पटना जिले में केवल 11 हजार दुकानों के पास फूड लाइसेंस

Updated at : 06 Sep 2019 9:39 AM (IST)
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पटना जिले में केवल 11 हजार दुकानों के पास फूड लाइसेंस

पटना : पटना जिले में केवल 11 हजार फूड प्रोडक्ट बेचने वाले दुकानों के पास ही फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन हैं जबकि यहां खाद्य उत्पाद वाले दुकानों की संख्या इससे कहीं अधिक है. खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 12 लाख से कम आय वाले सभी दुकानों को रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होता है जबकि लाइसेंस उन […]

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पटना : पटना जिले में केवल 11 हजार फूड प्रोडक्ट बेचने वाले दुकानों के पास ही फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन हैं जबकि यहां खाद्य उत्पाद वाले दुकानों की संख्या इससे कहीं अधिक है.
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 12 लाख से कम आय वाले सभी दुकानों को रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होता है जबकि लाइसेंस उन दुकानों को लेना जरूरी है जो 12 लाख से अधिक वार्षिक टर्नओवर हासिल करते हैं. अभी तक विभाग की ओर से भी फूड प्रोडक्ट बेचने वाले दुकानों की कोई आधिकारिक गणना नहीं हो सकी है, इस कारण न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि आम लोगों के भी स्वास्थ्य की सुरक्षा भी भगवान के भरोसे है.
लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की सूचना सार्वजनिक कर रखना है अनिवार्य : नियमों के अनुसार सभी फूड प्रोडक्ट बेचने वाले दुकान, चाहे वह किराना दुकान हों या फिर होटल रेस्तरां, सभी को लाइसेंस अौर रजिस्ट्रेशन की सूचना सार्वजनिक कर रखनी होती है.
उसमें न केवल लाइसेंस या निबंधन की संख्या लिखी जानी चाहिए बल्कि उसकी वैलीडिटी कब तक है, इसका भी साफ साफ जिक्र करना होता है. इसी के बाद ग्राहक यह निर्णय लेते हैं कि इस दुकान से खरीददारी करें या नहीं? लेकिन केवल बड़े दुकानों को छोड़कर ज्यादातर में इसका पालन नहीं किया जा रहा है.
नहीं होता है नियमों का पालन
विभाग के द्वारा इस नियम को क्रॉस चेक करने के लिए भी कोई मुकम्मल रणनीति नहीं है. न तो दुकानों में इस बाबत चेकिंग की जाती है न ही इसके लिए कोई जन-जागरूकता ही फैलायी जाती है. इसके कारण यहां के दुकानों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार 50 फीसदी दुकानें बिना लाइसेंस के चल रहे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी?
जिले के खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी अजय कुमार कहते हैं कि लाइसेंस और निबंधन लेने में आमलोगों के द्वारा कोताही बरती जा रही है. यही कारण है कि निबंधित दुकानों की संख्या बहुत कम है. यही नहीं रिन्युअल भी लोग समय पर नहीं करा रहे हैं. हम 11 सितंबर को सिविल सर्जन ऑफिस में एक स्पेशल कैंप लगा रहे हैं ताकि लोग आएं और इसका लाभ उठाएं.
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