चार साल बाद ऐतिहासिक फैसला
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 May 2016 4:41 AM
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आदित्य राजकमल हत्याकांड. सह आरोपी अमित व मनोज अब तक फरार बालक आदित्य राजकमल हत्याकांड में अंतत: चार वर्ष बाद परिजनों को न्याय मिला. कोर्ट ने मुख्य आरोपी मनीष मंडल उर्फ नेपाली मंडल को फांसी की सजा सुनायी है. फैसले पर आदित्य राजकमल की मां कमला वर्मा एवं पिता राजकमल उर्फ राजू मंडल ने कहा […]
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आदित्य राजकमल हत्याकांड. सह आरोपी अमित व मनोज अब तक फरार
बालक आदित्य राजकमल हत्याकांड में अंतत: चार वर्ष बाद परिजनों को न्याय मिला. कोर्ट ने मुख्य आरोपी मनीष मंडल उर्फ नेपाली मंडल को फांसी की सजा सुनायी है. फैसले पर आदित्य राजकमल की मां कमला वर्मा एवं पिता राजकमल उर्फ राजू मंडल ने कहा कि उसे न्याय पर पूरा भरोसा था और आज उसे न्याय मिला है. लेकिन उसे इस बात का दुख है कि इस मामले में दो सह आरोपी अमित झा एवं मनोज कुमार को आजतक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पायी है. जिसके भय से घर-द्वार भी छोड़ दिया.
मुंगेर : दस वर्षीय बालक आदित्य राजकमल का अपराधियों ने अपहरण किया था.
नौ अप्रैल 2012 को पड़ोस के ही जमालपुर केशोपुर नक्कीनगर निवासी मनीष मंडल उर्फ नेपाली मंडल ने आइसक्रीम खिलाने के बहाने आदित्य को बुला कर ले गया और फिर उसने अपने मोबाइल संख्या 9572588101 से राजकमल के मोबाइल संख्या 9308894813 पर फोन कर 50 हजार की फिरौती की मांग की.
इतना ही नहीं मनीष ने राजकमल को आदित्य से बात भी कराया और कहा कि तुम्हारा बेटा मेरे पास है. यदि जिंदा देखना चाहते हो तो 50 हजार रुपये चाहिए. मनीष मंडल ने अपने मोबाइल से लगातार तीन बार फोन कर राशि की मांग की थी. कॉल डिटेल्स के अनुसार उसने 14:38 बजे 155 सेकेंड, 14:42 बजे 44 सेकेंड और फिर 14:46 बजे 80 सेकेंड बात की थी.
आदित्य की अपराधियों ने की थी नृशंस हत्या : आदित्य का अपना पिता से बात कराने के बाद मनीष मंडल, अमित झा एवं मनोज कुमार ने उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और फिर गला दबा कर उसकी हत्या कर दी थी. इतना ही नहीं पोस्टमार्टम में आदित्य के शरीर पर कई जख्म भी पाये गये थे और उसका आंख भी निकला हुआ था.
इस नृशंस हत्या की सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के अपर लोक अभियोजक सुशील कुमार सिन्हा ने शनिवार को न्यायालय में विस्तार से घटना को रखा और अभियुक्त को फांसी की सजा देने की अपील की थी. जिसे सुनवाई के बाद विद्वान न्यायाधीश ने पूरे घटनाक्रम पर गौर करते हुए मनीष उर्फ नेपाली मंडल को फांसी की सजा सुनायी.
72 घंटे में हुआ था चार्जशीट : आदित्य अपहरण सह हत्याकांड के मामले में पुलिस ने महज 72 घंटे के अंदर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था. कांड के अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी मुकेश कुमार ने आइपीसी की धारा 364 ए, 302, 377 एवं 201/34 के तहत 12 अप्रैल 2012 को न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया था. यह आरोप पत्र मनीष मंडल उर्फ नेपाली मंडल के विरुद्ध समर्पित करते हुए पुलिस डायरी में अनुसंधानकर्ता ने अमित झा व मनोज कुमार के विरुद्ध पूरक अनुसंधान जारी रखते हुए दाखिल किया था.
मनीष ने ही बरामद कराया था शव : आदित्य के अपहरण के बाद जब जमालपुर शहर आंदोलित हो गया था तो पुलिस ने इस मामले में मनीष मंडल को अगले ही दिन 10 अप्रैल को गिरफ्तार किया था. चूंकि फोन पर बातचीत के दौरान आदित्य के पिता राजकमल को मनीष की ही आवाज सुनायी दी थी.
जब मनीष को पुलिस ने गिरफ्तार किया था तो उसके पैकेट से जो मोबाइल मिला था उसी मोबाइल से मनीष ने आदित्य को अपने पिता राजकमल से बात कराया था. साथ ही उसी मोबाइल से 50 हजार की फिरौती भी मांगी गयी थी. फलत: पूरे मामले का उद्भेदन हो गया और मनीष के बताये स्थान से ही तालाब के झाड़ी से आदित्य का शव बरामद किया गया था.
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