12 घंटे की हड़ताल पर रहे डॉक्टर, कई बिना इलाज लौटे, ऑपरेशन भी टले

Updated at : 29 Jul 2018 1:21 AM (IST)
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12 घंटे की हड़ताल पर रहे डॉक्टर, कई बिना इलाज लौटे, ऑपरेशन भी टले

पटना : केंद्र सरकार इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को खत्म कर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल लोकसभा में ला रही है. इस बिल के खिलाफ शनिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर बिहार चैप्टर के डॉक्टरों ने हड़ताल की. हड़ताल में शामिल डॉक्टरों ने पूरे दिन सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद करा […]

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पटना : केंद्र सरकार इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को खत्म कर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल लोकसभा में ला रही है. इस बिल के खिलाफ शनिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर बिहार चैप्टर के डॉक्टरों ने हड़ताल की. हड़ताल में शामिल डॉक्टरों ने पूरे दिन सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद करा दी. मरीज बिना इलाज कराये घर लौटने को मजबूर हुए. कई मरीजों के ऑपरेशन भी टल गये. हड़ताली डॉक्टरों की टीम सुबह 10 बजे बजे पीएमसीएच पहुंची और ओपीडी को बंद कराना शुरू कर दिया. यहां केवल एक घंटे चले ओपीडी में सिर्फ 610 मरीजों का ही इलाज किया जा सका. वहीं 1500 मरीजों का इलाज नहीं किया जा सका. पीएमसीएच अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि एक घंटे तक ओपीडी को चलाया गया. इस दौरान केवल 610 मरीजों का इलाज किया जा सका. एनएमसीएच समेत कई सरकारी अस्पतालों में यही हाल रहा.

इमरजेंसी व प्रसूति सेवा नहीं रही बाधित
पीएमसीएच के पर्ची काउंटर पर मरीजों की लाइन सुबह 8:00 बजे से ही लगने लगी थी. वहीं, डॉक्टर भी नौ बजे अपने-अपने चैंबर में बैठ गये थे.उन्होंने मरीजों को देखना शुरू कर दिया. ओपीडी में डॉक्टर केवल एक घंटे तक मरीज देख सके. इसके बाद हड़ताली डॉक्टर पीएमसीएच में पहुंच गये. वहां उन्होंने ओपीडी बंद करना शुरू कर दिया. हड़ताली डॉक्टर सुबह 10 बजे से दोपहर बाद दो बजे तक पीएमसीएच परिसर में जमे रहे, जिससे 10 बजे के बाद ओपीडी में एक भी मरीज की जांच नहीं हो सकी. इससे मरीज पर्ची कटवाने के बाद बिना डॉक्टर से दिखाये घर लौटने को मजबूर हुए. हालांकि, हड़ताली डॉक्टरों ने इमरजेंसी व प्रसूति सेवा को प्रभावित नहीं किया. इससे दोनों जगहों पर मरीजों का इलाज किया गया.
एनएमसीएच भी बाधित ठप रहा ओपीडी
पटना सिटी : केंद्र सरकार की ओर से लायी जा रही एनएमसी एक्ट के खिलाफ शनिवार को नालंदा मेडिकल कॉलेज के सीनियर व जूनियर चिकित्सक भी 12 घंटे की सांकेतिक हड़ताल पर रहे. हालांकि, सुबह में कुछ देर के लिए सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में कामकाज किया, लेकिन दस बजे जूनियर डॉक्टरों ने काम ठप करा दिया. पंजीयन काउंटर को बंद
करा दिया गया. ओपीडी व ओटी में भी काम रुकवा दिया. इस कारण सर्जरी, आॅर्थो, इएनटी व महिला प्रसूति विभागों में लगभग दो दर्जन से अधिक मरीजों के आॅपरेशन टाल दिये गये. ओपीडी में भी कामकाज बाधित रहा. हालांकि, अस्पताल की इमरजेंसी व महिला प्रसूति विभाग के इमरजेंसी में काम चलता रहा. जूनियर डॉक्टरों के साथ आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सहजानंद प्रसाद, उपाध्यक्ष डॉ अजय कुमार व डॉ हरिहर दीक्षित भी प्रदर्शन में शामिल हुए. आंदोलन के बाद जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल के अधीक्षक डॉ चंद्रशेखर से मिल कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा और अस्पताल में संसाधन की कमी से अवगत कराया.
सरकारी अस्पतालों में बंद रहा ओपीडी
आईएमए के हड़ताल में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ, दंत चिकित्सा संघ, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और बिहार चिकित्सा शिक्षा संघ आदि शामिल थे. इससे आईजीआईएमएस, गार्डिनर हॉस्पिटल, गर्दनीबाग हॉस्पिटल, राजवंशी नगर हॉस्पिटल, राजेंद्र नगर हॉस्पिटल आदि में ओपीडी बंद किया गया. आईएमए बिहार चैप्टर के अध्यक्ष डॉ सहजानंद प्रसाद सिंह व डॉ ब्रज नंदन कुमार ने बताया कि हड़ताल राजधानी सहित पूरे प्रदेश में सफल रहा है. हड़ताल के दौरान शत-प्रतिशत ओपीडी को बंद किया गया.
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