चाइल्ड लेबर मामला : पहली बार आजीवन कारावास, पहला दोषी बिहार के गया का युवक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Sep 2019 4:12 AM (IST)
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अनुज शर्मापटना : बालश्रम ट्रैफिकिंग में पहली बार आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है. राजस्थान के जयपुर की न्यायालय अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या नौ की जज वंदना राठौड़ ने गया के एक युवक को चाइल्ड लेबर के मामले में इतनी बड़ी सजा सुनायी है. पीड़ित भी गया का ही है. गौरतलब है […]
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अनुज शर्मा
पटना : बालश्रम ट्रैफिकिंग में पहली बार आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है. राजस्थान के जयपुर की न्यायालय अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या नौ की जज वंदना राठौड़ ने गया के एक युवक को चाइल्ड लेबर के मामले में इतनी बड़ी सजा सुनायी है. पीड़ित भी गया का ही है. गौरतलब है कि इस मामले में राजस्थान हाइकोर्ट के निर्देश पर सीबीआइ की जयपुर कोर्ट ने सुनवाई की थी.
क्या था मामला
दरअसल, गया के थाना परैया के गांव सुमत्रिा देवी के नाबालिग बेटे को गांव का ही तौफीक उर्फ सोनू झांसा देकर ले गया था. कई दिनों तक बेटे खबर नहीं मिली तो पुलिस में शिकायत की गयी. फिर बच्चों को लेकर काम करने वाली संस्था सेंटर डायरेक्ट’ ने बिहार और राजस्थान पुलिस की मदद ली.
बाद में जयपुर के थाना खोनागोरियान पुलिस ने 10 से 17 साल के पांच बच्चों को करीम नगर से बरामद कर लिया. नाबालिग को जयपुर में ही एक चुड़ी के कारखाना में बंधक बनाकर काम लिया जा रहा था. तौफीक भी पकड़ा गया था. ‘सेंटर डायरेक्ट’ के कार्यकारी निदेशक सुरेश कुमार ने प्रभात खबर को बताया कि पहली बार लेबर ट्रैफिकिंग में आजीवन कारावास हुआ है. अभी और भी कई मामलों में सुनवाई चल रही है.
- चाइल्ड लेबर के मामले में इतनी बड़ी सजा
- सीबीआइ की जयपुर कोर्ट ने सुनवाई की थी
दोषी एक, सजा पांच
कोर्ट ने तौफीक उर्फ सोनू को पांच अलग- अलग सजा दी गयी है. मानव तस्करी – दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना- बेचना के आरोप में आजीवन कारावास तथा एक लाख रुपये का दंड दिया है.
झूठी गवाही (धारा 344) में तीन साल की सजा एवं 15 हजार का जुर्माना, इच्छा के विरुद्ध श्रम करने के लिए गैर-क़ानूनी तौर पर विवश करने पर (धारा 374) एक साल का कारावास एवं पांच हजार का जुर्माना, बालकों की देखरेख व संरक्षण अधिनियम (धारा 23) के आरोप में छह माह का कारावास, तथा धारा 26 में तीन साल का साधारण कारावास एवं 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है.
बिहार में 10 लाख 88 हजार 509 बाल श्रमिक
बिहार में 10 लाख 88 हजार 509 बाल श्रमिक हैं. 78 हजार 929 अकेले गया जिला के हैं. बिहार में 13 जिला सबसे अधिक प्रभावित हैं. इसमें से 55 फीसदी बाल श्रमिक बिहार में काम कर रहे हैं. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में सबसे अधिक 1422 केस रिपोर्ट किये गये. इसमें 40 फीसदी बाल श्रमिक अकेले गया जिला से हैं.
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