फोन कीजिए तो जवाब मिलेगा सभी एंबुलेंस अभी ऑन रोड

Published at :14 May 2018 6:39 AM (IST)
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फोन कीजिए तो जवाब मिलेगा सभी एंबुलेंस अभी ऑन रोड

मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कर रखी है. ताकि गंभीर अवस्था में मरीजों को इलाज के लिए त्वरित हायर सेंटर तक पहुंचाया जा सके. किंतु अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता के कारण मरीजों को सरकारी एंबुलेंस का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्रभात […]

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मुंगेर : स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कर रखी है. ताकि गंभीर अवस्था में मरीजों को इलाज के लिए त्वरित हायर सेंटर तक पहुंचाया जा सके. किंतु अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता के कारण मरीजों को सरकारी एंबुलेंस का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्रभात खबर की टीम रविवार को सदर अस्पताल मुंगेर में एंबुलेंस का ऑन द स्पॉट जायजा लिया. जिसके बाद कई ऐसी बातें सामने आयीं, जो स्वास्थ्य विभाग व्यवस्था के लिए शर्मनाक है. साथ ही मरीजों के भावना के साथ विभागीय व्यवस्था द्वारा खिलवाड़ किया जाता है.

अभी एंबुलेंस ऑन रोड है…: प्रभात खबर की टीम रविवार को सदर अस्पताल पहुंची तथा एक महिला मरीज से 102 नंबर पर फोन करवाया गया. कॉल रिसिव होते ही महिला से पूछा गया कि आप कहां से बोल रहे हैं, जिस पर महिला ने अपने गांव का पता बताया और कहा कि जल्दी आइये. एक गर्भवती को प्रसव के लिए सदर अस्पताल ले जाना है. जिस पर महिला को बताया गया कि अभी सभी एंबुलेंस ऑन रोड हैं, आप अपना नंबर लिखा दीजिए. एंबुलेंस आने पर आप से संपर्क कर लिया जायेगा. इसके बाद जब प्रभात खबर ने अस्पताल परिसर में एंबुलेंस की पड़ताल की, तो एक 1099 नंबर की एंबुलेंस व एक 102 नंबर की एंबुलेंस लगी हुई थी. जबकि एक सांसद कोटे का एंबुलेंस एएनएम स्कूल के बगल वाले कैंपस में खड़ा था. अब समझा जा सकता है कि 6 एंबुलेंस में से 3 अस्पताल में रहने के बावजूद मरीज को यह कह कर टाल दिया गया कि एंबुलेंस ऑन रोड है.
सरकारी एंबुलेंस में अधिकांश सेवाएं मुफ्त: सरकारी एंबुलेंस में लाल कार्ड धारी, पीला कार्ड धारी, वरिष्ठ नागरिक, सड़क दुर्घटना में घायल मरीज, गर्भवती महिला, प्रसूता व नवजात शिशु तथा कालाजार के मरीजों को मुफ्त सेवा उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है. बांकी मरीजों से 10 रुपये प्रतिकिलो मीटर के दर से एक तरफ का किराया लिया जाना है. वहीं शव वाहन सभी के लिए नि:शुल्क है. किंतु एंबुलेंस चालक व इएमटी जैसे ही यह देख लेता है कि यह मुफ्त सेवा वाला मरीज है, वैसे ही मरीज को ले जाने में बहाना बनाना शुरू कर देता है. यदि मरीज के परिजन उपर से कुछ देने को तैयार होता है तो फिर उसे सेवा मिलती है.
मरीजों के परिजन से रुपये की होती है मांग: एंबुलेंस चालक व उसका इएमटी अक्सर इस बात का इंतजार करते हैं कि मरीज के परिजन उसे कुछ रुपये देने का आश्वासन दे दें, तब वह मरीज को गंतव्य स्थान तक ले जाता है. एक इएमटी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि उसे एंबुलेंस संचालन करने वाली संस्था द्वारा 9100-9200 रुपये तथा चालक को 8100-8200 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाता है. अब इतने कम वेतन में कोई कैसे गुजारा कर सकता है. इएमटी ने बताया कि प्रत्येक केस में वह मरीज के परिजन से 500-1000 रुपये तक ले लेता है. इसके लिए वह पहले ही परिजनों से बात कर लेता है. शव को पहुंचाने पर भी कम से कम 500 रुपये लिया जाता है. इएमटी ने बताया कि एंबुलेंस में डीजल भराने के लिए संस्था द्वारा पेट्रो कार्ड पर 10 किमी प्रति लीटर के दर से राशि ट्रांस्फार कर दी जाती है.
माह में 40-60 मरीजों को ही मिलती है एंबुलेंस सेवा
102 नंबर के एक एंबुलेंस का लॉग बुक देखने के बाद पता चला कि इस एंबुलेंस द्वारा किसी माह 40, किसी माह 50 तो किसी माह 60 मरीजों को गंतव्य स्थान तक पहुंचाया जा रहा है. जिसमें लगभग 20 प्रसूता व गर्भवती महिला, 10 वरिष्ठ नागरिक, 10 सड़क दुर्घटना व 10 गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों का भागलपुर या पटना या उसके घर तक पहुंचाया गया है. जबकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रति माह निजी एंबुलेंस द्वारा सरकारी एंबुलेंस से अधिक मरीजों को ले जाया जाता है.
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