पुलिस हमला कांड: डीजे जांच विवाद में पिता-पुत्र समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

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पुलिस हिरासत में आरोपी | Prabhat Khabar Network

बंदरा में पुलिस पर हमला करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में पियर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

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पियर पुलिस हमला: मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड अंतर्गत बड़गांव चौक पर विगत छह फरवरी को पुलिस टीम पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पियर थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हमले में शामिल पिता-पुत्र समेत तीन मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है. गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शुक्रवार को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से अदालत के आदेश पर उन्हें जेल भेज दिया गया.

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अलग-अलग स्थानों से हुई तीन आरोपियों की गिरफ्तारी

पियर थानाध्यक्ष कुंदन कुमार ने बताया कि मामले में वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस टीम लगातार छापेमारी कर रही थी.

  • बड़गांव निवासी सूरज सहनी और उसके पुत्र मनीष कुमार को गुप्त सूचना के आधार पर सरफुद्दीनपुर से दबोचा गया.
  • तीसरे आरोपी मो. असरार को पुलिस ने गोविंदपुर छपरा स्थित उसके पैतृक घर से घेराबंदी कर गिरफ्तार किया.
  • पुलिस पर हमला करने के इस चर्चित मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष के बयान पर 50 नामजद और करीब 200 अज्ञात उपद्रवियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

गाड़ी तोड़ी, हथियार छीने और पुलिसकर्मियों को पीटा

प्राथमिकी के अनुसार, उपद्रवियों पर पुलिस वाहन को क्षतिग्रस्त करने, हथियार छीनने का प्रयास करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने तथा महिला व पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ बेरहमी से मारपीट करने के गंभीर आरोप हैं.

क्या था पूरा विवाद

घटना छह फरवरी की है, जब पियर थाने की गश्ती पुलिस टीम ने बड़गांव चौक पर एक डीजे वाहन को रोककर पूछताछ शुरू की थी.

  • सामान्य पूछताछ के दौरान देखते ही देखते कहासुनी बढ़ गई और तीखी नोकझोंक हिंसक झड़प में तब्दील हो गई.
  • बीच-बचाव करने पहुंचे बड़गांव के सरपंच लालबाबू सहनी समेत कई लोग चोटिल हो गए.
  • इसके बाद उग्र ग्रामीणों ने तत्कालीन थानेदार को बंधक बना लिया और चौक जाम कर दिया.
  • पथराव और झड़प में तत्कालीन थानाध्यक्ष रजनीकांत, एक एएसआई तथा सात अन्य पुलिस जवान लहूलुहान हुए थे.
  • बाद में वरीय अधिकारियों की मध्यस्थता से जाम हटा और भारी राजनीतिक दबाव के चलते तत्कालीन थानाध्यक्ष को निलंबित भी किया गया था.

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