दियारा बन रहा अपराध व नशे का पनाहगार

Published at :17 Mar 2016 5:47 AM (IST)
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दियारा बन रहा अपराध व नशे का पनाहगार

सिमरी नगर(सहरसा) : सहरसा-खगड़िया सीमा पर स्थित मोहरा घाट मे बुधवार को बड़े पैमाने पर हो रही अफीम की खेती का उद्भेदन पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है. पुलिस द्वारा बरामद अफीम का मूल्य लगभग अस्सी लाख रुपये बताया जा रहा है. जड़ी-बूटी के नाम पर कर रहे थे खेती: बुधवार […]

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सिमरी नगर(सहरसा) : सहरसा-खगड़िया सीमा पर स्थित मोहरा घाट मे बुधवार को बड़े पैमाने पर हो रही अफीम की खेती का उद्भेदन पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है. पुलिस द्वारा बरामद अफीम का मूल्य लगभग अस्सी लाख रुपये बताया जा रहा है.

जड़ी-बूटी के नाम पर कर रहे थे खेती: बुधवार को बड़े पैमाने पर बरामद अफीम की फसल से जुड़े मामले मे जमीन मालिक उदय कुमार, अरबिंद कुमार, नरेंद्र कुमार के परिवार वालों ने बताया कि पिछले साल दिसंबर मे गांव के ही ग्रामीण जहरू बिंद के सहयोग से खेती करने के लिए कुछ लोगो को यह जमीन दस हजार रुपए महीने की बात पर दी गयी थी. जमीन लेने वालों ने बताया था कि वह इस जमीन पर जड़ी-बूटी लगायेंगे. परंतु हमें यह अहसास नहीं हुआ की हमारी जमीन का प्रयोग खेती के लिए किया जा रहा है. ग्रामीण सुरेश साह ने बताया कि खेती तो दिसंबर से ही हो रही थी. लेकिन हम इस फसल को जड़ी बूटी समझ रहे थे. वहीं बुधवार को जब पुलिस मोहरा घाट पहुंची तो उन्होंने जमीन मालिक के घर का भी सूक्ष्मता से निरीक्षण किया.
अखबार मे छपी फोटो से खुली पोल : बीते रविवार को खगड़िया जिले के नक्सल प्रभावित गंगौर ओपी क्षेत्र के रमुनियां गांव के समीप इटावा बहियार मे लगभग पांच एकड़ मे लगी अफीम की फसल के बरामद होने की खबर व फोटो अखबार में छपी थी. खेत की फोटो आने के बाद मोहरा घाट के लोगों ने सड़क से थोड़ी दूरी पर लगे अफीम की फसल से उस फोटो की मिलान की और जिसके बाद अफीम की चल रही खेत का खुलासा हुआ. ग्रामीणों ने इसकी सूचना अलौली थाना को दी. बुधवार सुबह एएसपी अभियान विमलेश चंद्र झा के नेतृत्व मे खगड़िया मुफस्सिल थानाध्यक्ष आशीष सिंह, अलौली थानाध्यक्ष गजेंद्र कुमार, मोहरा पिकेट प्रभारी रघुनाथ यादव, कनरिया ओपी प्रभारी निरंजन प्रसाद सिंह दल-बल के साथ पहुंच कर अफीम की फसल जब्त कर नष्ट कर दिया.
अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ा हो सकता है तार : सहरसा-खगड़िया सीमा पर बुधवार सुबह बरामद अफीम के व्यवसायियों का तार अंतरराज्यीय तस्कर गिरोह से जुड़ा हो सकता है. प्रशासन द्वारा दियारा इलाके मे इतनी बड़ी मात्रा मे प्रतिबंधित अफीम की बरामदगी इलाके मे चर्चा का विषय बनी हुई है. बुधवार को पुलिस द्वारा निष्पादित ऑपरेशन के नेतृत्वकर्ता एएसपी अभियान विमलेश चंद्र झा के मुताबिक इतने बड़े पैमाने पर हो रही अफीम की खेती अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ने की ओर इशारा कर रहा है, जिसकी जांच की जा रही है.
वहीं जानकारी के अनुसार यह कार्य बहुत बड़े नेटवर्क का है जो बड़े लेवल पर संगठित होकर अफीम की खेती कर रहे हैं और प्रशासन के लिए चुनौती पैदा कर रहे हैं. जानकर बताते हैं कि पड़ोसी राज्य और देश के तस्कर गिरोह स्थानीय लोगों को लोभ देकर इनसे खेती करवायी जाती है और एक-दो महीने में अफीम की फसल तैयार होने के बाद उसका पाउडर बना कर बाहर भेज दिया जाता है. वही ग्रामीणों को बेवकूफ बनाने के लिए उन्हें कभी जड़ी-बूटी, तो कभी तेल की फसल समझा दी जाती है.
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