आना-जाना है खतरा भरा

Published at :25 Dec 2015 12:36 AM (IST)
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आना-जाना है खतरा भरा

जिला प्रशासन को कई बार आवेदन देने पर भी नहीं हुआ फायदा शिवसागर (रोहतास) : प्रखंड के आलमपुर गांव के समीप जगजीवन लाइन राजबाहा में बांस के चचरी पुल से पार कर अमठा, खुढ़नू, नइया, मझुइ, बड्डी सहित दर्जनों गांवों के लोग आलमपुर बाजार आते हैं. मझुइ के संजय सिंह ने बताया कि चचरी पुल […]

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जिला प्रशासन को कई बार आवेदन देने पर भी नहीं हुआ फायदा
शिवसागर (रोहतास) : प्रखंड के आलमपुर गांव के समीप जगजीवन लाइन राजबाहा में बांस के चचरी पुल से पार कर अमठा, खुढ़नू, नइया, मझुइ, बड्डी सहित दर्जनों गांवों के लोग आलमपुर बाजार आते हैं. मझुइ के संजय सिंह ने बताया कि चचरी पुल से मोटरसाइकिल तथा अन्य घरेलू सामग्री लाना हमारी मजबूरी है. बांस के चचरी पुल से पार करना मौत का निमंत्रण देने जैसी है.
इसके टूटने से कभी भी भयानक हादसा हो सकता है. जगदीश सिंह ने बताया कि पुल तो बना था. लेकिन, एक साल पहले पुल ध्वस्त हो जाने के कारण लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. आलमपुर गांव से सटे ही जगजीवन लाइन में पुल है.लेकिन, पुल में दरारें आ गयी है. लोग जान खतरे में डाल कर उस पुल को पार करते हैं.
पुल कभी भी ध्वस्त हो सकता है. महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित बड्डी थाना है. लेकिन, प्रशासन द्वारा इस पुल पर न तो बैरियर लगाया गया है न कोई बोर्ड. ट्रैक्टर पर धान लोड कर ड्राइवर भगवान के नाम लेकर इस जर्जर पुल को पार करते हैं. इस पुल की ओर किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं है.
आलमपुर के मनोज यादव, मनु सिंह, मुन्ना सिंह, जगदीश गुप्ता, राजू गुुप्ता व उपेंद्र गुप्ता आदि ने बताया कि पुल के टूट जाने से लोग नहर छोड़ कर गांव के गलियों से होते हुए आलमपुर बाजार बाजार होकर सासाराम जाते हैं. गांव की गलियां इतनी सकरी है कि दोनों ओर से वाहन आने पर जाम लग जाता है. बहुत मुश्किल से वाहनों का आना-जाना होता है.
आलमपुर पंचायत के मुखिया उदय प्रताप गुप्ता ने बताया कि पुल टूट जाने से लोग चचरी पुल के सहारे बाजार जाते हैं.चचरी पुल का निर्माण जिस स्थल पर किया गया है वहां पर पुल बनाने के लिए गांव के लोगों ने जिला प्रशासन को कई बार आवेदन दिया है. फिर भी अधिकारी पुल निर्माण कराने की पहल नहीं कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि पुल नहीं बना तो जिला मुख्यालय में उग्र आंदोलन किया जायेगा.
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