अपने बच्चों को बचाइए, इस तरह से रखें ध्यान, स्मार्टफोन की लत उन्हें बना रही बीमार

Updated at : 24 Dec 2018 8:13 AM (IST)
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अपने बच्चों को बचाइए, इस तरह से रखें ध्यान, स्मार्टफोन की लत उन्हें बना रही बीमार

आनंद तिवारी पटना : शहर में स्मार्टफोन की लत स्कूल व कॉलेजों के छात्रों को बीमार बना रही है. डॉक्टरों के अनुसार इस लत से युवाओं में न केवल व्यवहार संबंधी गंभीर मनोविकृति विकसित हो रही है, बल्कि अांख व हड्डी संबंधी बीमारियां भी हो रही हैं. एक साल के अंदर शहर के प्रमुख अस्पतालों […]

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आनंद तिवारी
पटना : शहर में स्मार्टफोन की लत स्कूल व कॉलेजों के छात्रों को बीमार बना रही है. डॉक्टरों के अनुसार इस लत से युवाओं में न केवल व्यवहार संबंधी गंभीर मनोविकृति विकसित हो रही है, बल्कि अांख व हड्डी संबंधी बीमारियां भी हो रही हैं.
एक साल के अंदर शहर के प्रमुख अस्पतालों में पहुंचनेवाले ऐसे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गयी है. आइजीआइएमएस में 2017 में जहां 1080 ऐसे मरीज पहुंचे थे, वहीं इस साल जनवरी से 20 दिसंबर तक करीब 2160 ऐसे मरीज आये, जो स्मार्टफोन की लत के कारण विभिन्न तरह की परेशानियों से ग्रस्त थे. संस्थान के अलग-अलग विभागों में इनका इलाज हुआ. इनमें सबसे अधिक मनोचिकित्सा विभाग, हड्डी, नेत्र रोग विभाग में इलाज किया गया. इसके अलावा पीएमसीएच और एम्स में में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
गर्दन व रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है 4 से 27 किलो तक दबाव
स्मार्टफोन की लत से पीड़ित मरीजों में 50% बच्चे व युवा शामिल हैं. डॉक्टरों की मानें तो वाट्सअप व टिक टॉक के चलन के बाद मैसेज पढ़ने व वीडियो बनाने के लिए सिर आगे की ओर झुकाने से गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. पीएमसीएच के डॉ सुभाष कुमार झा ने बताया कि गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर पढ़ने वाला यह दबाव 4 से 27 किलो तक होता है. सात साल के बच्चे का वजन करीब 27 किलो होता है. यानी जब हम मोबाइल फोन पर कोई मैसेज देखने के लिए 60 डिग्री एंगल पर गर्दन झुकाते हैं तो गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर इतना दबाव पड़ता है कि जैसे कि हमारी गर्दन पर सात साल का बच्चा बैठा हो.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
शहर में स्मार्टफोन की लत से बीमार होनेवालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. स्मार्टफोन की अधिक इस्तेमाल से युवाओं में व्यवहार संबंधी गंभीर मनोविकृति विकसित हो रही है. इनमें ज्यादातर स्कूल व कॉलेज के छात्र हैं. बच्चों में अक्सर अवसाद, बार-बार मूड बदलना, चिंता के अलावा पढ़ाई-लिखाई में खराब प्रदर्शन की समस्या देखने को मिल रही हैं.
डॉ विवेक विशाल, मनोचिकित्सक
एक साल में आइजीआइएमएस आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या दोगुनी
सोने-चांदी का काम करने वाले राजेश अग्रवाल के बेटे मोहित के जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा था. अचानक उसकी गर्दन में दर्द महसूस होने लगा. पहले तो मोहित ने इसे नजरअंदाज किया, पर कुछ ही महीनों में समस्या इतनी बढ़ गयी कि खाना खाने व उठने-बैठने में दिक्कत होने लगी. राजेश बेटे को आइजीआइएमएस लेकर पहुंचे. डॉक्टरों के अनुसार उसे एक्यूट सर्वाइकल वटिंगो (टेक्स्ट नेक) की समस्या थी. स्मार्टफोन का अधिक इस्तेमाल करने या लैपटॉप पर ज्यादा वक्त गुजारने से टेक्स्ट नेक यानी गर्दन से जुड़ा दर्द बढ़ जाता है.
21 वर्षीय दिलीप कुमार पटना में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करता है. उसकी आंखों में अचानक जलन शुरू हुआ और पानी आने लगा. आंखें लाल और हमेशा दर्द रहता था. दिलीप आईजीआईएमएस के नेत्र रोग विभाग पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने रात में ज्यादा देर तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से मना किया. डॉक्टरों ने बताया कि दिलीप कमरे की लाइट बंद कर रात को अंधेरे में मोबाइल देखता था, जिसकी तेज किरणों से उसके कॉर्निया को नुकसान पहुंचा है.
इस तरह से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंच रहे मरीज
रिंग एनजाइटी : 30% लोगों को 30 मिनट कोई भी रिंग नहीं बजने पर तनाव हो जाता है.
नोमोफोबिया : करीब 50% लोगों को मोबाइल चोरी न हो जाये, यह भय बना रहता है.
स्टिफ नेक : मोबाइल को लगातार हाथ में इस्तेमाल करने से गर्दन में दर्द हो जाता है.
पैंटोन रिंगिंग : कभी-कभी व्यक्ति को ऐसा लगता है कि मोबाइल रिंग बज रहा है, जबकि बजता नहीं है.
चेहरे पर दुष्प्रभाव : चेहरे की त्वचा लटक जाती है. डबल चिकन की समस्या चेहरे पर हो जाती है.
इस तरह से रखें ध्यान
घर में विशेष नो फोन जोन बनाएं
फोन को ऐसी जगह रखें, जहां बच्चों का ध्यान कम जाये
स्मार्टफोन पर बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें
बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें
एम्स में खुलेगा बिहेवियर एडिक्शन क्लिनिक
स्मार्टफोन की लत के शिकार मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पटना एम्स ने अलग से बिहेवियर एडिक्शन क्लिनिक खोलने का निर्णय लिया है. इसकी स्थापना दो माह के अंदर कर दी जायेगी. इसे दिल्ली एम्स के तर्ज पर संचालित किया जायेगा. इसमें स्मार्टफोन के अनियंत्रित इस्तेमाल की लत की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों का इलाज किया जायेगा. यह क्लिनिक मानसिक रोग विभाग की देखरेख में संचालित किया जायेगा.
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