ओपीडी में लगा था ताला, बिना इलाज लौटे रोगी

Updated at : 19 Nov 2019 8:07 AM (IST)
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ओपीडी में लगा था ताला, बिना इलाज लौटे रोगी

मुंगेर : सदर अस्पताल में इन दिनों चिकित्सकों की कमी चल रही है. एक-एक कर लगातार यहां चिकित्सक की संख्या घटती जा रही है, जबकि जिले की आबादी में लगातार वृद्धि हो रही है. यहां दूर-दराज से काफी उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है. हाल यह है कि यहां […]

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मुंगेर : सदर अस्पताल में इन दिनों चिकित्सकों की कमी चल रही है. एक-एक कर लगातार यहां चिकित्सक की संख्या घटती जा रही है, जबकि जिले की आबादी में लगातार वृद्धि हो रही है. यहां दूर-दराज से काफी उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है. हाल यह है कि यहां बिना वैकल्पिक व्यवस्था किये ही ओपीडी में ताला लगा दिया जाता है. सके कारण मरीजों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

बिना इलाज कराये लौटे दर्जनों मरीज: कुछ ओपीडी में ताला लगे रहने तथा जीओपीडी में चिकित्सक की कमी रहने के कारण सोमवार को सदर अस्पताल में इलाज कराने को पहुंचने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. अस्पताल के हड्डी विभाग के ओपीडी में सोमवार को ताला लटका हुआ था. इससे इलाज को पहुंचने वाले मरीजों को बिना इलाज कराये ही वापस घर लौट जाना पड़ा.
वहीं पास में चल रहे जीओपीडी में मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई थी. कारण था कि यहां दो की जगह सिर्फ एक चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे थे. स्थिति यह हो गयी कि ओपीडी का समय खत्म होते ही चिकित्सक ड‍्यूटी से उठ गये और मरीज लाइन में खड़े रह गये. इससे कई मरीजों को बिना इलाज कराये ही वापस घर लौट जाना पड़ा.
चिकित्सकों की कमी से मरीजों को हो रही परेशानी: वैसे तो सदर अस्पताल में 31 चिकित्सकों का पद स्वीकृत है. हालांकि जिस समय यह पद स्वीकृत हुआ था, उस समय मुंगेर की आबादी काफी कम थी. उसकी अपेक्षा आज जिले की आबादी काफी बढ़ चुकी है. किंतु यहां वर्तमान में मात्र 20 चिकित्सक ही पदस्थापित हैं. इसमें से पांच चिकित्सक को अलग-अलग कार्यक्रम का प्रभार मिला हुआ है, जिस कारण इन चिकित्सकों को अपने-अपने कार्यक्रम पर विशेष फोकस रखना पड़ता है.
इतना ही नहीं अक्सर कोई न कोई चिकित्सक किसी कारण से छुट्टी पर रहते हैं. कभी-कभी तो एक साथ दो-दो चिकित्सक गवाही के लिए चले जाते हैं, जिसके कारण संबंधित चिकित्सक का ड्यूटी पोस्ट व आउटडोर खाली रहता है. ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा जब तक यहां चिकित्सकों के स्वीकृत पदों को भरा नहीं जायेगा, तब तक यहां के मरीजों को समुचित चिकित्सा सेवा का लाभ नहीं मिल पायेगा.
अमैया बैजलपुर गांव में चेचक का प्रकोप
असरगंज. प्रखंड के अमैया पंचायत अंतर्गत बैजलपुर गांव में चेचक का प्रकोप बढ़ गया है. चेचक की खबर पर असरगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ ललन कुमार द्वारा बैजलपुर गांव में चेचक पीड़ित की जांच पड़ताल की गई. जिसमें उनके द्वारा जांच के बाद रोगी को चेचक होने की पुष्टि की.
जानकारी के अनुसार गांव के तीन बच्चे नचिकेता कुमार, नैंसी कुमारी, राहुल कुमार तथा युवक अविनाश कुमार में चेचक के लक्षण मिले हैं. जिसके बाद 28 वर्षीय अविनाश कुमार को इलाज के लिए प्राथमिक चिकित्सा केंद्र असरगंज लाया गया. जहां से उसे बेहतर इलाज के लिये भागलपुर रेफर कर दिया गया. जबकि अन्य चेचक रोगियों का इलाज किया जा रहा है.
कहते हैं प्रभारी उपाधीक्षक
सदर अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ निरंजन कुमार ने बताया कि डॉ आरके गुप्ता तथा उन्हें गवाही देने के लिए कोर्ट जाना पड़ा. इस कारण से हड्डी विभाग के कक्ष को बंद कर दिया गया था. जीओपीडी के एक चिकित्सक पोस्टमार्टम के लिए चले गये थे. पोस्टमार्टम करने के बाद पुन: कुछ देर में वे जीओपीडी पहुंच गये थे. चिकित्सकों का अभाव है, किसी तरह से काम किया जा रहा है.
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