हादसे में मौत की खबर सुनकर गमगीन रामाकांत का परिवार.

Updated at : 22 Nov 2016 6:09 AM (IST)
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हादसे में मौत की खबर सुनकर गमगीन रामाकांत का परिवार.

आज गांव आयेगा मृतक रामाकांत का शव यजमान के साथ महाकालेश्वर का दर्शन करने गये थे रामाकांत, आज घर आयेगा सदमें में हैं रामाकांत के परिजन, गम में खाना नहीं खा रहे सिंघौल के ग्रामीण, नहीं जला चूल्हे सरमेरा (नालंदा) : यूपी के पोखरावां में हुए ट्रेन हादसे में सरमेरा थाना क्षेत्र के सिंघौल निवासी […]

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आज गांव आयेगा मृतक रामाकांत का शव

यजमान के साथ महाकालेश्वर का दर्शन करने गये थे रामाकांत, आज घर आयेगा
सदमें में हैं रामाकांत के परिजन, गम में खाना नहीं खा रहे सिंघौल के ग्रामीण, नहीं जला चूल्हे
सरमेरा (नालंदा) : यूपी के पोखरावां में हुए ट्रेन हादसे में सरमेरा थाना क्षेत्र के सिंघौल निवासी रामाकांत त्रिवेदी की मौत के बाद परिवार सहित गांव में मातम पसरा हुआ है. परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है. मृतक रामाकांत की पत्नी 45 वर्षीया पुष्पा देवी पति की मौत की खबर सुन कर बेहोश हैं. उनकी भी तबीयत बिगड़ गयी है. इस घटना से आहत गांव वाले खबर सुनने के बाद से खाना नहीं खाये हैं. गांव में अब तक चूल्हा नहीं जला है. मृतक रामाकांत त्रिवेदी के छोटे पुत्र नंदन कुमार ने रुंधे गले से घटना की जानकारी देते हुए
बताया कि उसके पिता अपने यजमान बरबीघा के डाॅ भुनेश्वर प्रसाद व उनके पोते उत्तम कुमार के साथ महाकालेश्वर का दर्शन करने उज्जैन गये थे. वहां से वे इंदौर-पटना एक्सप्रेस से लौट रहे थे. नंदन ने बताया कि पिता जी के शव को लाने के लिए उसका बड़ा भाई शिवजी त्रिवेदी एवं चाचा राधाकांत त्रिवेदी यूपी गये हैं. वहां से एंबुलेंस से शव को लाया जा रहा है. नंदन संभावना व्यक्त की है कि मंगलवार की अहले सुबह तक पिता जी का शव गांव सिंघौल पहुंच जायेगा. यूपी के अकबरपुर से एंबुलेंस से शव को लाया जा रहा है. नंदन कुमार ने बताया कि उसके पिताजी एस-7 बोगी में थे. डाॅ भुनेश्वर एस-1 में था, जिसे बाद में एस-7 में लाया गया था
नंदन ने बताया कि जिस वक्त हमें हादसे की जानकारी मिली उस वक्त वह नवादा जिला के वारसलीगंज में था जबकि उसका बड़ा भाई पटना में थे. सूचना मिलते ही दोनों भाई दौड़-दौड़े घर पहुंचे. उसने अब तक न तो रेलवे प्रशासन और न ही जिला प्रशासन से सहयोग मिलने पर नाराजगी प्रकट की. उसने बताया कि एंबुलेंस चालक को किराये के रूप में 30 हजार रुपये देना है. इतनी राशि कहां से दी जायेगी, मालूम नहीं. अब तक स्थानीय विधायक द्वारा भी रुचि नहीं दिखाने पर नाराजगी प्रकट की. सिंघौल गांव में पूरी तरह मातम पसरा है और सभी शव के आने का इंतार कर रहे हैं.
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