समस्या से छुटकारा नहीं

Published at :09 May 2014 6:49 AM (IST)
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समस्या से छुटकारा नहीं

हिसुआ : गरमी में आम आदमी की सबसे बड़ी जरूरत बिजली व पानी की है. पानी प्यास बुझाने से लेकर दैनिक जीवन की बड़ी जरूरत है. वहीं, बिजली भी राहत देने का सबसे बड़ा साधन पर, जिले के हिसुआ जैसे समृद्ध क्षेत्र में इन दोनों बुनियादी जरूरतों का हल अब तक नहीं निकल पाया है. […]

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हिसुआ : गरमी में आम आदमी की सबसे बड़ी जरूरत बिजली व पानी की है. पानी प्यास बुझाने से लेकर दैनिक जीवन की बड़ी जरूरत है. वहीं, बिजली भी राहत देने का सबसे बड़ा साधन पर, जिले के हिसुआ जैसे समृद्ध क्षेत्र में इन दोनों बुनियादी जरूरतों का हल अब तक नहीं निकल पाया है. गरमी में दोनों समस्याएं क्षेत्र के लोगों के लिए अभिशाप बन जाती है और लोग इसे ङोलने पर मजबूर होते हैं. विकास के इस दौर में जब इन दो बुनियादी जरूरतों से निजात नहीं मिल पाये तब विकास पर प्रश्न चिह्न् लग जाता है.

कई दशकों से है समस्या

शहरी और ग्रामीण इलाकों में चालू इक्का-दुक्का चापाकल भी जवाब दे जाते हैं. समृद्ध लोग तो पानी का हल निकाल लेते हैं. पर, निम्न तबके के लोगों को पूरी गरमी पानी की कमी ङोलनी पड़ती है. पहाड़ी इलाके सोनसा, सीहिन, दोना, कैथिर, तुंगी, मंझवे आदि में पीने के पानी पर भी आफत आ जाती है. शहर में दलित मुहल्लों में सबसे खराब हाल है. क्षेत्र में एक भी जलापूर्ति योजना चालू नहीं हैं. मंझवे व सोनसा आदि का प्रस्तावित नलकूप योजना खटाई में है. पुराने कई नलकूप बेकार हैं. चापाकलों की समुचित मरम्मत का काम नहीं होता है. पीएचइडी सहित अन्य विभागों से केवल खानापूर्ति हो रही है.

दो घंटे मिलती है बिजली

गरमी में क्षेत्र में सबसे कम बिजली मिलती है. दो-दो, तीन-तीन दिनों तक बिजली गायब रहती है. 24 घंटे में एक या दो घंटे ही बिजली मिल पाती है. इसके अलावा क्षेत्र में तार कटवा गिरोह भी सक्रिय रहता है. गरमी में ही बार-बार तार कटता है. 10 साल से उप केंद्र में संसाधनों की कमी है. ब्रेकर खराब पड़े हैं. उप केंद्र के मेनटेंस का कोई काम नहीं हुआ है.

क्षेत्र में तार-पोलों की व्यवस्था लचर है. उप केंद्र में फ्यूज बनाने तक का तार नहीं रहता है. इंसुलेटर, पीन, दास्ताने, टूल्स आदि तो दूर की बात है. क्षेत्र के सभी फीडरों को एक साथ चलाने की व्यवस्था नहीं हुई है. बांट-बांट कर आपूर्ति की जाती है.

जनप्रतिनिधियों का कोरा आश्वासन

दोनों जरूरतों को पूरा करने में जनप्रतिनिधियों का कोरा आश्वासन ही जनता को मिलता रहा है. सांसद, विधायक, नगर अध्यक्ष, वार्ड पार्षद व मुखिया किसी भी स्तर से इसे प्राथमिकता देकर काम करने या कराने की पहल नहीं करते हैं. जनता इसे ङोल रही है. तार कटने, लचर व्यवस्था सुधारने, फीडरों व ब्रेकरों को बनाने सहित समुचित आपूर्ति का कोई ठोस हल नहीं निकाला गया. मुद्दा केवल चुनाव में उठा और मुद्दा बन कर ही रह गया. इस गरमी में फिलवक्त एक या दो घंटे बिजली मिल रही है. रविवार को बड़ैल के पास और सोमवार को नारदीगंज क्षेत्र में तार कटा है. जनप्रतिनिधि व पुलिस प्रशासन के पास इसका कोई हल नहीं है, समस्या सालों से है.

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