अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद

सिगरेट पर वैट में वृद्धि से अंतरराज्यीय तस्कर गिरोह को मिला बढ़ावा नवादा : सिगरेट पर वैट की दर बढ़ाये जाने से अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हो गयी है. तस्करों ने अंतरराज्यीय गिरोहों के जरिये दूसरे प्रदेशों से बिहार के विभिन्न जिलों में सिगरेट मंगवाने शुरू कर दिये हैं. इन दिनों समेकित जांच चौकी, […]
सिगरेट पर वैट में वृद्धि से अंतरराज्यीय तस्कर गिरोह को मिला बढ़ावा
नवादा : सिगरेट पर वैट की दर बढ़ाये जाने से अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हो गयी है. तस्करों ने अंतरराज्यीय गिरोहों के जरिये दूसरे प्रदेशों से बिहार के विभिन्न जिलों में सिगरेट मंगवाने शुरू कर दिये हैं.
इन दिनों समेकित जांच चौकी, रजौली सहित झारखंड से जिले की जुड़ी जिले की सड़कों से तस्कर गिरोह सक्रिय हैं.
इससे न सिर्फ सरकार को प्रतिमाह करोड़ों का नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे जुड़े कारोबारियों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गयी है. पहली बार जून 2012 में राज्य सरकार ने 13.5 फीसदी के वैट दर को बढ़ा कर 20 प्रतिशत कर दिया. अप्रैल 2013 में वैट के दर को 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत कर दी गयी.
और मई 2013 में 15 प्रतिशत का अधिभार लागू किया गया. इस तरह सिगरेट पर वैट के दर 13.5 फीसदी से बढ़ कर 34.5 फीसदी हो गया है. जो सिगरेट कंपनियों में अप्रत्याशित रूप से 155 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की. यह बढ़ोतरी सिगरेट कारोबार को हाशिये पर ले आया है.
दीगर तो यह कि इस बढ़ोतरी में ही अंतरराज्यीय तस्करों को अवैध कारोबार का मौका दिया. लिहाजा सूबे के सभी समेकित जांच चौकियां और वैसे सड़क मार्ग जो दूसरे प्रदेशों से जुड़े हैं तस्करी का माध्यम बना है.
धंधे से जुड़े सैकड़ों युवक
राज्य सरकार ने अवैध शराब निर्माण पर नियंत्रण के लिए गांव स्तर तक शराब की दुकानें खुलवायी. जिसका एक मात्र मकसद सरकारी राजस्व की बढ़ोतरी और उपभोक्ताओं को जहरीले शराब से बचाना था.
पर सिगरेट के मामले में सरकार का पासा पलट गया. वैट के बहाने राजस्व की वसूली का परिणाम यह हुआ कि अब सिगरेट का कारोबार तस्करों के हाथों में चला गया. जानकारी के अनुसार, बिहार में लगभग 3 लाख से ज्यादा लोग सिगरेट का कारोबार में लगे हैं. जिले के सैकड़ों युवक इस धंधे से जुड़ गये हैं.
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