न शिक्षक, न बेंच-डेस्क, कैसे हो पढ़ाई

Updated at : 14 Jan 2015 8:26 AM (IST)
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न शिक्षक, न बेंच-डेस्क, कैसे हो पढ़ाई

सिर्फ नामांकन और परीक्षा फार्म भरने आते हैं परीक्षार्थी बिहारशरीफ/नालंदा : नालंदा प्रखंड का किसान +2 उच्च विद्यालय, धरहरा में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किये जाने से यहां नामांकित बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है. यहां कला तथा विज्ञान संकाय में कुल 110 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन विद्यालय को एक भी इंटरमीडिएट शिक्षक नहीं […]

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सिर्फ नामांकन और परीक्षा फार्म भरने आते हैं परीक्षार्थी
बिहारशरीफ/नालंदा : नालंदा प्रखंड का किसान +2 उच्च विद्यालय, धरहरा में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किये जाने से यहां नामांकित बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है. यहां कला तथा विज्ञान संकाय में कुल 110 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन विद्यालय को एक भी इंटरमीडिएट शिक्षक नहीं मिले हैं. विडंबना तो यह है कि लगभग 28 लाख रुपये की लागत से इंटरमीडिएट का भवन का निर्माण भी कराया गया है, लेकिन कक्षाओं में बैठने के लिए बेंच-डेस्क नदारद हैं.
इन्हीं सब कारणों से विद्यालय के विद्यार्थी यहां सिर्फ नामांकन कराने तथा आवेदन फार्म भरने के लिए ही आते हैं. विद्यालय का छात्र सौरभ कुमार ने बताया कि जब यहां शिक्षक ही नहीं है तो विद्यालय में बैठ कर समय बरबाद क्यों करें. इससे अच्छा तो हमलोग ट्यूशन-कोचिंग में पढ़ कर परीक्षा की तैयारी कर लें. यहां नामांकन कराने के संबंध में पूछने पर कई छात्रों ने कहा कि इसी विद्यालय के विद्यार्थी होने के कारण वे लोग यही नामांकन कराना फायदेमंद समझते हैं. बाहर जाकर दूसरे महाविद्यालयों में नामांकन कराने में कई प्रकार की समस्याएं हैं. उन्होंने कहा कि कौन सा विद्यालय अच्छा कहा जा सकता है. सभी जगह यही स्थिति है. बिना ट्यूशन कोचिंग के कहीं काम नहीं चलेगा.
कभी भी घट सकती है अनहोनी
विद्यालय के माध्यमिक कक्षाओं के संचालन के लिए छह कमरे है, जबकि छह अन्य कमरों का निर्माण कार्य जारी है. पूर्व के बने इन्हीं कमरों में छात्रों की कक्षाएं आयोजित होती हैं. इन कमरों की स्थिति इतनी जजर्र है कि ये कमरे कभी भी ध्वस्त हो सकते हैं. इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों तथा पढ़ाने वाले शिक्षक हमेशा आशंका से भयभीत रहते हैं. यहां कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है. ग्रामीणों का कहना है कि छह निर्माणाधीन कमरों को अति शीघ्र निर्माण कर बच्चों को नये भवन में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए.
शिक्षकों का घोर अभाव
यहां माध्यमिक कक्षाओं के लगभग साढ़े तीन सौ विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए मात्र 5 शिक्षक मौजूद हैं. विद्यालय में जबकि शिक्षकों के कुल 14 पद सृजित है. विद्यालय में जबकि शिक्षकों के कुल 14 पद सृजित हैं. शिक्षकों के अभाव में प्रमुख विषयों विज्ञान, अंग्रेजी, उर्दू आदि विषयों की पढ़ाई नहीं होती है. खास कर विद्यालय के नवम वर्ग व दशम वर्ग में उर्दू पढ़ाने वाले 75 विद्यार्थी नामांकित है, लेकिन उर्दू शिक्षक ही नहीं है. ऐसे में विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों के लिए ट्यूशन तथा कोचिंग संस्थान ही एकमात्र सहारा है. विद्यालय की छात्र कंचन कुमारी ने बताया कि शिक्षक की कमी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है.
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