कौआकोल में बाबा कहरसेली की वार्षिक उत्सव पर उमड़ा जनसैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने टेका माथा

Author Dashrath mistri|Edited by Vikash Jha
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बाबा कहरसेली की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network

नवादा जिले के लालपुर पंचायत में स्थित बाबा कहरसेली धाम में वार्षिक उत्सव धूमधाम से मनाया गया. हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की और अपनी मन्नतें मांगी. यह प्राचीन पूजा जमींदारी काल से चली आ रही है.

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Nawada News: नवादा जिले के कौआकोल प्रखंड अंतर्गत लालपुर पंचायत के घने जंगलों में स्थित बाबा कहरसेली धाम में बुधवार को पारंपरिक श्रद्धा,आस्था और उत्साह के साथ वार्षिक उत्सव लोगों ने मनाया. आषाढ़ माह में आयोजित होने वाली इस प्राचीन पूजा में कौआकोल,जमुई,शेखपुरा,नालन्दा,लक्खीसराय तथा सीमावर्ती झारखंड से हजारों श्रद्धालु पहुंचे और बाबा के दरबार में माथा टेक कर पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की.

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स्थानीय लोगों के अनुसार बाबा कहरसेली की यह पूजा जमींदारी काल से चली आ रही है. प्रत्येक वर्ष कि भांति इस वर्ष भी आषाढ़ माह में बाबा कहरसेली का अनुष्ठान आयोजन किया गया है. मान्यता है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुरादें अवश्य पूरी होती है. इसी आस्था के चलते कई श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नत पूरी होने पर परंपरा के अनुसार सफेद पाठे (बकरे) की बलि भी अर्पित की है.

बता दें कि प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर तथा लालपुर गांव से दक्षिण दिशा में करीब 6 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बाबा कहरशेली का पिंड स्थित है. वहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को दुर्गम पहाड़ी और जंगल के पगडंडियों के सहारे पैदल यात्रा करनी पड़ती है. कठिन मार्ग होने के बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

पूजा के दौरान पूरे जंगल क्षेत्र में भक्तिमय माहौल देखने को मिला है. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हुए नारियल, अगरबत्ती और प्रसाद चढ़ाया तथा परिवार की सुख-शांति और अच्छी वर्षा की कामना की है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पहली अच्छी बारिश के बाद होने वाला यह वार्षिक आयोजन क्षेत्र की सबसे प्राचीन धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है.

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े बाबा कहरसेली धाम के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है. प्रशासनिक सुविधाओं के अभाव और कठिन रास्ते के बावजूद हर वर्ष यहां श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है,जो इस प्राचीन स्थल की लोकआस्था और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है.


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