चार लाख से ज्यादा ने लिया बिहार लोक शिकायत निवारण का लाभ

Updated at : 25 Feb 2019 5:56 AM (IST)
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चार लाख से ज्यादा ने लिया बिहार लोक शिकायत निवारण का लाभ

पटना : नागरिकों की समस्याओं एवं शिकायतों के प्रभावकारी समाधान करने और इस व्यवस्था को एक संस्थागत एवं कानूनी स्वरूप देने के लिए वर्ष 2015 में बिहार विधानमंडल द्वारा बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम पारित किया गया. इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियों के बाद 5 जून 2016 को सम्पूर्ण […]

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पटना : नागरिकों की समस्याओं एवं शिकायतों के प्रभावकारी समाधान करने और इस व्यवस्था को एक संस्थागत एवं कानूनी स्वरूप देने के लिए वर्ष 2015 में बिहार विधानमंडल द्वारा बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम पारित किया गया.
इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियों के बाद 5 जून 2016 को सम्पूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम को लागू करने वाला बिहार देश का अग्रणी राज्य बना. इस अधिनियम के कार्यान्वयन से जन-शिकायत निवारण की दिशा में बिहार में आमूल चूल परिवर्तन हुआ है.
बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम आम लोगों को उनकी शिकायतों पर सुनवाई का अवसर और निवारण का कानूनी अधिकार प्रदान करता है. इसका स्वरूप इतना विस्तृत और व्यापक है कि इसमें आरटीआइ, आरटीपीएस, सेवा संबंधी मामले तथा न्यायालय के अधिकार वाले मामलों को छोड़ कर संपूर्ण बिहार और सभी 44 विभागों के 478 योजनाएं कार्यक्रम तथा सेवाएं अधिसूचित हैं. जिनके संबंध में लाभ या राहत प्राप्त किया जा सकता है और इसके क्रियान्वयन के संबंध में शिकायत दर्ज की जा सकती है.
यह सरकारी कर्मचारियों के संद्भावपूर्ण व्यवहार और अकर्मण्यता इत्यादि के लिए दायर किये जा सकने वाले परिवादों के अतिरिक्त है. ग्रामीण सड़क निर्माण एवं मेंटेनेंस को भी बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम के अंतर्गत लाने का फैसला किया गया है ताकि सड़क के निर्माण एवं मेंटेनेंस की शिकायतों को लोग पंचायत भवन या प्रखंड में स्थापित केंद्रों पर भी कर सकें. बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अब तक कुल 4,77,867 परिवाद के आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें 4,22,521 परिवादों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया है. इसमें से 1,14,779 आवेदकों को वैकल्पिक सुझाव दिये गये हैं तथा 74,319 आवेदन विभिन्न कारणों से अस्वीकृत किये गये हैं.
परिवाद निवारण में रूचि नहीं लेने वाले 254 लोक प्राधिकारों पर 7.52 लाख रुपये का दंड लगाया गया है. जबकि 64 लोक सेवकों के विरुद्ध अनुशासनिक कारवाई भी की जा रही है. इस अधिनियम के तहत बिना किसी आयु, लिंग, जाति, धर्म के भेद-भाव के कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है.
यहां तक कि जिन विषयों की सूची शिकायत के दायरे में शामिल नहीं है उसपर भी अगर कोई आवेदन देता है तो उसे वापस नहीं किया जाता है बल्कि उसपर भी उस व्यक्ति को विशिष्ट वैकल्पिक सुझाव उपलब्ध करा कर मार्गदर्शन दिया जाता है. लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अपने क्षेत्राधिकार में सभी 44 विभागों से संबंधित शिकायतों का निवारण एक छत के नीचे करता है जिसकी वजह से लोगों को जरूरी आवश्यकताओं के समाधान के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय का चक्कर लगाने की जरुरत नहीं पड़ती है.
इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया को बहुत ही सरल बनाया गया है ताकि लोगों को समझने और आवेदन करने में कोई कठिनाई न हो. पावती रसीद में यूनिक आइडी तथा इस पर सुनवाई की तिथि तथा सुनवाई का स्थान दिया रहता है.
अपील तथा दंड और अनुशासनिक सुनवाई के प्रावधान इस प्रणाली की महत्वपूर्ण विशेषता है. यह पूरी प्रणाली ऑनलाइन तथा पारदर्शी है साथ-ही-साथ शिकायत निवारण के लिए अधिकतम समय सीमा भी निर्धारित की गयी है. इसकी सुनवाई को अभिलेखित किया जाता है और सभी दस्तावेज डिजिटलाइड हैं और वेब पर उपलब्ध हैं. इस व्यवस्था में नागरिकों से फीडबैक लिया जाता है तथा पारित निर्णयों में आवेदकों से यह पूछा जाता है कि उनकी समस्या के निवारण से वे संतुष्ट हैं कि नहीं.
बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम से परिवादी एवं लोक प्राधिकार के बीच शक्ति समरूपता स्थापित हुई है. जिन पदाधिकारियों से आम लोगों को मिल पाना कठिन होता था उन्हें शिकायतों की सुनवाई के दौरान लोक शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष बराबरी की स्थिति में बैठा कर सुनवाई की जाती है.
पुलिस द्वारा कार्रवाई न किये जाने का मामला हो या भूमि विवाद का, अतिक्रमण, जन वितरण प्रणाली एवं बिजली बिल में सुधर से लेकर लगान रसीद निर्गत करने, बंदोबस्ती, बेदखली एवं सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों से संबंधित लाखों मामले इस अधिनियम के माध्यम से समाधान कराये गये है. यह राज्य सरकार के न्याय के साथ विकास की प्रतिबद्धता को भी दरसाता था.
सरकार द्वारा हर स्तर पर विभिन्न माध्यमों से अभियान चलाकर बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार कानून के व्यापक प्रचार प्रसार की व्यवस्था की गयी है ताकि हर क्षेत्र, हर वर्ग के लोग इसके कानूनी प्रावधानों का लाभ उठाकर अपनी शिकायतों का निवारण करा सकें.
इसके लिए सरकार द्वारा लोगों के बीच लोक शिकायत निवारण अधिनियम के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रखंड और गांव स्तर तक जन समाधान रथ चलाया जा रहा है. संबद्ध पदाधिकारी इस अधिनियम के फायदे पर बनी फिल्म और प्रचार सामग्री से लैस इन जन समाधान रथ के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें.
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