पटना : असामान्य दशा के चलते पश्चिमी विक्षोभ पटना अंचल की तरफ आकर्षित, चार साल बाद फरवरी में हुई बारिश
Updated at : 09 Feb 2019 4:25 AM (IST)
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पटना : वर्ष 2014 के बाद इस साल 2019 में फरवरी माह में बारिश हुई है. पिछले 36 घंटे में पटना में करीब पांच मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है. अगले 24 घंटे तक इसी तरह रिमझिम बारिश होने का पूर्वानुमान है. हालांकि पश्चिमी विक्षोभ अब पूरी तरह उत्तरी बिहार शिफ्ट होता नजर आ रहा है. […]
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पटना : वर्ष 2014 के बाद इस साल 2019 में फरवरी माह में बारिश हुई है. पिछले 36 घंटे में पटना में करीब पांच मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है. अगले 24 घंटे तक इसी तरह रिमझिम बारिश होने का पूर्वानुमान है. हालांकि पश्चिमी विक्षोभ अब पूरी तरह उत्तरी बिहार शिफ्ट होता नजर आ रहा है.
राजधानी में शुक्रवार को सुबह से लेकर शाम तक कई बार रिमझिम बारिश हुई. करीब पांच से सात किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवा चली. इससे मौसम खुशनुमा हो गया. बदली हुई मौसमी दशाओं के प्रभाव से शुक्रवार को दिन का तापमान गुरुवार की तुलना में छह डिग्री घट कर 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
शाम को तेज और ठंडी हवा चलने से न्यूनतम तापमान में अच्छी-खासी गिरावट दर्ज की गयी. इससे पहले गुरुवार-शुक्रवार के बीच रात जबरदस्त बादल गरजे. अच्छी-खासी बारिश भी हुई. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इस दौरान रात का तापमान 16 डिग्री सेल्सियस तक पार कर गया था. इस असामान्य दशा के चलते पश्चिमी विक्षोभ पटना अंचल की तरफ आकर्षित हुआ.
मौसम अलर्ट : आज भी बारिश के आसार, 10 फरवरी से स्थिति सामान्य होगी
बिहार के संदर्भ में अगले 24 घंटे पश्चिमी विक्षोभ से प्रभावित हो सकते हैं. इसमें तेज हवा और बारिश होने की पूरी संभावना है. हालांकि 10 फरवरी से स्थिति सामान्य होने लगेगी.
फायदा : बारिश फसलों के लिए अमृत समान है. गेहूं, मक्का, सब्जी आदि फसलों के लिए यह संजीवनी है. इससे खेतों में नमी मिल जायेगी, दूसरे तापमान में भी कमी आयेगी. गन्ना और गरमा सब्जी की बुआई के लिए अब खेत आसानी से तैयार हो जायेंगे. सिंचाई पर अब कम खर्च करना होगा.
नुकसान : अरहर में आंशिक नुकसान केवल उसी शर्त पर हो सकता है, जब भारी बरसात के साथ तेज हवा चली हो, लेकिन यह तभी संभव है, जब 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली हो. हालांकि इतनी तेज हवा सभी जगह नहीं बही है. खेत में अगर पानी भर जाये, तो आलू को आंशिक नुकसान हो सकता है.
डॉ ए सत्तार, वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एवं एग्रो एक्सपर्ट,
डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर
किसान चिंतित
मौसम के बदलते मिजाज से दलहनी फसलों की सेहत बिगड़ रही है. खासकर मोकामा टाल इलाके में हजारों एकड़ में लगी मसूर में गलका रोग का खतरा है. इससे दलहन उत्पादकों के चेहरे पर मायूसी है. वहीं बाढ़ के टाल क्षेत्र में लगी मसूर की फसल को शुक्रवार को हुई बारिश के कारण नुकसान होने की संभावना है. इससे किसान परेशान हैं . रुक- रुक कर हो रही बारिश के कारण मसूर की फसल में करीब 25 प्रतिशत नुकसान होने की संभावना है.
कीचड़ से परेशान हुए लोग
शुक्रवार को बारिश के बाद शहर के विभिन्न इलाकों में किचकिच और कीचड़ से काफी परेशानी बढ़ गयी. निर्माण कार्यों के कारण शहर के प्रमुख मार्ग भी कीचड़ से भर गये. सड़कों पर नाले के पानी के साथ मिट्टी भर जाने से पूरा रास्ता खराब हो गया. कई जगहों पर जल-भराव की समस्या हो गयी.
सबसे अधिक परेशानी आर ब्लॉक मार्ग पर हुई. जीपीओ से लेकर विधानसभा तक लोग परेशानी हुई. वहीं, हड़ताली मोड़ से दारोगा राय पथ में भी बारिश के बाद समस्या हुई. करबिगहिया में भी पानी से किचकिच का सामना लोगों को करना पड़ा. निर्माण कार्य के कारण नागेश्वर कॉलोनी में पूरा सड़क मिट्टी से भर गया. मीठापुर बस स्टैंड मार्ग से लेकर बाइपास मोड़ तक लोग कीचड़ से परेशान हुए. इसके अलावा भी कई जगहों पर कीचड़ व जल जमाव की समस्या हुई.
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