पटना : बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी फ्रीज कर साइबर क्रिमिनल खंगाल रहे एकाउंट

Updated at : 05 Oct 2018 8:32 AM (IST)
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पटना : बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी फ्रीज कर साइबर क्रिमिनल खंगाल रहे एकाउंट

विजय सिंह पटना : साइबर क्रिमिनल की सक्रियता ने बैंक ट्रांजेक्शन में ऐसा दखल किया है कि खाताधारक को हवा नहीं लगती और पैसे बैंक एकाउंट से निकल जाते हैं. कोई कॉल नहीं, कोई संपर्क नहीं फिर भी हैकर्स बैंक खाता को हैक करके खाताधारकों को कंगाल बना दे रहे हैं. सूबे में प्रतिदिन ऐसी […]

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विजय सिंह
पटना : साइबर क्रिमिनल की सक्रियता ने बैंक ट्रांजेक्शन में ऐसा दखल किया है कि खाताधारक को हवा नहीं लगती और पैसे बैंक एकाउंट से निकल जाते हैं. कोई कॉल नहीं, कोई संपर्क नहीं फिर भी हैकर्स बैंक खाता को हैक करके खाताधारकों को कंगाल बना दे रहे हैं. सूबे में प्रतिदिन ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं. बैंक ऐसे मामले में पहले ही हाथ खड़ा कर ले रहा है. वहीं, थाने पर तो पहले केस नहीं दर्ज हो रहे हैं. साइबर एक्सपर्ट नहीं होने से इस मामले की जांच नहीं हो पा रही है. जो मामले एसएसपी या किसी बड़े अधिकारी द्वारा साइबर सेल को ट्रांसफर किये जा रहे हैं.
ऐसे फ्रॉड को कहते हैं मॉस्किंग फ्राॅड
जब भी बैंक अकाउंट से पैसे निकालते हैं तो आपके ई-मेल और मोबाइल पर इसकी सूचना आ जाती है. इसके अलावा बैंक अकाउंट स्टेटमेंट में भी इसके बारे में पता चल जाता है.
लेकिन, अब हैकर्स ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है. वे अकाउंट बैलेंस और ट्रांजेक्शन से जुड़ी जानकारी को फ्रीज कर देते हैं और एकाउंट से पैसा निकाल लेते हैं. ऐसे फ्रॉड को मॉस्किंग फ्राॅड कहते हैं.
हैकर्स आपके क्रेडिट कार्ड से बिना जानकारी के आपके अकाउंट से पैसा निकाल लेते हैं. शुरुआत में आपके अकाउंट से एक डॉलर का छोटा सा एमाउंट निकाला जाता है, जो कि भारतीय रुपये में 70-72 के आसपास होती है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह रकम आपके क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट में एक्सट्रा चार्ज के रूप में दिखाई देता है जिसे खाताधारक समझ नहीं पाते हैं. उनको लगता है कि बैंक ने कोई चार्ज काट लिया है. ऐसा करके हैकर्स यह जानकारी लेते हैं कि आपका क्रेडिट कार्ड प्रयोग में है या नहीं.
रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल से हो रही है कार्ड क्लोनिंग
ओटीपी कोड मंगाने के लिए सिम कार्ड ब्लॉक करके नया सिम कार्ड कर देते हैं एक्टिवेट : ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजेक्शन करने से पहले बैंक की तरफ से आपको ओटीपी कोड भेजा जाता है. हैकर्स आपके सिम कार्ड, बैंक अकाउंट की डिटेल्स और किसी भी आईडी प्रूफ को पाने का प्रयास करते हैं.
जब उनको आपके सिम कार्ड की डिटेल्स और आईडी प्रूफ मिल जाती है, तो वह आपके सिम को ब्लॉक करा देते हैं और नया सिम एक्टीवेट कर लेते हैं. जब तक सिम का ब्लॉक होने का पता चलता है, उससे पहले हैकर्स आपके अकाउंट से पैसा निकाल लेते हैं.
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