फिर गुलजार होगा मुंगेर का पत्थर उद्योग

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फिर गुलजार होगा मुंगेर का पत्थर उद्योग 10 हजार मजदूरों को मिलेगा रोजगार फोटो संख्या : 19फोटो कैप्सन : पहाड़ प्रतिनिधि, मुंगेर राज्य सरकार ने मुंगेर में पत्थर खनन के लिए पुन: पहाड़ की बंदोबस्ती का निर्णय लिया है. सरकार के इस निर्णय से एक बार फिर मुंगेर जिले में बंद पड़े पत्थर उद्योग को […]

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फिर गुलजार होगा मुंगेर का पत्थर उद्योग 10 हजार मजदूरों को मिलेगा रोजगार फोटो संख्या : 19फोटो कैप्सन : पहाड़ प्रतिनिधि, मुंगेर राज्य सरकार ने मुंगेर में पत्थर खनन के लिए पुन: पहाड़ की बंदोबस्ती का निर्णय लिया है. सरकार के इस निर्णय से एक बार फिर मुंगेर जिले में बंद पड़े पत्थर उद्योग को गुलजार होगा और हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा. साथ ही पुन: क्रेसर उद्योग के भी स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है. मुंगेर एवं बांका में बंद पड़े पत्थर उत्खनन को चालू करने के लिए राज्य सरकार ने सैद्धांतिक रूप से निर्णय ले लिया है और शीघ्र ही पहाड़ों को चिह्नित कर उसकी बंदोबस्ती की जायेगी. सरकार के इस निर्णय से पिछले एक दशक से बंद पत्थर उद्योग के माध्यम से जहां एक ओर बड़ी संख्या में मजदूरों को रोजगार मिलेगा. वहीं इस क्षेत्र में निर्माण कार्य के लिए पत्थर की आपूर्ति सुलभ हो पायेगी. अभी झारखंड के साहेबगंज व पाकुड़ से पत्थर की आपूर्ति की जाती है. जिसके कारण निर्माण कार्यों की लागत मूल्य काफी बढ़ रही है. खनन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मुंगेर जिले के जमालपुर से लेकर पाटम व धरहरा के इलाके में पत्थर उत्खनन के लिए बंदोबस्ती होती थी. ओल्ड क्यूरी, न्यू क्यूरी सहित वैद्य रूप से छह लीज के माध्यम से क्षेत्र में पत्थर उत्खनन का कार्य किया जाता था. इसके साथ ही नंदलालपुर व मय के इलाके में भी पहाड़ से पत्थर की खुदाई की जाती थी. लेकिन एक दशक पूर्व इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया. फलत: इसमें लगे दस हजार मजदूर बेरोजगार हो गये. इतना ही नहीं मुंगेर के सफियाबाद में पत्थर पर आधारित दर्जनों क्रेसर का संचालन होता था. वह भी बंद हो गया. सरकार के इस निर्णय से एक बार फिर इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. विदित हो कि मुंगेर में बंद पड़े पत्थर उद्योग को चालू करने के लिए लगातार मांगें उठती रही है और कई बार इसके लिए आंदोलन भी हुए. पत्थर उद्योग से जुड़े मजदूर नेता पप्पू यादव ने कहा कि पत्थर उद्योग के पुन: चालू होने से क्षेत्र के लोगों को रोजगार का बड़ा अवसर मिलेगा. एक ओर जहां सीधे तौर पर पत्थर उत्खनन में मजदूर वर्ग के लोग लगेंगे. वहीं कैरी करने के लिए ट्रैक्टर व ट्रक तथा क्रेसर संचालन के माध्यम से भी रोजगार प्राप्त होगा.

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