Patna News: सप्लाई वाटर में मिला टी-कोलाइ बैक्टीरिया, 93 जलापूर्ति केंद्रों में नहीं हैं क्लोरिनेटर; अब 93.93 लाख खर्च करेगा नगर निगम
पटना में नलों से मिलने वाले पानी की गुणवत्ता में सुधार होने वाली है. नगर निगम ने 93 जलापूर्ति केंद्रों पर क्लोरिनेटर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसका मुख्य उद्देश्य पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है.
Patna News: राजधानीवासियों को नलों से स्वच्छ व सुरक्षित पेयजल आपूर्ति के लिए पटना नगर निगम ने बड़ी तैयारी की है. नगर निगम क्षेत्र के 93 जलापूर्ति केंद्रों में जल्द ही क्लोरिनेटर लगाए जाएंगे. दरअसल, छज्जूबाग स्थित स्टेट वाटर टेस्टिंग लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट में सप्लाई के पानी में टी-कोलाइ बैक्टीरिया की पुष्टि हुई थी. यह जांच जनवरी 2026 में की गयी थी. इसके बाद पानी में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं व जलजनित बीमारियों को खत्म करने के लिए नगर निगम ने यह कदम उठाया है.
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इस पूरी योजना पर कुल 93.93 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. प्रति क्लोरिनेटर एक लाख रुपये की लागत आएगी, जबकि 93 हजार रुपये कंटिंजेंसी फंड के रूप में तय किए गए हैं. वर्तमान में इन सेंटरों के पास उपकरण न होने से बिना पूरी तरह साफ हुए पानी घरों तक पहुंच रहा था.
लैब रिपोर्ट में रिपोर्ट की पुष्टि के बाद बड़ा कदम
छज्जूबाग स्थित राज्य जल जांच प्रयोगशाला की रिपोर्ट में नल के पानी में बैक्टीरिया मिला था. हालांकि, सभी जलापूर्ति केंद्रों की यह स्थिति नहीं है. लेकिन, एहतियातन के तौर पर 93 पंपिंग स्टेशनों में क्लोरिनेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. इससे दूषित पानी घरों तक नहीं पहुंचेगी. हाल ही में हुए सशक्त स्थायी समिति की बैठक में इस परियोजना को स्वीकृत किए गए हैं.
वाटर बोर्ड सीधे संभालता है इन 93 सेंटरों का प्रबंधन
पटना नगर निगम क्षेत्र में कुल 183 जलापूर्ति केंद्र संचालित हो रहे हैं. इनमें से 90 केंद्रों का जिम्मा निजी संवेदकों के पास है, जहां व्यवस्था दुरुस्त पाई गई है. वहीं, शेष 93 केंद्रों का संचालन वाटर बोर्ड खुद करता है. इन्हीं सरकारी नियंत्रण वाले केंद्रों पर उपकरण न होने से दिक्कत आ रही थी, जहां अब नगर निगम प्राथमिकता के आधार पर नए उपकरण इंस्टॉल कराने जा रहा है.
पहले नहीं था प्रावधान, अब दो-तीन वर्षों से किया गया अनिवार्य
वाटर बोर्ड के कार्यपालक अभियंता इंजीनियर रामस्वरूप प्रसाद ने बताया कि पहले जलापूर्ति व्यवस्था में क्लोरिनेटर लगाने का कोई नियम नहीं था. हालांकि, पिछले दो-तीन वर्षों से शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए इसे अनिवार्य कर दिया गया है. अब सभी जलापूर्ति केंद्रों पर उपकरण इंस्टॉल होने से नलों में पहुंचने वाला पानी पूरी तरह कीटाणुरहित व पीने योग्य होगा.
पानी में मौजूद रोगाणुओं को नष्ट करता है क्लोरिनेटर
क्लोरिनेटर एक विशेष तकनीकी उपकरण है, जो पानी में तय मात्रा में क्लोरीन गैस या लिक्विड मिलाने का काम करता है. यह पानी में मौजूद टी-कोलाइ जैसे हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस व अन्य रोगाणुओं को पूरी तरह नष्ट कर देता है. इसके इस्तेमाल से पानी का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है तथा टाइफाइड, हैजा व डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा समाप्त हो जाता है.
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