फोटो लिया.
मुख्य बातें
राज्य सरकार के निर्देश पर भागलपुर के नेचर क्लब की टीम ने लिया जायजा
पूर्णिया व सहरसा वन प्रमंडल के अधिकारी भी थे मौजूद
सहरसा के आरण गांव में रहते हैं पांच सौ से अधिक मोर
मोतिहारी में रहते हैं 250 मोर
मोर को नाचते देखने जुटते हैं लोग
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