पटना : चतुर्थवर्गीय कर्मियों की नियुक्ति में एक भी भर्ती खुले बाजार में हुई है या नहीं

Updated at : 23 Oct 2019 9:03 AM (IST)
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पटना : चतुर्थवर्गीय कर्मियों की नियुक्ति में एक भी भर्ती खुले बाजार में हुई है या नहीं

पटना : पूर्वी चंपारण समाहरणालय व अन्य प्रशासनिक दफ्तरों में ग्रुप डी के पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों पर हाइकोर्ट की तल्ख टिप्पणी करते हुए डीएम से पूछा कि 2013-14 के ग्रुप डी पदों पर हो रही नियुक्तियों में एक भी नियुक्ति खुले बाजार से हुई है या नहीं? कोर्ट ने […]

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पटना : पूर्वी चंपारण समाहरणालय व अन्य प्रशासनिक दफ्तरों में ग्रुप डी के पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों पर हाइकोर्ट की तल्ख टिप्पणी करते हुए डीएम से पूछा कि 2013-14 के ग्रुप डी पदों पर हो रही नियुक्तियों में एक भी नियुक्ति खुले बाजार से हुई है या नहीं?
कोर्ट ने फिलहाल इन नियुक्तियों पर रोक लगाते हुए पूर्वी चंपारण के डीएम से जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की एकलपीठ ने उमा शंकर सिंह द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए डीएम से यह जानकारी मांगी है. कोर्ट ने यह जानना चाहता है कि इस नियुक्ति में कितनी नियुक्ति गलत तरीके से की गयी है.
हाइकोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग से मांगा जवाब : केंद्रीय कानून के अंतर्गत बहुदिव्यांग (मल्टीपल डिसेबल पर्संस ) को सरकारी नौकरी में मिलने वाले एक प्रतिशत आरक्षण का लाभ बीपीएससी के 63वें संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के अभ्यर्थियों को क्यों नहीं दिया जाये, इसकी जानकारी हाइकोर्ट ने बीपीएससी से तलब किया है.
न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की एकलपीठ ने अतुल रंजन की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया. हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी निर्देश दिया कि वह पूरक शपथ पत्र के माध्यम से नवंबर 2017 से पहले का निर्गत कोई प्रमाणित मल्टीपल डीसेबिलिटी सर्टिफिकेट कोर्ट के सामने पेश करे.
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विंध्याचल सिंह ने कोर्ट को बताया की 2016 में बना दव्यिांग जनाधिकार कानून के तहत कुल पांच श्रेणियों में दिव्यांग निर्धारित किये गये हैं, जिनमें पहली तीन श्रेणियों के दिव्यांगों को अलग-अलग एक फीसदी आरक्षण और अंतिम दो यानी श्रेणी डी व इ (बहु दिव्यांगों के लिए ) संयुक्त रूप से एक फीसदी आरक्षण का लाभ मिलता है. याचिकाकर्ता पीटी परीक्षा पास कर मेंस में बैठा और उसने एक फीसदी आरक्षण के लाभ की मांग की. याचिकाकर्ता का दावा है कि वह बहु दव्यिांगों के संयुक्त वर्ग (डी और इ श्रेणी ) में इ केटेगरी का इकलौता अभ्यर्थी है.
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