पटना : वाहन चोरों का गैंग नहीं, चलती-फिरती दुकान कहें साहब! सबका इंतजाम
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Nov 2018 4:47 AM
विजय सिंह पटना : सूबे में वाहन चोरों का गैंग चलती-फिरती दुकान की तरह काम कर रहा है. वह अपने ग्राहकों की दो पहिया, चार पहिया, लक्जरी गाड़ियां तक की डिमांड को अपनी हाथ की सफाई से पूरा कर रहा है. प्रदेश के बड़े शहरों से चोरी होने वाली लक्जरी गाड़ियां यूपी, महाराष्ट्र, कोलकाता जैसे […]
विजय सिंह
पटना : सूबे में वाहन चोरों का गैंग चलती-फिरती दुकान की तरह काम कर रहा है. वह अपने ग्राहकों की दो पहिया, चार पहिया, लक्जरी गाड़ियां तक की डिमांड को अपनी हाथ की सफाई से पूरा कर रहा है. प्रदेश के बड़े शहरों से चोरी होने वाली लक्जरी गाड़ियां यूपी, महाराष्ट्र, कोलकाता जैसे शहरों में बेची जाती हैं. सबसे ज्यादा नेपाल में गाड़ियां खपायी जाती हैं. वाहन चोरी करने वाले गैंग के पास ऐसे एक्सपर्ट भी हैं, जो वाहनों के फर्जी कागजात भी तैयार कर देते हैं. बाइकों के चेचिस नंबर का इस्तेमाल लक्जरी गाड़ियों के कागजात बनवाने में कर दिया जाता है.
ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल अपराधी तत्व कर रहे हैं. वहीं बहुत पुरानी गाड़ियों के कल-पुर्जों को अलग-अलग कर टुकड़ों में बेच दिया जाता है. बिहार-नेपाल के बाॅर्डर इलाके में बैठे गैंग के सरगना बिहार के बड़े शहरों से गाड़ियों की चोरी कराते हैं और फिर गाड़ियों को बाॅर्डर इलाके में छिपा देते हैं. फिर नेपाल के अपराधी गिरोह से सौदा करके बेच दिये जाते हैं. महंगी-से-महंगी गाड़ियां लाख दो लाख में बेची जा रही हैं.
चोरों के लिए सेफ जोन बने पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर
वाहन चोरों के लिए पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर सेफ जोन बन चुके हैं. बिहार के ये तीन शहर ऐसे हैं, जहां से सर्वाधिक गाड़ियों की चोरी हो रही है. एक साल में जितने मामले पुलिस की जीडी में दर्ज हो रहे हैं, करीब 35 प्रतिशत मामले इन तीनों शहरों के हैं. कहा जा सकता है कि बिहार के ये टॉप थ्री शहर वाहन चोरों के निशाने पर हैं.
पुलिस केस तो दर्ज कर रही है, लेकिन गाड़ी की बरामदगी करना दूर की कौड़ी साबित हो रही है. पटना पुलिस ने पिछले साल बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर व पटना से भारी संख्या में चोरी के वाहनों को जब्त किया था. मुजफ्फरपुर में एक गैरेज भी पकड़ा गया था लेकिन पुलिस इस गैंग का नेटवर्क ध्वस्त करने में अब तक सफल नहीं हो सकी है. वाहन चोरी पर अंकुश लगाने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं. पुलिस के आंकड़ों की बात करें, तो वर्ष 2015 में कुल 10,519 मामले, 2016 में कुल 11,095 मामले और 2017 में मार्च तक 3,186 मामले दर्ज हुए हैं.
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