सात महीने से बंद है एंबुलेंस
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :17 Nov 2016 4:54 AM
विज्ञापन

गड़बड़ी. निजी वाहन के सहारे मरीज, सरकारी से ढोये जा रहे सामान लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही. लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बदहाली के कारण इसका लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा. मुंगेर सदर अस्पताल से रेफर होने वाले रोगियों को सरकारी स्तर […]
विज्ञापन
गड़बड़ी. निजी वाहन के सहारे मरीज, सरकारी से ढोये जा रहे सामान
लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही. लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बदहाली के कारण इसका लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा. मुंगेर सदर अस्पताल से रेफर होने वाले रोगियों को सरकारी स्तर पर एंबुलेंस की सुविधा भले ही न मिले. लेकिन एंबुलेंस पर कहीं बच्चों के किट्स तो कहीं दवाई की ढुलाई हो रही है.
मुंगेर : मुंगेर सदर अस्पताल में एंबुलेंस की बेहतर व्यवस्था नहीं है. या यूं कहे कि सरकारी स्तर पर व्यवस्था है भी तो वह आम लोगों को उपलब्ध नहीं हो पाती. अलबत्ता यहां आपात स्थिति में रेफर होने वाले रोगियों को पटना व भागलपुर जाने के लिए निजी एंबुलेंस का ही सहारा लेना पड़ता है. बदहाली का आलम यह है कि पिछले सप्ताह सिविल सर्जन कार्यालय के प्रधान लिपिक को जब डयूटी के दौरान ही दिल का दौरा पड़ा तो उसे भी अस्प्ताल का एंबुलेंस नहीं मिल पाया और निजी एंबुलेंस के सहारे ही पटना ले जाया गया था.
सात महीने से शव वाहन भी बंद: अप्रैल 2016 से 1099 एंबुलेंस तथा शव वाहन बंद पड़ा हुआ है़ पूरी तरह वातानुकूलित एवं अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधा से उपलब्ध इस एंबुलेंस की लागत लगभग 37 लाख बतायी जाती है. इस वाहन में मरीजों के लिए इतनी सुविधाएं दी गयी है कि मुंगेर शहर के कई प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान में भी उपलब्ध नहीं है़
यहां तक कि सदर अस्पताल में भी ऐसी व्यवस्था से लैस एक भी यूनिट नहीं है़ गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए भागलुपर या पटना ले जाने में इस वाहन का फिलहाल कोई जोर नहीं है़ इतना ही नहीं जिले में जब भी कोई वीआईपी नेता व अधिकारी का कार्यक्रम रहता है तो इसी एंबुलेंस को वहां तैयार रखा जाता है़ किंतु दुर्भाग्य है कि इस एंबुलेंस का संचालन एक एनजीओ के हाथों सौंप दिया गया है. जिसके द्वारा एंबुलेंस सेवा में कार्यरत चालकों व पारा मेडिकल स्टाफों को मानदेय का भुगतान नहीं किये जाने के कारण 1099 के सभी एंबुलेंस कर्मी पिछले सात महीने से हड़ताल पर हैं और इसएंबुलेंस की सेवा आम लोगों को नहीं मिल पाती.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा
ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि 102 नंबर के एंबुलेंस से बेबी कीट ढोया जा रहा है. वे इसकी जांच करेंगे.
एंबुलेंस से ढोया जा रहा बेबी किट
सदर अस्पताल में बुधवार को 102 नंबर के एंबुलेंस में बेबी किट से भरे कार्टूनों को दवा भंडार ले जाया जा रहा था़ एंबुलेंस पर चालक पंकज कुमार, कृष्णमुरारी कुमार तथा इएमटी विक्रम कुमार सवार थे़ उनसे जब पूछा गया कि क्या अब एंबुलेंस से अस्पताल के सामान की ढ़ुलायी की जाती है, तो चालक ने जबाव दिया कि हम तो हुकुम के गुलाम हैं.
हमें यहां के अधिकारियों से जो आदेश मिलता है, हमलोगों को वैसा ही करना पड़ता है़ मालूम हो कि समय पर सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों को इलाज के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है़ 102 नंबर का एंबुलेस पूरी तरह सरकारी है़ जिससे गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चे, वरिष्ठ नागरिकों, दुर्घटनाओं तथा गरीबी रेखा के नीचे के मरीजों को नि:शुल्क सेवा प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है़ बांकी मरीजों को काफी किफायती दर पर यह एंबुलेंस उपलब्ध कराया जाना है़
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










