सब्सिडी का लालच देकर 11 राज्यों में 150 करोड़ की ठगी, राधास्वामी संगठन के मास्टरमाइंड दीपक शर्मा की फर्श से अर्श तक की कहानी
राधास्वामी संगठन के नाम से लगा बोर्ड और भवन, पटना
राधास्वामी संगठन के नाम पर बिहार-झारखंड समेत 11 राज्यों में 150 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाला मास्टरमाइंड दीपक शर्मा फरार है. सूरत में मजदूरी करने वाले 28 वर्षीय दीपक ने धार्मिक नाम की आड़ में सस्ता वाहन, आवास और निवेश योजना का लालच देकर हजारों लोगों को ठगा.
जहानाबाद से अश्विनी कुमार और पटना से नीतीश कुमार की रिपोर्ट
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Radhaswami Sangathan Fraud : झारखंड-बिहार सहित देश के 11 राज्यों में सैकड़ों लोगों को सब्सिडी का लाभ दिलाने के नाम पर 150 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का मामला सुर्खियों में है. ठगी के इस खेल के कई किरदार हैं और कई कहानियां हैं, जिन्होंने आम से लेकर खास लोगों तक को अपना शिकार बनाया. हमने इन सभी किरदारों और उनसे जुड़ी कहानियों की जीरो ग्राउंड से पड़ताल की है. पेश है इसकी पहली कड़ी.
अरबों की ठगी और आलीशान जीवनशैली
एक सामाजिक संस्था होने के नाम पर राधास्वामी संगठन ने गाड़ियों, सामानों और फ्लैट पर भारी डिस्काउंट दिलाने के नाम पर कई शहरों में अपना जाल फैलाया और हजारों लोगों से अरबों की राशि की ठगी की. अकेले पटना में 150 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई.
इस पूरे खेल में फरार चल रहा संगठन का मास्टरमाइंड दीपक कुमार शर्मा गया जी जिले के कोंच थाना क्षेत्र अंतर्गत गरारी पंचायत के औहालचक गांव का मूल निवासी है. कभी सूरत में परिवार के साथ मजदूरी करने वाला दीपक मात्र 28 साल का है. आज ठगी के पैसों से अरबों की अकूत संपत्ति बना चुका है. वह आलीशान जीवनशैली जी रहा है.
अपना रुतबा जताने के लिए अपने गांव वह स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर या थार जैसी महंगी गाड़ियों के काफिले में जाता था. यही नहीं, 2024 में उसने जहानाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. हार के बाद भी उसने पैतृक गांव औहालचक में 20 लाख रुपये का भुगतान कर एक बीघा कृषि भूमि खरीद ली.
सूरत की मजदूरी से पटना तक का सफर
दीपक शर्मा के गांव के लोग बताते हैं कि उसके पिता विमल कुमार शर्मा पारिवारिक भरण-पोषण के लिए करीब तीन दशक पहले गुजरात के सूरत शहर चले गए थे. वहां वह पारंपरिक बढ़ईगिरी करते थे.
दीपक का जन्म भी सूरत में ही हुआ. वह मजदूरी में हाथ बंटाता था. करीब 10 साल पहले यह परिवार सूरत से आकर पटना में बस गया. पैतृक गांव से उनका संपर्क नाममात्र का ही रहा. गांव में दीपक के घर के नाम पर सिर्फ एक पुराना पक्का कमरा है, जो हमेशा बंद रहता है.
ग्रामीणों के अनुसार, हाल के वर्षों में दीपक जब भी कुछ घंटों के लिए गांव आता था, तो स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर या थार जैसी महंगी गाड़ियों के काफिले में होता था. उसकी इस जीवनशैली को देखकर गांववाले हमेशा अचंभित रहते थे कि एक सामान्य पृष्ठभूमि वाले युवक के पास इतनी महंगी गाड़ियों का खर्च कहां से आ रहा है.
धार्मिक नाम की आड़ में ठगी का जाल
दीपक ने सबसे पहले पटना में राधास्वामी संगठन का सेंटर खोला. वह इसे एक सामाजिक संगठन बताता था. हालांकि उसने एक धार्मिक संगठन से मिला-जुला नाम इसलिए रखा, ताकि उस पर लोगों का आसानी से विश्वास जम सके.
इसकी आड़ में उसने कन्या दान योजना, वाहन योजना, आवास योजना और निवेश योजना के नाम पर लोगों को भारी छूट और लाभ का लालच देकर करोड़ों-अरबों रुपये की ठगी की. धीरे-धीरे उसने अपना जाल पूरे मगध क्षेत्र में फैलाया.
पटना के जक्कनपुर, हनुमान नगर में राधास्वामी संगठन का सेंटर खोलने के बाद जहानाबाद, अरवल, गया, नवादा में भी उसने सेंटर खोले और अपने एजेंट रखे. उसकी वेबसाइट के अनुसार 11 राज्यों में उसके 50000 से अधिक एजेंट हैं.
लोकसभा चुनाव और संपत्ति का ब्योरा
2024 के लोकसभा चुनाव में उसने राधास्वामी संगठन के नाम से जहानाबाद संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा. इससे पहले उसने अरवल में सेंटर खोलकर हजारों लोगों को अपने लोन से जोड़ा, सैकड़ों लोगों को एजेंट बनाया, ताकि वह क्षेत्र में अपनी पैठ बना सके. हालांकि इस चुनाव में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा.
उसे महज 8970 वोट मिले, उसकी जमानत भी जब्त हो गई. उसने अपने चुनावी हलफनामे में चल संपत्ति 1.74 करोड़ रुपये बताई, जबकि अचल संपत्ति के नाम पर कुछ भी नहीं दिखाया. उसने अपने पास फॉर्च्यूनर कार, और दो महंगी बाइक होने का भी ब्योरा दिया. चुनाव हारने के बावजूद उसकी आर्थिक स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा.
उल्टे, 2025 में उसने अपने पैतृक गांव औहालचक में 20 लाख रुपये का भुगतान कर एक बीघा कृषि भूमि खरीद ली. गांव में महंगी जमीन खरीदने के बाद दीपक की आय के स्रोत को लेकर ग्रामीणों के बीच सवाल उठने लगे थे. लोग मान चुके थे कि वह किसी बड़े अवैध धंधे में लिप्त है.
केस स्टडी-1: नवादा में कार का झांसा
नवादा के नारदीगंज थाना क्षेत्र के खेदुबिगहा निवासी मनोज कुमार ने 18 मार्च 2026 को दर्ज शिकायत में बताया कि संगठन के जिला समन्वयक धर्मेंद्र कुमार ने उन्हें 6.50 लाख रुपये में अर्टिगा गाड़ी उपलब्ध कराने का प्रलोभन दिया था.
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मनोज ने तय रकम का भुगतान भी कर दिया, लेकिन उन्हें वाहन नहीं मिला. दबाव बनाने पर आरोपित ने मनोज को एक चेक दिया, जो बैंक में बाउंस हो गया.
केस स्टडी-2: नालंदा में ऑटो और निवेश के नाम पर ठगी
नालंदा जिले के तेल्हारा के खोजपुरा गांव के रहने वाले पीड़ित विकास कुमार ने बताया कि उनसे चार लाख की ऑटो का 40 प्रतिशत कम यानी लगभग 2.60 लाख रुपया लिया गया. इसके बाद उन्हें यह बताया गया कि राधास्वामी संगठन के लोग ही गाड़ी की ईएमआई भरेंगे. उन्हें ऑटो मिल गया और वे उससे अपना काम करने लगे. 12 माह तक उनकी गाड़ी की ईएमआई दी गई लेकिन बाद में बंद कर दी गई.
जब वे मई माह में संगठन के ऑफिस गए तो वह बंद था. साथ ही उन्होंने ऑटो लिया तो उन्हें पैसा निवेश करने को भी कहा गया. इसके बाद उन्होंने पांच लाख रुपया निवेश किया. इस पर प्रतिमाह चार प्रतिशत देने का वादा किया गया था. 10-12 माह चार प्रतिशत ब्याज मिला. लेकिन वह भी बंद कर दिया गया और उनका मूलधन भी लेकर संगठन के लोग फरार हो चुके हैं.
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