सोनवर्षा राज में वैदिक व तांत्रिक दोनों विधि से की जाती है पूजा

Published at :20 Oct 2015 6:50 PM (IST)
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सोनवर्षा राज में वैदिक व तांत्रिक दोनों विधि से की जाती है पूजा

सोनवर्षा राज : सोनवर्षा स्टेट के महाराजा हरिवल्लभ नारायण सिंह द्वारा सैकड़ों वर्ष पूर्व स्थापित की गयी मां दुर्गा की पूजा अर्चना वैदिक व तांत्रिक दोनों विधि से की जाती है. पूजा के विधि विधान के बाबत विस्तार से जानकारी देते हुए पंडित भगवान मिश्र बताते हैं कि सोनवर्षा में की जाने वाली विधि विधान […]

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सोनवर्षा राज : सोनवर्षा स्टेट के महाराजा हरिवल्लभ नारायण सिंह द्वारा सैकड़ों वर्ष पूर्व स्थापित की गयी मां दुर्गा की पूजा अर्चना वैदिक व तांत्रिक दोनों विधि से की जाती है. पूजा के विधि विधान के बाबत विस्तार से जानकारी देते हुए पंडित भगवान मिश्र बताते हैं

कि सोनवर्षा में की जाने वाली विधि विधान दरभंगा ड्यौढ़ी व गढ़ बनैली स्टेट के सिवाय अन्य जगह नहीं अपनाई जाती है. पूजा का संपूर्ण विधान पंडित ताराचरण झा द्वारा वर्ष 1890 में प्रकाशित पुस्तक के अनुसार की जाती है. जिसमें राशि के हिसाब से पूजा के 10 दिनों का विधान अंकित है. पूजा के 10 दिनों तक वैदिक रीति तथा रात्रि में पूजा का विधान पूर्णत:

तांत्रिक विधि से होता है. वैदिक विधान में देवी को सात्विक भोग जबकि तांत्रिक विधि के अनुसार निशा पूजा की रात 56 भोग में मछली भी चढ़ायी जाती है. निशा पूजा की रात में छागड़ की बलि प्रदान प्रारंभ होता है. जिसकी संख्या नवमी खत्म होते-होते हजारों में हो जाती है.

महाराजा हरिवल्लभ नारायण सिंह द्वारा जिस जगह से मां दुर्गा को सोनवर्षा लाया गया था. वहीं से प्रत्येक कदम पर एक छागड़ की बलि देते हुए सोनवर्षा तक लाया गया. यहां जो भी मनोकामना मांगी जाती है वह अवश्य पूर्ण होती है. सबसे बड़ी खासियत है बलि प्रदान सोनवर्षा के स्व कृपाली सिंह के परिवार द्वारा ही अब तक किया जाता रहा है.

साथ ही बलि प्रदान कार्य बायें हाथ से ही किया जाता है. पंडित भगवान मिश्र बताते हैं कि सोमवार को सप्तमी-अष्टमी होने की वजह से व्रत एवं पूजा अनिष्ट कारक होता है. यही वजह है कि महाअष्टमी का व्रत एवं मां को खोईछा भरने का कार्य मंगलवार को निश्चत है.सोनवर्षा में स्थापित मां की मंदिर का भव्य स्वरूप मां दुर्गे के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ सहरसा शहर.

महाअष्टमी के प्रवेश के साथ ही सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है. सभी मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिये गये हैं. सभी मंदिरों में माता को खोईछा भरने के लिए श्रद्धालु महिलाओं की कतार सुबह से ही लगी है.

श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसके लिए सभी मंदिर कमेटी ने व्यापक तैयारी की है. कमेटी सदस्य बारी-बारी से श्रद्धालु महिलाओं को खोईछा भरवा रहे हैं. स्थानीय पूरब बाजार स्थित पूर्वांचल दुर्गा मंदिर, पंचवटी चौक दुर्गा मंदिर, थाना चौक दुर्गा मंदिर, कचहरी ढ़ाला दुर्गा मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं माता का खोईछा भर रही है. मंदिरों के पट खुलते ही प्रशासन ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है.

सभी पूजा पंडालों तथा भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में पुलिस गश्ती तेज कर दी गयी है. साथ ही अवांछित तत्वों पर नजर रखी जा रही है. आज से तीन दिवसीय शारदीय मेले की शुरूआत हो चुकी है. लोगों में काफी उत्साह व्याप्त है. सभी श्रद्धालु नर-नारी माता के दर्शन के लिए विभिन्न मंदिरों में पूजा अर्चना कर रहे हैं. पूरा शहरी वातावरण भक्तिमय बन गया है. सभी मंदिरों के निकट मेला का नजारा है. जहां बच्चों के खिलौने से लेकर महिलाओं के श्रृंगार प्रसाधन के साथ-साथ विभिन्न तरह के मिठाईयों की दुकानें पूरी तरह सज गयी है.

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