पुस्तकों के प्रति छात्रों की रुचि जगाने की जरूरत

Published at :19 Jun 2015 9:59 AM (IST)
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पुस्तकों के प्रति छात्रों की रुचि जगाने की जरूरत

हिसुआ: इंटर विद्यालयों में लाइब्रेरियनों की नियुक्ति व पुस्तकों की उपलब्धता के बाद भी पुस्तकालयों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. स्टूडेंट्स में पुस्तकालय का लाभ लेने और पुस्तकें पढ़ने की रुचि नहीं जगी है. क्षेत्र के सबसे समृद्ध और अधिक विद्यार्थियों वाले इंटर विद्यालय, हिसुआ में 10 मार्च 2015 के बाद पुस्तकों का […]

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हिसुआ: इंटर विद्यालयों में लाइब्रेरियनों की नियुक्ति व पुस्तकों की उपलब्धता के बाद भी पुस्तकालयों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. स्टूडेंट्स में पुस्तकालय का लाभ लेने और पुस्तकें पढ़ने की रुचि नहीं जगी है. क्षेत्र के सबसे समृद्ध और अधिक विद्यार्थियों वाले इंटर विद्यालय, हिसुआ में 10 मार्च 2015 के बाद पुस्तकों का वितरण होने का विवरण नहीं मिलता है.
इंटर के विद्यार्थियों में पुस्तक ले जाने व पढ़ने का ब्योरा अब तक दर्जनों में ही है. जबकि, इंटर के पाठय़क्रम की पुस्तकों की संख्या लाइब्रेरी में जरूरत के अनुसार अच्छी है. नौवीं व 10वीं के पाठय़क्रम की पुस्तकें लाइब्रेरी में नहीं हैं, पर उनके बीच ही पुस्तक अधिक बंटने का ब्योरा मिलता है. जीवनी और अन्य तरह की पुस्तकें ले जाने का विवरण अंकित है.
लाइब्रेरी की स्थिति से पता चलता है कि यह यदा-कदा ही यह खुलता होगा. एक छोटे और संर्कीण कमरे में लाइब्रेरी है. जिसमें 10 स्टूडेंट्स भी ठीक से इसमें खड़ा नहीं हो सकते हैं. जिस इंटर विद्यालय में दो हजार से अधिक स्टूडेंट्स पढ़ते हो वहां एक आठ बाई 10 के संर्कीण कमरे में पुस्तकालय का होना कितना युक्तिसंगत है. लाइब्रेरी में नियमित रूप से तीन दैनिक अखबार व दो मासिक पत्रिका आने की बातें बतायी गयी.
पर दैनिक अखबार का लाभ केवल शिक्षकों को ही मिल पाता है. पत्रिका की स्थिति बताती है कि इसे किसी विद्यार्थी ने इसे उलटा नहीं. पुस्तकालय की पंजीयों का गहन अवलोकन करने से पुस्तकों के वितरण की स्थिति की खानापूर्ति होने की बात झलकती है.
पुस्तकालय की स्थिति
वर्ष 2006 तक पुस्तकालय में 1860 पुस्तक होने का विवरण दर्ज है. पर, प्रभार देते समय कुल 500 पुस्तकें ही रख-रखाव करने लायक स्थिति में मिली. 2009 में 1082 पुस्तकें और लाइब्रेरी को प्राप्त हुई. पहले सहायक शिक्षक ही लाइब्रेरी के इंचार्ज होते थे. पुस्तकालयाध्यक्ष की नियुक्ति 2010 में हुई. उनके आने के बाद इसकी स्थिति और रखरखाव में सुधार हुआ. अभी पुस्तकालय में कुल 4015 पुस्तकें हैं. जिसमें 2014 में 36 पुस्तकें शिक्षा विभाग के पुस्तक मेले से खरीदी गयी. 198 पुस्तकें विभाग से भेजी गयी व 97 पुस्तकें एमपी फंड से आया है.
कई विसंगतियां भी
छोटे और संकरे कमरे में पुस्तकालय का होना. छात्र-छात्राओं को बैठ कर पढ़ने की सुविधा नहीं है. बड़े कमरे की जरूरत. सभी संसाधन होते हुए समय पर पुस्तकालय नहीं खुलता है. पुस्तकालयाध्यक्ष को विद्यालय के अन्य कामों में लगाया जाना. विद्यार्थियों में पुस्तक पढ़ने के प्रति प्रेरणा जगाने का काम नहीं होता है. पुस्तकों की कमी. विद्यालय में नवमी और दसवीं कक्षा के पाठय़क्रम की पुस्तकें मौजूद नहीं है. शिक्षा विभाग द्वारा साहित्य संस्कृति सहित अन्य तरह की पुस्तकों को अधिक संख्या में मुहैया कराया जाना.
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