पटना : मजदूरी करते-करते फीके पड़ गये आधार को जरूरी उंगलियों के निशान, राशन बंद

Updated at : 08 Oct 2018 8:14 AM (IST)
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पटना : मजदूरी करते-करते फीके पड़ गये आधार को जरूरी उंगलियों के निशान, राशन बंद

पटना : जिले में गरीब मेहतनकश के सामने अजीबो-गरीब स्थिति बन गयी है. दरअसल उन्हें सरकारी राशन की दुकानों से मिलने वाला खाद्यान्न महज इसलिए नहीं मिल पा रहा है कि उनके उंगलियों की रेखाएं मिट गयी हैं या धूमिल पड़ गयी हैं. इसके कारण उनके आधार नहीं बन पा रहे हैं. फिलहाल फिंगर प्रिंट […]

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पटना : जिले में गरीब मेहतनकश के सामने अजीबो-गरीब स्थिति बन गयी है. दरअसल उन्हें सरकारी राशन की दुकानों से मिलने वाला खाद्यान्न महज इसलिए नहीं मिल पा रहा है कि उनके उंगलियों की रेखाएं मिट गयी हैं या धूमिल पड़ गयी हैं. इसके कारण उनके आधार नहीं बन पा रहे हैं.
फिलहाल फिंगर प्रिंट की नाकामी के चलते आधार बनाने वाली एजेंसियां उन्हें टरका देती हैं. लिहाजा उनके राशन कार्ड पर उठाव नहीं हो पा रहा है. आधार न बनने के चलते राशन उठाव से वंचित रह रहे लोगों की संख्या हजारों में है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक लोगों को होने वाली परेशानी में दो तरह के कारण सामने आ रहे हैं.
पहली बात को जांच के नाम पर हटाये गये लगभग 12 लाख राशन कार्डधारियों में से लगभग 90 फीसदी उपभोक्ताओं को नया कार्ड अब तक नहीं बन पाया है. वहीं दूसरी समस्या है कि जनवितरण प्रणाली के दुकानदार गोदामों से समय पर अनाज का उठाव ही नहीं कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार बीते दिनों प्रशासन की छापेमारी के बाद बरामद अवैध रूप से भंडार किये गये अनाज से कई दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की गयी थी. इसके बाद से दुकानदारों ने समय से उठाव करना बंद कर दिया है. वहीं, इसको लेकर डीएम ने कार्रवाई भी की है.
आधार से नहीं लिंक हो रहा राशन कार्ड
पहले जिले में लगभग 40 लाख से अधिक राशन कार्डधारी थे. जिन्हें जांच को बीते दो वर्ष पहले 12 लाख से अधिक राशन कार्डधारियों के नाम को हटा दिया गया था. इनके राशन कार्ड रद्द कर दिये गये थे. तब से अब तक एक लाख 20 हजार लोगों ने नये राशन कार्ड बनवाने को आवेदन किया है. इसमें 22 हजार से अधिक पटना सदर अनुमंडल यानी शहर का मामला है. बीते दो वर्ष में 30 हजार के करीब आवेदकों के ही नये कार्ड बन पाये हैं. बाकी जांच के आधार पर आवेदनों को रद्द कर दिया गया है.
जानकारी के अनुसार राशन कार्ड से आधार को लिंक करने में लोगों को परेशानी आयी है. राशन कार्डधारी यूनियन के दशरथ पासवान के अनुसार मजदूरों के ऊंगलियों की रेखाएं मिट जाती है. इस कारण उनका आधार ठीक से लिंक नहीं हो पा रहा है. इस कारण से प्रशासन ने उनके राशन कार्ड को रद्द कर दे रहा है. इससे लोगों को परेशानी हो रही है.
पांच लाख क्विंटल अनाज का होता है उठाव
जिले में लगभग प्रतिमाह पांच लाख क्विंटल अनाजका उठाव किया जाता है. इसमें तीन लाख क्विंटल चावल और दो लाख क्विंटल के करीब गेहूं का उठाव किया जाता है. भंडारण के लिये जिले में 21 बड़े गोदाम हैं. वहीं, राशन का वितरण प्रति यूनिट के अनुसार किया जाता है.
एक व्यक्ति का मतलब एक यूनिट है. एक यूनिट में दो किलो गेहूं व तीन किलो चावल का वितरण होता है. राशन दुकान में गेहूं दो रुपये व तीन रुपये चावल प्रति किलो दिया जाता है. वर्तमान स्थिति ऐसी की आधे से अधिक दुकानदारों ने अब तक अपने क्षेत्र में राशन का वितरण नहीं किया है. वहीं, इन दिनों प्रशासन स्तर से जांच भी नहीं की जा रही है. इस कारण गरीब लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
दुकानदार समय पर राशन का उठाव नहीं कर रहे हैं. इस कारण उन पर कार्रवाई की जा रही है. वहीं, जांच के बाद नये आवेदकों को राशन कार्ड देने का काम किया जा रहा है. सुविधा के लिए पुराने आवेदन की जांच के बाद फिर से नये आवेदन को लिया जाना शुरू किया जायेगा.
—कुमार रवि, जिलाधिकारी
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