पटना : दलीय आधार पर हो सकता है अगला नगर निकाय चुनाव

Updated at : 13 Dec 2019 8:16 AM (IST)
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पटना : दलीय आधार पर हो सकता है अगला नगर निकाय चुनाव

नगर एवं आवास विभाग को चुनाव कराने की मिली रिपोर्ट पटना : राज्य के नगर निकायों का चुनाव दलीय आधार पर कराने संबंधी रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को प्राप्त हो चुकी है. विकास एवं प्रबंधन संस्थान, पटना द्वारा इसको लेकर अध्ययन किया गया है. इससे संबंधित रिपोर्ट विभाग को सौंपी दी गयी है. […]

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नगर एवं आवास विभाग को चुनाव कराने की मिली रिपोर्ट
पटना : राज्य के नगर निकायों का चुनाव दलीय आधार पर कराने संबंधी रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को प्राप्त हो चुकी है. विकास एवं प्रबंधन संस्थान, पटना द्वारा इसको लेकर अध्ययन किया गया है.
इससे संबंधित रिपोर्ट विभाग को सौंपी दी गयी है. सरकार इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लेती है, तो सूबे में आगामी नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराये जा सकते हैं. इसके अलावा नगर निकायों में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव सीधे कराने का भी प्रावधान हो जायेगा.
नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि दलीय आधार पर चुनाव कराने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी आपत्ति नहीं हैं. दलीय आधार पर चुनाव होने से निकायों की बुनियाद में ही सुधार हो जायेगा. इसकी प्रक्रिया चल रही है. जल्द ही समीक्षा कर आगे की कार्रवाई की जायेगी. राज्य के नगर निकायों में मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव में हाॅर्स ट्रेडिंग पर रोकथाम के लिए उनकी चयन प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है.
अब मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए वार्ड सदस्यों के वोट की जरूरत नहीं रहेगी. आम जनता उनका सीधा चुनाव करेगी. देश के कई राज्यों में मेयर व डिप्टी मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाता है. इन राज्यों में उत्तरप्रदेश, झारखंड, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं. बिहार में कुल 143 नगर निकाय हैं. इनमें 12 नगर निगम, 49 नगर पर्षद और 82 नगर पंचायत शामिल हैं.
मुख्यमंत्री को भी आपत्ति नहीं : मंत्री
दलीय आधार पर चुनाव कराने से निकायों की बुनियाद में सुधार होगा.
मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग पर रोकथाम के लिए उनकी चयन प्रक्रिया में बदलाव होगा.नगर विकास विभाग में विकास प्रबंधन संस्थान की रिपोर्ट के आधार पर यह प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिससे निर्वाचित मेयर व डिप्टी मेयर के खिलाफ पांच साल में सिर्फ एक बार ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है.
वह भी उनके आधा कार्यकाल पूरा होने के बाद. इस तरह से मेयर को कम-से-कम ढाई साल तक बिना रुकावट काम करने का मौका मिलेगा. वर्तमान में मेयर के खिलाफ निर्वाचन के दो साल के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है. उसके एक साल के बाद फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार पार्षदों को है.
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