शाम 7: 37 बजे के बाद भद्रा खत्म होने पर करें होलिका दहन, आयेगी समृद्धि

Updated at : 27 Feb 2018 5:17 AM (IST)
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शाम 7: 37 बजे के बाद भद्रा खत्म होने पर करें होलिका दहन, आयेगी समृद्धि

नवादा : होली का त्योहार आमतौर पर दो दिनों का होता है़ पहले दिन होलिका दहन होता है़ उसके अगले दिन रंगोत्सव होता है़ शास्त्रों के नियमानुसार होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि में करना चाहिए़ इस साल एक मार्च को सुबह आठ बज कर 58 मिनट से पूर्णिमा तिथि की शुरुआत हो रही […]

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नवादा : होली का त्योहार आमतौर पर दो दिनों का होता है़ पहले दिन होलिका दहन होता है़ उसके अगले दिन रंगोत्सव होता है़ शास्त्रों के नियमानुसार होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि में करना चाहिए़ इस साल एक मार्च को सुबह आठ बज कर 58 मिनट से पूर्णिमा तिथि की शुरुआत हो रही है़ इसके साथ भद्रा भी लगा होगा़ ऐसा नियम है

कि भद्रा काल में होलिका दहन नहीं करना चाहिए़ इससे अशुभ फल प्राप्त होता है़ शाम में सात बज कर 37 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जायेगा़ इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा़ वैसे शास्त्रों में बताये गये नियमों के अनुसार इस साल होलिका दहन के लिए बहुत ही शुभ स्थिति बनी है़ धर्मसिंधु नामक ग्रंथ के अनुसार होलिका दहन के लिए तीन चीजों का एक साथ होना बहुत ही शुभ होता है़ पूर्णिमा तिथि, प्रदोष काल और भद्रा न लगा हो़ इस साल होलिका दहन पर ये तीनों संयोग बन रहे हैं, इसलिए होली आनंददायक रहेगी़

रंग-अबीर लाता है निखार
जानकारों का कहना है कि शुक्रगुजार होना चाहिए कि उन्होंने वैज्ञानिक दृ़ष्टि से बेहद उचित समय पर होली मनाने की शुरुआत की थी. लेकिन, होली की मस्ती इतनी अधिक होती है कि लोग इसके वैज्ञानिक कारणों से अंजान रहते हैं़ इस मौसम में बजाया जाने वाला संगीत में तेज होता है़ इससे मानवीय शरीर को नयी ऊर्जा मिलती है़ रंग और अबीर (शुद्ध रूप में) जब शरीर पर डाला जाता है,
तो इसका उस पर अनोखा प्रभाव होता है़ शरीर पर ढाक के फूलों से तैयार किया गया रंगीन पानी, विशुद्ध रूप में अबीर और गुलाल डालने से शरीर पर इसका सुकून देने वाला प्रभाव पड़ता है और यह शरीर को ताजगी देता है़ गुलाल या अबीर शरीर की त्वचा को उत्तेजित करते हैं स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है़ सुदंरता में भी निखार आता है.परंपरा के अनुसार जब लोग जलती होलिका की परिक्रमा करते हैं, तो होलिका की ताप शरीर और आसपास के पर्यावरण में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है़ इस प्रकार यह शरीर तथा पर्यावरण को स्वच्छ करता है़
होलिका की राख से बेहतर होता है स्वास्थ्य
जिस प्रकार होली मनायी जाती है, उससे यह अच्छे स्वस्थ को प्रोत्साहित करती है़ होलिका दहन के बाद लोग होलिका की बुझी आग की राख को माथे पर विभूति के तौर पर लगाते हैं और अच्छे स्वास्थ्य के लिए वह चंदन तथा हरी कोंपलों और आम के वृक्ष के बोर को मिला कर उसका सेवन करते हैं़ हमारे शरीर में किसी रंग विशेष की कमी कई बीमारियों को जन्म देती है और जिनका इलाज केवल उस रंग विशेष की आपूर्ति करके ही किया जा सकता है़
पारंपरिक होलिका दहन में जुटता है मारवाड़ी समाज
नगर के सब्जी बाजार में हर साल होलिका दहन के दौरान मारवाड़ी समाज की महिलाएं पारंपरिक लाल जोड़े में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा कर होलिका दहन करने की परंपरा को निभाती हैं. इसके बाद महिलाएं होली के गीत गाते हुए झूमती नजर आती हैं. उनके साथ पुरुष और बच्चे परिक्रमा कर तिलक लगाने व प्रसाद ग्रहण करते हैं. इस नजारा को देखने के बाद होली का एक अलग ही उमंग नजर आता है़ समाज की महिलाएं रिंकू झुनझुनवाला, रीतू अग्रवाल, दीपा अग्रवाल, पुष्पा अग्रवाल आदि ने कहा कि इस बार भी होलिका दहन और होली को लेकर विशेष तैयारी की गयी है.
जहां-तहां नहीं करें होलिका दहन
गोबर के बड़बुले (गोबर के विशेष खिलौने), उपले, घास-फूस इत्यादि होली के डंडे (जो अरंडी की लकड़ी के होता हैं) के आसपास जमा किया जाता है़ होलिका दहन में स्थान का भी महत्व है़ आजकल सड़क या चौराहे पर होलिका दहन किया जाता है. यह गलत है़ होलिकाग्नि से सड़क का वह भाग जल जाता है तथा वहां गड्ढ़ा पड़ जाता है. इससे वाहनों के दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है़ इससे लोगों को बचना चाहिए़
चांदी के डिब्बों में रखें होलिका की राख
होली के भस्म का बड़ा महत्व है़ इसे चांदी की डिब्बे में भर कर घर में रखा जाता है़ इसे लगाने से प्रेतबाधा, नजर लगने से इससे छुटकारा मिलता है़ होली की रात तांत्रिक सिद्धियां तथा मंत्रादि सिद्ध करने के लिए अत्यंत शुभ दिन मानते हैं़ जो भी मंत्र इत्यादि सिद्ध करना हो, उसे यथाशक्ति संकल्प लेकर आवश्यक वस्तुएं एकत्रित कर, किसी विद्वान व्यक्ति के मार्गदर्शन के अनुसार कार्य करना चाहिए.
इस विधि से करें पूजा, खुशहाल होगा जीवन
कब करें पूजन : प्रदोषकाल में होलिका दहन शास्त्र सम्मत है, तभी पूजा करें़
प्राय: महिलाएं पूजन कर ही भोजन ग्रहण करें
पूजन सामग्री : रोली, कच्चा सूत, पुष्प, हल्दी की गांठें, खड़ी मूंग, बताशे, मिष्ठान्न, नारियल, बड़बुले आदि़
विधि : यथाशक्ति संकल्प लेकर गोत्र-नामादि का उच्चारण कर पूजा करें.
सबसे पहले गणेश व गौरी इत्यादि का पूजन करें. ओम् होलिकायै नम: से होली का पूजन करें, ओम् प्रह्लादाय नम: से प्रह्लाद का पूजन करें, ओम् नृसिंहाय नम: से भगवान नृसिंह का पूजन करें, तत्पश्चात अपनी समस्त मनोकामनाएं कहें व गलतियों के लिए क्षमा मांगें. कच्चा सूत होलिका पर चारों तरफ लपेट कर तीन परिक्रमा कर लें. अंत में लोटे का जल चढ़ा कर कहें-ओम् ब्रह्मर्पणमस्तु़
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