नौबतपुर में बाढ़ का पानी घटा, 27 गांवों की सड़कें खुलीं; प्रशासन ने राहत और स्वास्थ्य सेवाएं रखीं जारी

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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करते स्थानीय विधायक सौरभ सिद्धार्थ साथ में ग्रामीण

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पुनपुन नदी में आई बाढ़ से नौबतपुर प्रखंड में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं. जलस्तर घटने से 27 गांवों को राहत मिली है और सड़कें खुल गई हैं. प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर राहत व बचाव कार्य जारी है, हालांकि किसानों के लिए अभी भी फसल और चारे का संकट बना हुआ है.

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Naubatpur Flood: पुनपुन नदी के उफान के बाद नौबतपुर प्रखंड में अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. नदी के जलस्तर में तेजी से गिरावट आने से तटबंधों के टूटने का खतरा टल गया है. इससे प्रभावित 27 गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है. जलभराव के कारण बंद मुख्य मार्ग और संपर्क सड़कें पानी हटने के बाद फिर से चालू हो गयी हैं. सड़कों के खुलने से राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों की आवाजाही में भी सुविधा हुई है. हालांकि, निचले इलाकों और कृषि योग्य खेतों में अब भी पानी जमा है.

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राहत और बचाव कार्य तेज

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर राहत व बचाव कार्य जारी है. स्थानीय विधायक सौरभ सिद्धार्थ ने बाढ़ प्रभावित पंचायतों का दौरा कर पीड़ितों की समस्याएं सुनीं. उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को बिना देरी प्रभावित लोगों तक हर संभव सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया. विधायक ने प्रभावित किसानों को फसल क्षति का उचित मुआवजा दिलाने और क्षतिग्रस्त तटबंधों की पक्की मरम्मत कराने का भरोसा दिया.

प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण

स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की ओर से प्रभावित परिवारों के बीच पॉलीथिन शीट, सूखा राशन और पका हुआ भोजन वितरित किया जा रहा है. सड़कें खुलने के बाद राहत सामग्री को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने में भी सुविधा हुई है.

स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट

बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों की आशंका को देखते हुए नौबतपुर रेफरल अस्पताल की मेडिकल टीम अलर्ट है. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने के साथ बुखार, डायरिया और पेट से जुड़ी बीमारियों की दवाइयां वितरित कर रही है.

धान की फसल और चारे का संकट बरकरार

जलस्तर घटने और सड़कों के खुलने के बावजूद ग्रामीणों की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. खेतों में डूबी धान की फसल के नष्ट होने की चिंता बनी हुई है. वहीं, मवेशियों के लिए हरे चारे का भी गंभीर संकट है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक राहत शिविर, सूखा भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी.

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