पटना : पटना के 80% नलकूप तकनीकी खामियों से ठप

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Feb 2019 8:55 AM

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प्रदेश भर में संवारे जायेंगे 9192 राजकीय नलकूप पटना : प्रदेश के राजकीय नलकूपों की दशा-दिशा ठहरने के लिए लघु जल संसाधन विभाग अब पंचायत प्रमुख मुखियाओं पर भरोसा कर रहा है. अब राजकीय नलकूपों के संचालन की जिम्मेदारी उन्हें दी जा रही है. इससे पहले विभाग ने इन नलकूपाें को संवारने को बकायदा 60 […]

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प्रदेश भर में संवारे जायेंगे 9192 राजकीय नलकूप
पटना : प्रदेश के राजकीय नलकूपों की दशा-दिशा ठहरने के लिए लघु जल संसाधन विभाग अब पंचायत प्रमुख मुखियाओं पर भरोसा कर रहा है. अब राजकीय नलकूपों के संचालन की जिम्मेदारी उन्हें दी जा रही है.
इससे पहले विभाग ने इन नलकूपाें को संवारने को बकायदा 60 करोड़ का बजट जारी कर दिया है. इस तरह प्रदेश में हजारों हेक्टेयर में ठप सरकारी सिंचाई का रास्ता साफ होने जा रहा है. जानकारी के मुताबिक लघु जल संसाधन विभाग ने अपनी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर्स के सरकारी खातों में यह राशि डाल दी है. जल्दी ही नलकूपों के सुधरवाने की कवायद शुरू कर दी जायेगी.
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जो नलकूप चालू भी हैं, वे भी जल्दी दम तोड़ सकते हैं.
बिहार में कुल 10,242 नलकूप हैं. इनमें 1050 नलकूप अब कभी नहीं बनाये जा सकते हैं. वे तकनीकी तौर पर पूरी तरह फेल हो चुके हैं. फिलहाल 9192 राजकीय नलकूपों में 4803 राजकीय नलकूप पूरी तरह ठप हो चुके हैं. पटना में कुल 650 नलकूपों में केवल 131 चालू होने का दावा किया जा रहा है. अधिकतर नलकूप विभागीय कुप्रबंधन की भेंट चढ़ चुके हैं. वहीं, पटना सहित मध्य और दक्षिण बिहार में कुप्रबंधन के अलावा नलकूप फेल होने की वजह ग्राउंड वाटर में लगातार कमी भी मुख्य वजह बतायी जा रही है.
प्रदेश सरकार ने नलकूपों के दशा दिशा सुधारने के लिए बकायदा एक रणनीति तैयार की है. इसमें वह नलकूपों के प्रबंधन का जिम्मा प्रधानों या मुखियाओं को देने जा रही है. राज्य सरकार ने फरवरी के प्रथम सप्ताह में ही इस व्यवस्था को मंजूरी दी है.
पंचायत ऐसे करेगी संचालन
– नलकूप चलाने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति करेगी
– किसानों से सिंचाई के बदले टैक्स लेगी, टैक्स की दर पंचायत तय करेगी
– किसानों को केवल 75 पैसे प्रति यूनिट सिंचाई के लिए बिजली खर्च देना होगा
अधिकारी बोले
निश्चित तौर पर पटना सहित अधिकतर जिलों में नलकूपों की दशा बेहद खराब है. इसकी कई वजह है. विभाग ने उनको संवारने की रणनीति बनायी है. हमने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर्स के खाते में 60 करोड़ से अधिक रुपये डाल कर इसे संवारने के लिए कदम उठाने को कहा है. विभाग इन नलकूपों को सुधारने का जिम्मा प्रधानों को सौंप रहा है.
विंदेश्वर राम, चीफ इंजीनियर, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार
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