एइएस के मिलें लक्षण तो जल्द कराएं इलाज

Updated at : 08 Jul 2016 6:26 AM (IST)
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एइएस के मिलें लक्षण तो जल्द कराएं इलाज

बिहारशरीफ : बच्चों को संक्रामक व जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सजग है. इस जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए नयी रणनीति बनायी गयी है. जहां जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में इसकी इलाज की व्यवस्था की गयी है. वहीं, शहर के निजी क्लिनिकों के संचालकों को भी […]

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बिहारशरीफ : बच्चों को संक्रामक व जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सजग है. इस जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए नयी रणनीति बनायी गयी है. जहां जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में इसकी इलाज की व्यवस्था की गयी है. वहीं, शहर के निजी क्लिनिकों

के संचालकों को भी सजग किया
गया है, ताकि निजी अस्पतालों में आनेवाले एइएस के संदिग्ध मरीजों पर भी नजर रखी जाये और चिह्नित मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध करायी जा सके.
लक्षण मिलने पर करें सूचित : निजी अस्पतालों में एइएस के संदिग्ध मरीज इलाज के लिए आयें, तो चिकित्सीय जांच में यदि बच्चों में बीमारी के लक्षण पाये जाते हैं, तो तुरंत इसकी सूचना सिविल सर्जन को उपलब्ध करायें. साथ ही जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी व जिला एपीडिमियोलॉजिस्ट को भी सूचित करने को कहा गया है. सूचना मिलने पर जिला स्वास्थ्य विभाग के कर्मी संबंधित पीड़ित बच्चों को सदर अस्पताल में भरती करा कर उसका बेहतर इलाज कर सकें.
जिला स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 26 निजी डॉक्टरों को पत्र भेज कर आग्रह किया है. जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में इसके लिए विशेष वार्ड खोला जा चुका है. इलाज की मुकम्मल व्यवस्था की गयी है. डॉक्टर से लेकर पारा मेडिकल कर्मी तक तैनात किये जा चुके हैं. दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है. यह बीमारी आमतौर पर 01 से लेकर 15 साल तक के बच्चों में ही होती है. यह बीमारी कई कारणों से हो सकती है.
शहर के निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को भेजा गया पत्र
संदिग्ध मरीज मिलने पर सूचित करने का दिया गया निर्देश
जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में खोला गया विशेष वार्ड
इलाज व दवा की मुकम्मल है व्यवस्था
डॉक्टर से लेकर पारा मेडिकल कर्मी किये गये तैनात
26 निजी चिकित्सकों की बनी सूची
बीमारी के लक्षण
तेज बुखार आना व लगातार बुखार रहना
शरीर में चमकी आना
दांत पर दांत बैठना
बच्चे का सुस्त होना
बच्चे का बेहोश होना
चिउंटी काटने पर शरीर में कोई हरकत न होना
अभिभावक रहें सतर्क
बच्चों को बगीचे में गिरे जूठे फल को न खाने दें
सूअर विचरण वाले स्थानों पर न जाने दें
बच्चों को खाना खाने से पहले साबुन से हाथ धुलाएं
पीने के पानी में कभी हाथ न डालें
नियमित रूप से बच्चों के नाखून काटें
गंदगी व जलजमाव वाले जगहों से दूर रखें
बाल्टी में रखे गये पीने के पानी को हैंडिल लगे मग से निकालें
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