इंटर कंपार्टमेंटल में 84.42 फीसदी पास

Updated at : 29 May 2019 5:49 AM (IST)
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इंटर कंपार्टमेंटल में 84.42 फीसदी पास

पटना : शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने बिहार बोर्ड की इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल सह विशेष परीक्षा का रिजल्ट मंगलवार को जारी कर दिया. इसमें 82.42% परीक्षार्थी पास हुए हैं. इनमें 10.55% प्रथम श्रेणी से, 80.08% द्वितीय श्रेणी से व 8% तृतीय श्रेणी में सफल हुए. रिजल्ट रिकॉर्ड 12 दिनों में जारी किया गया. 5806 परीक्षार्थी […]

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पटना : शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने बिहार बोर्ड की इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल सह विशेष परीक्षा का रिजल्ट मंगलवार को जारी कर दिया. इसमें 82.42% परीक्षार्थी पास हुए हैं. इनमें 10.55% प्रथम श्रेणी से, 80.08% द्वितीय श्रेणी से व 8% तृतीय श्रेणी में सफल हुए. रिजल्ट रिकॉर्ड 12 दिनों में जारी किया गया.

5806 परीक्षार्थी विशेष परीक्षा में हुए शामिल : बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि इंटरमीडिएट कंपार्टमेंटल-सह-विशेष परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए कुल 92,386 परीक्षार्थियों में 86,580 कंपार्टमेंटल, जबकि 5,806 ने विशेष परीक्षा के लिए फॉर्म भरा था. विशेष परीक्षा में 3,494 परीक्षार्थी पास हुए, जबकि कंपार्टमेंटल परीक्षा में कुल 72,646 परीक्षार्थी पास हुए.
इस परीक्षा में कुल 16,246 परीक्षार्थी असफल रहे, जो 17.58% हैं. उन्होंने बताया कि कला संकाय से 38098, वाणिज्य से 1083, विज्ञान संकाय से 36912 और व्यावसायिक संकाय से 47 विद्यार्थी पास हुए हैं. बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि यह परीक्षा एक से 10 मई के बीच 85 केंद्रों पर ली गयी थी.
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 16 मई से शुरू हुआ. सिर्फ 12 दिनों में रिजल्ट जारी कर दिया गया. रिकॉर्ड समय में रिजल्ट देने की वजह से कई राज्यों के बोर्ड अध्यक्ष चकित हैं और वे बिहार बोर्ड की तकनीक और प्रक्रिया का सर्वे करना चाहते हैं. एक टीम तो 10 दिनों में आने वाली भी है. उन्होंने बताया कि मैट्रिक कंपार्टमेंटल का रिजल्ट भी एक हफ्ते में जारी कर दिया जायेगा.
नकल के बारे में परीक्षार्थियों ने सोचना भी किया बंद
शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि बोर्ड ने पिछले दिनों में काफी बेहतर काम किया है और कदाचारमुक्त स्वच्छ माहौल में परीक्षाओं के सफल और शांतिपूर्वक आयोजन के साथ ही रिकॉर्ड समय में रिजल्ट को जारी किया है. अब नकल के बारे में परीक्षार्थियों ने सोचना भी बंद कर दिया है, क्योंकि न सिर्फ कदाचारमुक्त परीक्षा, बल्कि मार्किंग स्कीम भी अब इस तरह की है कि जो बच्चे पढ़ेंगे, उन्हें अधिक-से-अधिक अंक प्राप्त होंगे.
बोर्ड की पुरानी छवि अब दूर हो गयी है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बोर्ड और शिक्षा को प्राथमिक स्तर पर रखा है. यही वजह है कि शिक्षा की दिशा में हम लगातार प्रगति कर रहे हैं. शिक्षा का बजट राज्य में सबसे अधिक है. उन्होंने बोर्ड के अध्यक्ष की तारीफ करते हुए कहा कि उनके दिशा-निर्देश में बोर्ड ने वह कर दिखाया है, जो अब तक किसी बोर्ड ने नहीं किया था. पुराने दिनों को याद कर सिहरन हो जाती है.
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