खतरनाक है पटाखा, चलो मनायें मीठी दिवाली

Published at :29 Oct 2015 6:37 PM (IST)
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खतरनाक है पटाखा, चलो मनायें मीठी दिवाली

खतरनाक है पटाखा, चलो मनायें मीठी दिवाली पटाखा ध्वनि व वायू प्रदूषण को देता है बढ़ावापटाखों की धमक से सहम जाते हैं पशु-पक्षीपटाखे की तेज आवाज हृदय रोगियों के लिए होता है घातकउच्च रक्तचाप व कान के लिए भी पटाखे की आवाज है खतरनाकइस बार बच्चे व बड़े बिना पटाखों के दीपावली मनाने का लें […]

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खतरनाक है पटाखा, चलो मनायें मीठी दिवाली पटाखा ध्वनि व वायू प्रदूषण को देता है बढ़ावापटाखों की धमक से सहम जाते हैं पशु-पक्षीपटाखे की तेज आवाज हृदय रोगियों के लिए होता है घातकउच्च रक्तचाप व कान के लिए भी पटाखे की आवाज है खतरनाकइस बार बच्चे व बड़े बिना पटाखों के दीपावली मनाने का लें संकल्पसफाई, रोशनी व भाईचारे को दें बढ़ावाप्रभात अभियानसहरसा नगर. आगामी 11 नवंबर को विश्व भर में दीपों का त्योहार दीपावली हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा. दीपावली पर्व का नाम आते ही घरों में जलते दीपों के कतार मन में जगमगा उठते हैं. इसके अलावा लक्ष्मी-गणेश की सजी मूर्ति व उसके आगे लड्डू से भरी थाल भी सामने आ जाती है. दिवाली साफ-सफाई, रंग-रोगन व धार्मिक परंपरा का त्योहार है. अनावश्यक रूप से पटाखों के शामिल हो जाने से यह पर्व घातक हो गया है. जल, भूमि, हवा व ध्वनि प्रदूषित होता है. यह मानव व उससे अधिक यह बेजुबान जानवरों के लिए घातक है. पटाखों की धमक से हमारे आस-पास रहने वाले पालतु सहित अन्य पशु-पक्षी सहम जाते है. पूर्व में भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पटाखा बम के फटने से कई आदमी व बेजुबान पशुओं की जान जा चुकी है. पटाखा ने उत्साह की जगह घरों में दीपावली से पूर्व ही मातम का सन्नाटा ला दिया है. वे लगातार इन पटाखों को कोस रहे हैं. अमूमन प्रत्येक पशु अथवा पक्षी पालने वालों को दिवाली की रात बेवजह अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है. त्योहार की रात एक ओर सब खुशियां मनाते हैं, दूसरी ओर कुत्ते, गाय, बैल, भैंस, बकरी, घोड़े सहित अन्य पशु डर से सहमे बचाव के लिए आवाज लगाते रहते हैं. इस रात चिड़ियां भी अपने घोंसले में चैन से नहीं रह पाती. पटाखा फटते ही चहचहाती हुई चिडि़यां अपने घोंसले से निकल सुरक्षित ठिकाना ढ़ूंढ़ने लगती है. हमें अपनी क्षणिक खुशी के लिए बेजुबानों को डराने, सहमाने व बेघर करने का क्या अधिकार है? इस पर गहन विचार करने की जरूरत है.बाजार में शुरू हुई पटाखों की बिक्रीशहरी सहित ग्रामीण बाजारों में पटाखों की बिक्री शुरू हो गयी है. प्रशासनिक उदासीनता के कारण इन लोगों पर लगाम लगाना भी मुश्किल होगा. ऐसे में समाज के युवा व जिम्मेवार लोगों की जवाबदेही बनती है कि हम अपने घरों में आतिशबाजी का बहिष्कार कर धन की बरबादी को रोकने का काम करे. प्रभात खबर द्वारा ग्लोबल वार्मिंग से देश को बचाने के लिए मीठी दिवाली मनाने का आह्वन किया जा रहा है. जो बगैर आपके सहयोग से पूरी नहीं हो सकती है. प्रभात अभियानक्या बिना पटाखे के दीवाली नही मनायी जा सकती है ? ग्लोबल वार्मिंग और बच्चों की मौत को रोकने में इस दीवाली पर आपकी क्या भूमिका होगी. आप हमें फोन या व्हाट्सएप के जरिये 94318-07274 पर मैसेज व इससे जुड़ी तसवीर भी भेज सकते हैं.

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