हिन्दी भारत की सांस्कृतिक चेतना की पहचान, नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी : राज्यपाल सैयद अता हसनैन
हिन्दी भारत की सांस्कृतिक चेतना की पहचान, नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी : राज्यपाल
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि हिन्दी सहित भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय एकता की मजबूत कड़ी हैं. कार्यक्रम में 'लाल पहाड़ी : स्त्री महाविहार' पुस्तक का विमोचन भी हुआ.
Patna News : राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय एकता के विचारों से प्रेरित रहा. भारतीय भाषाओं और देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है. राज्यपाल शनिवार को लोकभवन में विश्व हिन्दी परिषद की ओर से आयोजित क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन एवं सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे.
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भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय एकता की मजबूत कड़ी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंद्रेश कुमार ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का चिंतन भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक आत्मबोध से जुड़ा था. उन्होंने कहा कि हिन्दी सहित भारतीय भाषाएं देश की विविधता को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं. भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया जा सकता है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं विरासत से जोड़ा जा सकता है.
हिन्दी भारत की सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी भाषा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि हिन्दी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और जनभावनाओं से जुड़ी भाषा है. बिहार की धरती ने हिन्दी साहित्य और भारतीय चिंतन को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. ऐसे सम्मेलन देश की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों पर विमर्श
विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का व्यक्तित्व भारतीय शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रनिर्माण के संदर्भ में महत्वपूर्ण है. उनके विचारों पर विमर्श के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और राष्ट्रीय चिंतन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक ठाकुर ने कहा कि हिन्दी को सिर्फ एक भाषा के रूप में देखने के बजाय भारत की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच संवाद के सशक्त माध्यम के रूप में समझने की जरूरत है.
‘लाल पहाड़ी : स्त्री महाविहार’ पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री शांतमनु और जम्मू-कश्मीर के चुनाव आयुक्त समेत अन्य अतिथियों की मौजूदगी में रमाकांत चंदन लिखित पुस्तक ‘लाल पहाड़ी : स्त्री महाविहार’ का विमोचन किया गया. पुस्तक में गंगा घाटी के एक प्राचीन महाविहार का उल्लेख किया गया है, जहां विशिष्ट बौद्ध भिक्षुणियों के निवास के प्रमाण मिलने की बात सामने आती है. उत्खनन के दौरान मिले सुरक्षा संबंधी संकेतों और सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुओं के आधार पर इस स्थल की विशेषताओं को रेखांकित किया गया है.
साहित्यकारों और विद्वानों की रही मौजूदगी
समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सी. पी. ठाकुर, डॉ. संजय पासवान, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, एमएलसी सूर्य कुमार शर्मा, मुख्य समन्वयक शैलेश वत्स, विश्व हिन्दी परिषद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष एवं सम्मेलन संयोजक कमल किशोर तथा सह-संयोजक और शैक्षिक प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. मधु प्रभा समेत परिषद के कई पदाधिकारी, साहित्यकार, विद्वान और शोधार्थी मौजूद रहे. कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, विद्वानों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया.
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